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Padma Bhushan 2026 : उत्तराखंड के ‘भगत दा’ को कल मिलेगा पद्मभूषण, राष्ट्रपति मुर्मु करेंगी सम्मानित

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sun, 24 May 2026 07:31 PM IST

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को 25 मई को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित किया जाएगा। यह नागरिक सम्मान उन्हें शिक्षा, समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन में दशकों लंबे योगदान के लिए दिया जा रहा है।

Padma Bhushan 2026 : उत्तराखंड के 'भगत दा' को कल मिलेगा पद्मभूषण, राष्ट्रपति मुर्मु करेंगी सम्मानित

मुख्य बातें

  • 25 मई को नई दिल्ली में आयोजित होगा पद्म सम्मान समारोह।
  • उत्तराखंड में 'भगत दा' के नाम से लोकप्रिय हैं पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी।
  • 1966 में पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना कर शिक्षा की अलख जगाई।
  • मुख्यमंत्री, सांसद और महाराष्ट्र-गोवा के राज्यपाल जैसी अहम जिम्मेदारियां निभाईं।

देहरादून, 24 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज राजनेता भगत सिंह कोश्यारी को कल यानी 25 मई को नई दिल्ली में पद्मभूषण (Padma Bhushan 2026) से नवाजा जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें इस प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान से अलंकृत करेंगी। प्रदेश में ‘भगत दा’ के नाम से लोकप्रिय कोश्यारी को यह सम्मान उनके दशकों लंबे सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक योगदान के लिए दिया जा रहा है।

यह सम्मान एक ऐसे राजनेता को मिल रहा है, जिनका सफर बागेश्वर के एक छोटे से गांव से शुरू होकर मुख्यमंत्री की कुर्सी और फिर महाराष्ट्र के राजभवन तक पहुंचा है।

Bhagat Singh Koshyari Padma Bhushan 2026 : शिक्षक से शुरू हुआ सफर

17 जून 1942 को बागेश्वर जिले के सुदूर गांव पलानधुरा में जन्मे कोश्यारी का शुरुआती जीवन संघर्षपूर्ण रहा। ग्रामीण पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने 1964 में आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में एमए की डिग्री हासिल की। इसके बाद उनका रुझान शिक्षा के जरिए राष्ट्र निर्माण की ओर हो गया।

उन्होंने एटा और कासगंज में बतौर शिक्षक अपने करियर की शुरुआत की। 1966 में उन्होंने सीमांत जिले पिथौरागढ़ में ‘सरस्वती शिशु मंदिर’ की नींव रखी, जिसने दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के निष्ठावान स्वयंसेवक रहे कोश्यारी ने कई वर्षों तक विभाग कार्यवाह की जिम्मेदारी भी संभाली। आपातकाल के दौरान अपने कड़े रुख के चलते उन्हें मीसा (MISA) के तहत जेल भी जाना पड़ा था।

उत्तराखंड की राजनीति में अहम मुकाम

राजनीति में उनका औपचारिक प्रवेश 1997 में हुआ जब वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य (MLC) बने। साल 2000 में अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद, वे राज्य की पहली कैबिनेट में मंत्री बने और बाद में मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। राज्य के ऊर्जा मंत्री रहते हुए उन्होंने ऐतिहासिक टिहरी जलविद्युत परियोजना को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई, जिसमें टिहरी शहर का विस्थापन भी शामिल था।

संसदीय राजनीति में भी उनका सफर लंबा रहा। 2008 में वे राज्यसभा और 2014 में नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सीट से लोकसभा सांसद चुने गए। संसदीय समितियों के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने ‘वन रैंक वन पेंशन’ (OROP) और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय व क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत कर अपनी मजबूत पैरवी की।

राजभवनों की जिम्मेदारी और साहित्यिक रुचि

सक्रिय राजनीति के बाद, सितंबर 2019 में उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। अपने कार्यकाल में उन्होंने राज्य के लगभग सभी जिलों का दौरा किया। अगस्त 2020 में उन्हें गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था।

राजनीति और शिक्षा के साथ-साथ कोश्यारी लेखन में भी गहरी रुचि रखते हैं। पिथौरागढ़ से ‘पर्वत पीयूष’ नामक हिंदी साप्ताहिक पत्र शुरू करने वाले कोश्यारी ने “उत्तरांचल प्रदेश क्यों” और “उत्तरांचल प्रदेश: संघर्ष एवं समाधान” नामक दो प्रमुख पुस्तकें भी लिखी हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के सदस्य (1979-1990) से लेकर उत्तरांचल उत्थान परिषद के सचिव तक, उनका पूरा जीवन सादगी और सार्वजनिक सेवा को समर्पित रहा है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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