Name Plate Vastu Tips : घर का मुख्य द्वार सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि यहीं से घर में ऊर्जा का प्रवेश भी होता है। मुख्य द्वार पर लगी नेम प्लेट आपके घर की पहली पहचान होती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि इसे सही दिशा, सही सामग्री और उचित रोशनी के साथ लगाया जाए, तो घर का वातावरण संतुलित और सकारात्मक बना रहता है।
यदि आप भी अपने नए मकान या फ्लैट के लिए नई नेम प्लेट लगवाने की सोच रहे हैं, तो इन बुनियादी नियमों को जरूर समझ लें:
गेट के दाईं तरफ लगाना माना जाता है बेहतर
नेम प्लेट लगाने के लिए आमतौर पर पूर्व दिशा को सबसे अनुकूल माना जाता है, क्योंकि यह सूर्य और नई ऊर्जा से जुड़ी दिशा है।
यदि मुख्य द्वार की बनावट अलग है, तो हमेशा ध्यान रखें कि नेम प्लेट को मुख्य दरवाजे के दाईं ओर (Right Side) ही लगाएं। यह स्थान वास्तु के लिहाज से सबसे संतुलित माना जाता है।
प्राकृतिक सामग्री का करें चुनाव
नेम प्लेट की बनावट के लिए लकड़ी, तांबा, पीतल या प्राकृतिक पत्थर (जैसे मार्बल या ग्रेनाइट) का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा रहता है।
प्लास्टिक या कमजोर फाइबर की नेम प्लेट लगाने से बचना चाहिए। नेम प्लेट मजबूत और टिकाऊ होनी चाहिए ताकि वह लंबे समय तक साफ और सुरक्षित रहे।
नेम प्लेट पर पर्याप्त रोशनी होना जरूरी
मुख्य द्वार पर अंधेरा रहना ठीक नहीं माना जाता। नेम प्लेट के ठीक ऊपर एक छोटी फोकस लाइट या वॉर्म येलो बल्ब जरूर लगाएं।
इससे शाम और रात के समय आपका नाम साफ दिखाई देता है और घर का मुख्य द्वार हमेशा रोशन रहता है।
देवी-देवताओं के चित्र लगाने से बचें
नेम प्लेट पर किसी देवी-देवता की तस्वीर या मूर्ति लगाने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि बाहर धूल-मिट्टी जमने की संभावना रहती है।
इसके स्थान पर आप शुभता के लिए ‘ॐ’ या ‘स्वास्तिक’ जैसे पारंपरिक प्रतीकों का सादगी के साथ प्रयोग कर सकते हैं।
नाम स्पष्ट हो और फॉन्ट का रंग संतुलित रहे
नेम प्लेट पर बहुत अधिक जानकारी लिखने के बजाय केवल घर के मुखिया का नाम, पद या मकान नंबर ही लिखें। अक्षरों के लिए सुनहरा (Golden), हल्का पीला या डार्क बैकग्राउंड पर ब्राइट रंग चुनना बेहतर होता है।
सुनहरे रंग को सादगी और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लिखावट ऐसी हो जिसे दूर से भी आसानी से पढ़ा जा सके।











