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मरीजों को लाइन में खड़ा रखा तो नपेंगे अधिकारी, सभी जिला अस्पतालों को मिला नोटिस

उत्तराखंड के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों और सभी जिला अस्पतालों को ओपीडी में 'स्कैन एंड शेयर' व्यवस्था लागू न करने पर कड़ा नोटिस जारी किया गया है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत मरीजों को लंबी लाइनों से बचाने वाली इस ऑनलाइन टोकन योजना में लापरवाही बरतने पर राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने कड़ा रुख अपनाया है।

मरीजों को लाइन में खड़ा रखा तो नपेंगे अधिकारी, सभी जिला अस्पतालों को मिला नोटिस

HIGHLIGHTS

  • चार मेडिकल कॉलेजों समेत सभी जिला अस्पतालों को नोटिस जारी।
  • टिहरी जिला अस्पताल में ऑनलाइन व्यवस्था के तहत शून्य पंजीकरण।
  • एबीडीएम की सीईओ रीना जोशी ने मांगा लिखित जवाब।
  • केंद्र सरकार की समीक्षा से ठीक पहले हुई बड़ी कार्रवाई।

देहरादून, 24 जून, 2026 (दून हॉराइज़न)।

उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए सुबह से ही लंबी कतारों में धक्के खा रहे मरीजों को ऑनलाइन पंजीकरण की सहूलियत न देने पर शासन ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।

राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने मरीजों को घंटों लाइन में खड़ा रखने और डिजिटल टोकन व्यवस्था में घोर लापरवाही बरतने को लेकर सूबे के चार प्रमुख राजकीय मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की गहरी नाराजगी और केंद्र सरकार की आगामी समीक्षा बैठक से ऐन पहले आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) उत्तराखंड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रीना जोशी ने यह बड़ी कार्रवाई की है। इस कड़े रुख के बाद राजकीय दून मेडिकल कॉलेज देहरादून, हरिद्वार मेडिकल कॉलेज, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली मेडिकल कॉलेज श्रीनगर और सोबन सिंह जीना मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा के प्रबंधन में खलबली मच गई है।

दिए गए नोटिस में साफ तौर पर यह चिंता जताई गई है कि जिस योजना को ओपीडी काउंटरों की भारी भीड़ कम करने और जनता को त्वरित इलाज की सुविधा देने के लिए अरबों रुपये के तामझाम के साथ शुरू किया गया था, उसे धरातल पर उतारने में सूबे के लगभग सभी बड़े सरकारी अस्पताल पूरी तरह फिसड्डी साबित हुए हैं।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की ‘स्कैन एंड शेयर’ तकनीक असल में एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत मरीज अस्पताल परिसर में लगे क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन कर अपनी ‘आभा’ (ABHA) आईडी के माध्यम से सीधे ओपीडी पंजीकरण पर्ची हासिल कर सकते हैं।

इसके इस्तेमाल के लिए मरीज को अपने स्मार्टफोन में सिर्फ एक बार ‘ड्रिफकेस’ (Drifcase) नाम का मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करके अपनी डिजिटल प्रोफाइल बनानी होती है, जिसके बाद अस्पताल आते ही उन्हें बिना लाइन में लगे सीधे ऑनलाइन टोकन नंबर अलॉट हो जाता है।

जमीनी हकीकत पर नजर डालें तो इस डिजिटल दावों की हवा निकलती साफ दिख रही है क्योंकि टिहरी जिला अस्पताल में इस आधुनिक स्कैन एंड शेयर सिस्टम के जरिए एक भी मरीज का पंजीकरण नहीं दर्ज किया जा रहा है। हरिद्वार जिला अस्पताल की हालत भी बेहद सुस्त है जहां प्रतिदिन हजारों की भीड़ के सामने केवल 20 से 100 मरीज ही इस सुविधा का लाभ उठा पा रहे हैं।

राजधानी देहरादून के प्रतिष्ठित कोरोनेशन अस्पताल में रोजाना आने वाले औसतन 800 ओपीडी मरीजों के मुकाबले महज 25 से 30 ऑनलाइन पर्चे जनरेट होना अस्पताल प्रशासन की मंशा पर बड़े सवाल खड़े करता है। उधर कुमाऊं के अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में यह आंकड़ा रोजाना सिर्फ सात से दस मरीजों पर सिमट गया है, जबकि श्रीनगर मेडिकल कॉलेज जैसी बड़ी स्वास्थ्य संस्था में रोजाना केवल 50 से 80 लोग ही डिजिटल टोकन पा रहे हैं।

इस प्रशासनिक हंटर का असर देहरादून के सबसे बड़े दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में फौरन देखने को मिला है जहां नोटिस की जद में आते ही आनन-फानन में एबीडीएम के लिए अलग काउंटर खोलने पड़े हैं। अस्पताल प्रशासन ने सामान्य ओपीडी काउंटरों पर भी ऑनलाइन पर्चे बनाने की अनिवार्यता लागू की जिसके चलते बीते मंगलवार को कुल 2425 ओपीडी मरीजों में से रिकॉर्ड 820 लोगों के ऑनलाइन पंजीकरण सफलतापूर्वक किए गए।

दून मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने बताया कि ‘स्कैन एंड शेयर’ के तहत पंजीकरण का ग्राफ बढ़ाने के लिए अब अलग से अतिरिक्त स्वास्थ्य कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है और काउंटरों के बाहर हेल्प डेस्क बनाकर मरीजों को जागरूक किया जा रहा है।

देहरादून के सीएमओ डॉ. मनोज शर्मा ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके अधीन आने वाले तमाम जिला स्तरीय अस्पतालों और सामुदायिक केंद्रों में इस डिजिटल सुविधा का उपयोग हर हाल में बढ़ाने के सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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