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तिरंगे में लिपटकर घर लौटेगा मासूम पृथ्विक का पिता, सिक्किम के हिमस्खलन में लांसनायक विकास शहीद

सिक्किम के सीमावर्ती क्षेत्र में गश्त के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आने से पिथौरागढ़ के लांसनायक विकास कुमार शहीद हो गए हैं। विकास महज 24 वर्ष के थे और उनके पीछे 10 महीने का मासूम बेटा और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है।

तिरंगे में लिपटकर घर लौटेगा मासूम पृथ्विक का पिता, सिक्किम के हिमस्खलन में लांसनायक विकास शहीद

HIGHLIGHTS

  • 19 कुमाऊं रेजीमेंट के लांसनायक विकास कुमार सिक्किम में हिमस्खलन के कारण वीरगति को प्राप्त हुए।
  • शहीद का पार्थिव शरीर बर्फ के नीचे दब गया था, जिसे करीब दो दिनों की मशक्कत के बाद बाहर निकाला जा सका।
  • विकास अपने 10 महीने के बेटे के पहले जन्मदिन पर घर आने वाले थे, लेकिन अब उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर पहुंचेगा।

पिथौरागढ़: सरहद की सुरक्षा में तैनात उत्तराखंड के वीर सपूत ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। जनपद के गणकोट गांव निवासी लांसनायक विकास कुमार सिक्किम के बर्फीले इलाके में कर्तव्य पालन के दौरान शहीद हो गए। 19 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात 24 वर्षीय विकास 29 मार्च को अपने दो साथियों के साथ सीमा पर गश्त कर रहे थे, तभी अचानक आए भीषण हिमस्खलन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

तबाही इतनी भयानक थी कि विकास का पार्थिव शरीर करीब दो दिनों तक बर्फ की मोटी चादर के नीचे दबा रहा। सेना के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उनके शव को निकाला गया, जिसकी सूचना मंगलवार शाम करीब 3 बजे सैन्य मुख्यालय से परिजनों को दी गई। हालांकि, सदमे की आशंका के चलते माता-पिता और पत्नी को बुधवार तक इस हृदयविदारक समाचार से अनजान रखा गया था।

नियति का क्रूर खेल देखिए कि जिस घर में विकास के 10 महीने के बेटे पृथ्विक के पहले जन्मदिन की तैयारियां शुरू होने वाली थीं, वहां अब मातम पसरा है। विकास ने अपने चचेरे भाई नीरज से वादा किया था कि वह अप्रैल के आखिरी सप्ताह तक छुट्टी लेकर घर आएंगे ताकि 4 जून को अपने जिगर के टुकड़े का पहला जन्मदिन धूमधाम से मना सकें।

आज वही मासूम पृथ्विक अपनी तोतली आवाज में ‘पापा’ पुकार रहा है, जिसे यह भी नहीं पता कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।

2017-18 में भारतीय सेना का हिस्सा बने विकास की शादी साल 2023 में प्रीति से हुई थी। घर की माली हालत संभालने के लिए उनकी मां मंजू देवी स्थानीय स्कूल में भोजन माता के रूप में काम करती हैं, जबकि पिता गणेश राम का सहारा अब टूट चुका है। दिल्ली में होटल सेक्टर में कार्यरत बड़ा भाई नीरज खबर मिलते ही गांव पहुंच चुका है।

शहीद का पार्थिव शरीर गुरुवार को जिला मुख्यालय पहुंचने की संभावना है, जहां सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

पूर्वोत्तर भारत के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में इस समय मौसम का मिजाज काफी सख्त है। सिक्किम के जिन इलाकों में विकास तैनात थे, वहां साल के इस समय अचानक हिमस्खलन (Avalanche) का खतरा काफी बढ़ जाता है, क्योंकि तापमान बढ़ने के साथ बर्फ की पुरानी परतें खिसकने लगती हैं।

पूर्व सैनिक संगठन ने विकास की शहादत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि जिले ने अपना एक जांबाज योद्धा खो दिया है, जिसने अंतिम सांस तक तिरंगे की आन बनाए रखी।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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