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ईरान में अयातुल्लाह खामेनेई की मौत पर उत्तराखंड में मातम, अमेरिका-इजरायल के खिलाफ फूटा गुस्सा

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद उत्तराखंड के शिया समुदाय में भारी शोक की लहर है। देहरादून के विभिन्न इमामबारगाहों में मजलिस का आयोजन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और अमेरिका-इजरायल के हमलों की कड़ी निंदा की गई। वहीं, युद्ध के हालात के बीच ईरान में इंटरनेट ठप होने से देहरादून के कई परिवारों का वहां पढ़ रहे अपने बच्चों और रिश्तेदारों से संपर्क टूट गया है। खौफजदा परिजनों और मुस्लिम संगठनों ने भारत सरकार से ईरान और अरब देशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी की गुहार लगाई है।

ईरान में अयातुल्लाह खामेनेई की मौत पर उत्तराखंड में मातम, अमेरिका-इजरायल के खिलाफ फूटा गुस्सा

HIGHLIGHTS

  • अयातुल्लाह खामेनेई की मौत पर दून के शिया समुदाय ने जताया शोक, इजरायल-अमेरिका का कड़ा विरोध।
  • देहरादून की इमामबारगाहों में आयोजित हुईं मजलिसें, मुस्लिम संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों की हत्या बताया।
  • ईरान में इंटरनेट और फोन सेवाएं ठप, वहां फंसे देहरादून के छात्रों से परिजनों का टूटा संपर्क।
  • उत्तराखंड के लोगों ने भारत सरकार से की अपील, अरब और ईरान से भारतीयों को सुरक्षित निकालने की मांग।

देहरादून। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर से उत्तराखंड के शिया मुसलमानों में गहरी शोक की लहर दौड़ गई है। समुदाय ने उन्हें शहीद का दर्जा देते हुए अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों की कड़ी निंदा की है। देहरादून के विभिन्न इलाकों में शोकसभाएं (मजलिस) आयोजित कर खामेनेई को खिराज-ए-अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश की गई।

देहरादून के ईसी रोड स्थित इमामबारगाह एवं मस्जिद में अंजुमन मोईनुल मोमिनीन द्वारा विशेष मजलिस का आयोजन हुआ। इमाम मौलाना शहंशाह हुसैन जैदी ने अपनी तकरीर में स्पष्ट कहा कि खामेनेई की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी और हक की जीत होगी। इंदर रोड स्थित इमामबारगाह में भी मौलाना रिवायत अली और मौलाना रजा शाह कुम्मी ने उन्हें याद करते हुए कहा कि खामेनेई ने इमाम हुसैन की तरह वक्त के अत्याचारियों के सामने कभी घुटने नहीं टेके।

इस खबर से शिया बाहुल्य इलाकों में आशूरा जैसा माहौल है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के प्रदेश अध्यक्ष पीर सैयद अशरफ हुसैन कादरी और संयुक्त नागरिक संगठन के सचिव सुशील त्यागी ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानूनों की खुलेआम हत्या बताया है।

इंटरनेट ठप होने से बढ़ी बेचैनी, अपनों से टूटा संपर्क

मिडिल ईस्ट में भड़की इस जंग ने केवल कूटनीतिक हलचल ही नहीं बढ़ाई है, बल्कि हजारों किलोमीटर दूर देहरादून में बैठे परिवारों की रातों की नींद भी उड़ा दी है। ईरान में युद्ध के हालात के बीच इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी गई हैं। इसके चलते वहां रह रहे उत्तराखंड के छात्रों और नौकरीपेशा लोगों का अपने परिजनों से संपर्क पूरी तरह कट गया है।

डालनवाला निवासी मौलाना रजा शाह कुम्मी की भांजी आसिया बतूल ईरान के मशहद और भतीजा मोहम्मद रब्बानी कुम शहर में तालीम हासिल कर रहे हैं। परिजनों के मुताबिक, शनिवार को उनकी आखिरी बार बात हुई थी। तब बच्चों ने कुम और तेहरान के आसपास हमलों की जानकारी दी थी। इसके बाद से यूनिवर्सिटी से बाहर निकलने पर पाबंदी लग गई और इंटरनेट पूरी तरह बंद हो गया।

चूना भट्टा निवासी मौलाना रिवायत अली के बेटे वहाब भी पिछले आठ सालों से कुम में पढ़ाई कर रहे हैं। हमले की शुरुआती सूचना देने के बाद से वहाब का फोन लगातार नेटवर्क क्षेत्र से बाहर बता रहा है। परिजन हर पल इसी आस में बैठे हैं कि किसी तरह वहां से कोई फोन आ जाए।

सरकार से सुरक्षित वापसी की गुहार

दीपलोक कॉलोनी की रहने वाली जैबुन जैदी की बहन हुमा जैदी भी अपने परिवार के साथ ईरान में रह रही हैं, जहां उनके पति एक विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। रूंधे गले से परिजनों ने बताया कि शुक्रवार के बाद से उनका कोई अता-पता नहीं है। फोन और मैसेज दोनों ब्लॉक हैं।

इस खौफनाक मंजर के बीच मुस्लिम संगठनों ने भारत सरकार से तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है। समुदाय ने अपील की है कि ईरान में फंसे सभी भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाने के लिए जल्द से जल्द विशेष व्यवस्था की जाए। हालांकि, कुछ राहत की खबर अन्य खाड़ी देशों से आई है। आजाद कॉलोनी के मौलाना अहमद के भाई (जो कतर में हैं) और सऊदी अरब के रियाद में रह रहे दून के समद ने फोन पर पुष्टि की है कि उन मुल्कों में फिलहाल हालात सामान्य बने हुए हैं और बाजार खुले हैं।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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