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Premnagar Case : ‘पुलिस ने कहा था हमारे पास जादू की छड़ी नहीं’, अब कोर्ट ने दरोगा के खिलाफ दिए जांच के आदेश

देहरादून की एक अदालत ने 18 वर्षीय क्षितिज चौधरी की सड़क हादसे में मौत के मामले में प्रेमनगर पुलिस द्वारा दाखिल फाइनल रिपोर्ट (FR) को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने जांच में गंभीर लापरवाही बरतने पर विवेचक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और मामले की नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं।

Premnagar Case : 'पुलिस ने कहा था हमारे पास जादू की छड़ी नहीं', अब कोर्ट ने दरोगा के खिलाफ दिए जांच के आदेश

HIGHLIGHTS

  • कोर्ट ने विवेचक अमित कुमार शर्मा के खिलाफ एसएसपी को विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए।
  • पीड़ित मां ने खुद सीसीटीवी फुटेज और आरटीओ के जरिए आरोपी डंपर का पता लगाया था।
  • प्रेमनगर थाना प्रभारी को स्वयं या सक्षम अधिकारी से दोबारा निष्पक्ष जांच कराने का आदेश।

देहरादून, 02 मई 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक मां के अटूट संघर्ष ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क हादसे में अपने 18 वर्षीय बेटे क्षितिज चौधरी को खोने वाली ललिता चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रेमनगर पुलिस की फाइनल रिपोर्ट (FR) को सिरे से खारिज कर दिया है।

चतुर्थ अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट साहिस्ता बानों की अदालत ने न केवल मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं, बल्कि जांच में लापरवाही बरतने वाले उपनिरीक्षक अमित कुमार शर्मा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए एसएसपी देहरादून को निर्देशित किया है।

अदालत की सख्त टिप्पणी: जांच नहीं, सिर्फ औपचारिकता हुई

अदालत ने पत्रावली का बारीकी से अवलोकन करने के बाद पाया कि विवेचक ने जांच के दौरान उन महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया, जो खुद मृत युवक की मां ने जुटाए थे। ललिता चौधरी ने अपनी आपत्ति में दुर्घटना करने वाले डंपर का नंबर और उसके मालिक का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज कराया था।

इसके बावजूद, विवेचक अमित कुमार शर्मा ने इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई करने के बजाय मामले को बंद करने के लिए फाइनल रिपोर्ट लगा दी। कोर्ट ने इसे ‘अत्यंत आपत्तिजनक’ और ‘कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही’ करार दिया है।

मां ने खुद किया वह काम, जो पुलिस को करना था

16 फरवरी 2024 को हुए इस हादसे के बाद पुलिस का रवैया बेहद निराशाजनक रहा था। ललिता चौधरी के अधिवक्ता अमित तोमर ने कोर्ट को बताया कि जब पुलिस ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए थे कि उनके पास कोई ‘जादू की छड़ी’ नहीं है, तब एक मां ने हार नहीं मानी।

ललिता चौधरी ने खुद घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, आरटीओ कार्यालय के चक्कर काटे और करीब डेढ़ साल की मशक्कत के बाद उस अज्ञात वाहन (डंपर) को ढूंढ निकाला जिसने उनके बेटे को रौंदा था। विडंबना यह रही कि इतने पुख्ता साक्ष्य देने के बाद भी पुलिस ने उन्हें साक्ष्य नहीं माना।

अब नए सिरे से होगी जांच

अदालत के आदेश के बाद अब प्रेमनगर थाना प्रभारी को इस मामले की फाइल दोबारा खोलनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि थाना प्रभारी स्वयं या अपने किसी अन्य सक्षम अधीनस्थ अधिकारी से इस मामले की पुन: जांच कराएं। महिला द्वारा उपलब्ध कराए गए डंपर के नंबर को अब जांच का मुख्य आधार बनाया जाएगा। इस फैसले ने न केवल एक पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद दी है, बल्कि जांच अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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