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उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं की मौज, लापरवाही की तो सीधे नपेंगे MD

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sat, 28 Mar 2026 01:55 PM IST

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने बिजली सेवाओं में लापरवाही बरतने पर यूपीसीएल के एमडी और निदेशकों की सीधी जवाबदेही तय कर दी है। अब उपभोक्ता शिकायतों के निस्तारण में देरी होने पर शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष पेश होना होगा।

उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं की मौज, लापरवाही की तो सीधे नपेंगे MD

मुख्य बातें

  • बिजली कनेक्शन और सेवाओं में देरी पर अब सीधे एमडी और निदेशकों को जारी होंगे नोटिस।
  • जूनियर इंजीनियरों के बजाय अब टॉप मैनेजमेंट को देनी होगी आयोग में सफाई।
  • लापरवाही जारी रहने पर भारी जुर्माने और सख्त कार्रवाई की नई गाइडलाइन लागू।

देहरादून। उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं को अब दफ्तरों के चक्कर काटने और जूनियर इंजीनियरों की मिन्नतें करने से निजात मिल सकती है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने ऊर्जा निगम की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए सीधे ‘सिर’ पर वार करने की तैयारी कर ली है। आयोग ने साफ कर दिया है कि सेवाओं में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं होगी।

अब तक की व्यवस्था में बिजली कनेक्शन में देरी या तकनीकी खामियों के मामलों में निचले स्तर के इंजीनियरों को नोटिस थमाकर खानापूर्ति कर ली जाती थी। ऊर्जा निगम पर जुर्माना तो लगता था, लेकिन बड़े अधिकारी जवाबदेही से बच निकलते थे। आयोग की नई गाइडलाइन ने इस ढर्रे को पूरी तरह बदल दिया है। अब उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) से लेकर तमाम बड़े निदेशकों को कटघरे में खड़ा किया जाएगा।

आयोग के कड़े रुख के बाद अब एमडी, निदेशक (ऑपरेशन), निदेशक (प्रोजेक्ट), निदेशक (वित्त) और निदेशक (मानव संसाधन) सीधे कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं। शिकायतों का समय पर निस्तारण न होने या निर्देशों की अवहेलना पर आयोग इन अधिकारियों को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए तलब करेगा। अधिशासी निदेशक (HR) को भी इस नई जवाबदेही प्रणाली का हिस्सा बनाया गया है।

आयोग का मानना है कि जब तक प्रबंधन के शीर्ष स्तर पर डर नहीं होगा, तब तक जमीनी स्तर पर सुधार संभव नहीं है। नए कनेक्शन के आवेदन पेंडिंग रहने या घोषित कटौती से जुड़ी समस्याओं पर अब टॉप मैनेजमेंट को जवाब देना होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम राज्य में ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बढ़ावा देगा। इससे न केवल सिस्टम में पारदर्शिता आएगी, बल्कि अधिकारियों की कार्यक्षमता में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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