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उपनल कर्मियों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट सख्त, कार्मिक सचिव शैलेश बगौली को किया तलब

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Wed, 08 Apr 2026 09:29 PM IST

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल कर्मचारियों के विनियमितीकरण और बकाया लाभों के आदेश का पालन न होने पर सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने राज्य के कार्मिक सचिव शैलेश बगौली को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

उपनल कर्मियों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट सख्त, कार्मिक सचिव शैलेश बगौली को किया तलब

मुख्य बातें

  • हाईकोर्ट ने कार्मिक सचिव शैलेश बगौली को 20 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का निर्देश दिया।
  • साल 2018 में आए खंडपीठ के फैसले (नियमितीकरण और डीए लाभ) का अब तक पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर।
  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार की समीक्षा याचिका खारिज किए जाने के बावजूद कर्मचारियों को लाभ न मिलने पर कोर्ट गंभीर।

नैनीताल, 08 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों के विनियमितीकरण के मुद्दे पर चल रही कानूनी लड़ाई ने अब नया मोड़ ले लिया है, जहां हाईकोर्ट ने सरकार की हीलाहवाली पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के कार्मिक सचिव शैलेश बगौली को 20 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का फरमान सुनाया है।

अदालत मंगलवार को उपनल कर्मचारी संघ सहित कुल पांच अवमानना याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट को याद दिलाया कि 12 नवंबर 2018 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। इस आदेश में स्पष्ट रूप से उपनल कर्मियों को नियमित करने, महंगाई भत्ता (डीए) देने और उनके वेतन से जीएसटी की कटौती तुरंत बंद करने के निर्देश दिए गए थे।

कर्मचारी पक्ष का सबसे बड़ा आरोप यह है कि सरकार एक तरफ कोर्ट के आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल रही है, तो दूसरी तरफ नियमित पदों पर धड़ल्ले से नई भर्तियां कर रही है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) और पुनर्विचार याचिका को खारिज कर चुका है, तो फिर आदेश लागू करने में देरी करना सीधे तौर पर अदालत की तौहीन है।

इधर, बचाव पक्ष यानी राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कैबिनेट उपसमिति की सिफारिशों पर अमल शुरू हो चुका है। सरकार ने तर्क दिया कि ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ का लाभ चरणबद्ध तरीके से दिया जा रहा है। इसके लिए 2018 को आधार वर्ष (Cut-off date) मानकर विभागों और कर्मचारियों के बीच नई अनुबंध व्यवस्था लागू की गई है।

हालांकि, कर्मचारी संघ ने सरकार की इस ‘अनुबंध व्यवस्था’ को पूरी तरह से भ्रामक और कोर्ट के मूल आदेश के खिलाफ बताया है। संघ का कहना है कि सरकार नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के बजाय कागजी फेरबदल में समय बर्बाद कर रही है। दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद, कोर्ट ने अब कार्मिक सचिव को खुद आकर यह बताने को कहा है कि 2018 से अब तक आदेश के अनुपालन की दिशा में जमीन पर क्या काम हुआ है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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