देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने पिछले चार वर्षों में अपनी विकास यात्रा को एक नए मुकाम पर पहुँचाया है। राज्य सरकार ने न केवल बुनियादी ढांचे और निवेश में लंबी छलांग लगाई है, बल्कि नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्यों (SDG) इंडिया इंडेक्स 2023-24 में 79 अंकों के साथ केरल के साथ संयुक्त रूप से देश में पहला स्थान हासिल कर अपनी प्रशासनिक दक्षता को साबित किया है।
यह उपलब्धि राज्य के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक बड़ी मुहर है।
आर्थिक मोर्चे पर राज्य की प्रगति के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। वर्ष 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, उत्तराखंड की आर्थिक विकास दर 7.23% रहने का अनुमान है, जबकि अगले वर्ष इसके 8.2% तक पहुंचने की उम्मीद है।

प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो 2022 के ₹1.94 लाख से बढ़कर 2025 में लगभग ₹2.74 लाख हो गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे आम जनमानस की जेब तक पहुँच रहा है।
औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में धामी सरकार ने ‘ग्लोबल इन्वेस्टर समिट’ के माध्यम से ₹3.56 लाख करोड़ के एमओयू साइन किए। इनमें से ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश जमीन पर उतारा जा चुका है, जो राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को बदल रहा है।
विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की संख्या 2022 में 60,000 से बढ़कर 2025 में 79,000 से अधिक हो गई है, जिससे 4.5 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।

राज्य ने रोजगार के मोर्चे पर भी बड़ी सफलता हासिल की है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में बेरोजगारी दर घटकर 4.4% रह गई है।
26,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं, जबकि पारदर्शी चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इसके साथ ही, सरकारी प्रयासों से श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) भी 60.1% से बढ़कर 64.4% हो गई है।
बुनियादी ढांचे की बात करें तो ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और जमरानी बांध जैसी बड़ी परियोजनाओं पर काम युद्धस्तर पर जारी है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹1.11 लाख करोड़ का भारी-भरकम बजट पेश किया है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।

‘वाइब्रेंट विलेज’ कार्यक्रम के तहत सीमांत गांवों का कायाकल्प किया जा रहा है, जिससे पलायन रोकने में मदद मिल रही है।
सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में उत्तराखंड राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 लागू करने और समान नागरिक संहिता (UCC) को प्रभावी बनाने वाला देश का पहला राज्य बना।
पर्यटन के क्षेत्र में भी नए रिकॉर्ड बने हैं; वर्ष 2025 में 6.03 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन राज्य की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। ‘मानसखंड मंदिर मिशन’ के तहत कुमाऊं के प्राचीन मंदिरों का विकास राज्य की धार्मिक पर्यटन क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।










