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9 साल में 1 लाख करोड़ का कर्ज, फिर भी ‘अपनों’ पर मेहरबान सरकार : गरिमा दसौनी

उत्तराखंड में दायित्वधारियों की नई सूची जारी होने के बाद कांग्रेस ने धामी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने इसे भाजपा नेताओं का 'राजनीतिक पुनर्वास' करार देते हुए बढ़ते कर्ज और बेरोजगारी को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

9 साल में 1 लाख करोड़ का कर्ज, फिर भी 'अपनों' पर मेहरबान सरकार : गरिमा दसौनी

HIGHLIGHTS

  • कांग्रेस ने नई दायित्व नियुक्तियों को बताया सरकारी खजाने की बर्बादी।
  • मार्च 2026 तक राज्य पर 1 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का दावा।
  • पूर्व में नियुक्त दायित्वधारियों के कामकाज पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग।
  • जीएमवीएन-केएमवीएन जैसी संस्थाओं में विशेषज्ञों के बजाय राजनीतिक नियुक्तियों पर एतराज।

देहरादून, 8 जून (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड में धामी सरकार की ओर से दायित्वधारियों की एक और नई सूची जारी होते ही सियासी पारा चढ़ गया है। प्रदेश कांग्रेस ने इसे जनता के पैसों की बर्बादी और भाजपा नेताओं का राजनीतिक पुनर्वास बताया है। पार्टी का सीधा आरोप है कि जब राज्य गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है, तब सरकार आम जनता की जरूरतों को दरकिनार कर अपने कार्यकर्ताओं को उपकृत करने में लगी है।

9 साल में दोगुने से ज्यादा हुआ कर्ज

प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने इन नियुक्तियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मार्च 2017 में जब कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई थी, तब राज्य पर 44,583 करोड़ रुपये का कर्ज था। अब मार्च 2026 में मात्र 9 साल के भीतर यह कर्ज बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

गरिमा ने तंज कसते हुए कहा कि जब विकास कार्यों, स्वास्थ्य, शिक्षा और युवाओं को रोजगार देने की बात आती है, तो सरकार हमेशा संसाधनों की कमी का हवाला देती है। लेकिन भाजपा नेताओं को पद और सुविधाएं बांटने में सरकार पूरी उदारता दिखा रही है, जो प्रदेश की जनता के साथ सीधा अन्याय है।

सरकार जारी करे श्वेत पत्र

कांग्रेस ने सरकार से अब तक बनाए गए सभी दायित्वधारियों के कामकाज पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। दसौनी ने सवाल उठाया कि इन नियुक्तियों पर सरकारी खजाने से कितना खर्च हुआ और उसके बदले राज्य को क्या ठोस उपलब्धियां मिलीं, यह जानने का जनता को पूरा हक है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा रोजगार के अभाव में पलायन कर रहा है। सरकारी विभागों में हजारों पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ अपने राजनीतिक कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने पर है।

निगमों में राजनीतिक निष्ठा को तरजीह?

गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) और कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) का जिक्र करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पर्यटन प्रबंधन से जुड़ी इन महत्वपूर्ण संस्थाओं को विशेषज्ञों और अनुभवी लोगों की जरूरत है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन पदों पर नियुक्ति का आधार कोई योग्यता है या सिर्फ सत्ताधारी दल के प्रति राजनीतिक निष्ठा।

गरिमा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जवाब मांगते हुए कहा कि वे प्रदेशवासियों को बताएं कि इन नई नियुक्तियों से आम जनता को क्या सीधा फायदा मिलेगा। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि वह जनता के धन के इस दुरुपयोग और राजनीतिक संरक्षण की संस्कृति के खिलाफ अपनी आवाज लगातार मुखर करती रहेगी।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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