Nag Panchami Doodh Niyam : नाग पंचमी का त्योहार आते ही अक्सर यह सवाल सामने आता है कि पूजा के दौरान दूध चढ़ाने का सही तरीका क्या है।
कई लोग श्रद्धा में आकर जीवित सांपों को दूध पिलाने लगते हैं, जबकि धार्मिक ग्रंथों में नाग देवता के प्रतीकात्मक अभिषेक की बात कही गई है। इस दिन की मूल भावना प्रकृति और जीवों के प्रति सम्मान प्रकट करना है, न कि उन्हें किसी तरह का कष्ट देना।
सांप को दूध पिलाना और अभिषेक करना: दोनों में अंतर समझें

पौराणिक कथाओं में नागों को दूध से स्नान यानी अभिषेक कराने का प्रसंग मिलता है। जब जनमेजय के नाग यज्ञ के समय नागों को जलन और अग्नि ताप का सामना करना पड़ा था, तब उन्हें शीतलता देने के लिए दूध से स्नान कराया गया था।
शास्त्रों में नाग देवता की पूजा, तस्वीर या प्रतिमा पर दूध अर्पित करने का विधान है। कहीं भी जीवित सांप को पकड़कर जबरन दूध पिलाने का निर्देश नहीं है।
जीवित सांप को दूध क्यों नहीं पिलाना चाहिए?
सांप रेप्टाइल यानी सरीसृप वर्ग में आते हैं। उनका पाचन तंत्र दूध जैसे तरल पदार्थ को पचाने के लिए नहीं बना होता।
जबरन दूध पिलाने से सांपों के फेफड़ों में संक्रमण हो सकता है, जो उनके लिए जानलेवा साबित होता है। इसलिए आस्था के नाम पर जीवित सांपों को पकड़ना या उन्हें दूध पिलाना किसी भी तरह उचित नहीं माना जाता।
नाग पंचमी पर पूजा करने का सही तरीका
सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को स्वच्छ करें। घर के मंदिर या पूजा स्थान पर नाग देवता की धातु की प्रतिमा, मिट्टी का स्वरूप या चित्र स्थापित करें।
नाग देवता को जल और कच्चे दूध से प्रतीकात्मक स्नान कराएं। इसके बाद चंदन, हल्दी, अक्षत, फूल और नैवेद्य अर्पित करें।
भगवान शिव की पूजा करें, शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएं। नाग पंचमी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में धूप-दीप से आरती करें।
नाग पंचमी के दिन इन बातों का विशेष ध्यान रखें
- पूजा हमेशा नाग देवता की प्रतिमा, चित्र या दीवार पर बनाए गए प्रतीकात्मक स्वरूप की ही करें।
- सपेरों से जीवित सांप लेकर पूजा करने या फोटो-वीडियो बनाने जैसी गतिविधियों से बचें।
- पूजा के बाद अपनी सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को अन्न या जरूरी वस्तुओं का दान करें।
नाग पंचमी श्रद्धा, प्रकृति प्रेम और जीव रक्षा का पावन पर्व है। नाग देवता की प्रतिमा पर विधि-विधान से जल व दूध अर्पित करके आप पूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं।













