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India’s Next Moon Mission : चंद्रयान-4 और 5 की तैयारी तेज, अब 14 नहीं बल्कि 100 दिनों तक चांद पर तिरंगा लहराएगा भारत।

इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने भारत के आगामी अंतरिक्ष अभियानों का रोडमैप साझा करते हुए चंद्रयान-4 और 5 की तकनीकी विशिष्टताओं का खुलासा किया है। इन मिशनों में भारी रोवर और लंबी मिशन अवधि के साथ चांद से नमूने वापस लाने और मंगल पर लैंडिंग की योजना शामिल है।

India's Next Moon Mission : चंद्रयान-4 और 5 की तैयारी तेज, अब 14 नहीं बल्कि 100 दिनों तक चांद पर तिरंगा लहराएगा भारत।

HIGHLIGHTS

  • चंद्रयान-4 मिशन के तहत चंद्रमा की सतह से मिट्टी और चट्टानों के सैंपल धरती पर वापस लाए जाएंगे।
  • चंद्रयान-5 में 350 किलो का भारी रोवर होगा, जिसकी कार्यक्षमता 14 दिनों से बढ़कर 100 दिन की होगी।
  • भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने और 2040 तक चंद्रमा पर मानव भेजने की तैयारी कर रहा है।

बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने अगले बड़े कदम भारत का अगला मून मिशन (India’s Next Moon Mission) को लेकर बेहद अहम जानकारियां साझा की हैं।

इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने स्पष्ट किया है कि आगामी मिशन केवल लैंडिंग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अब भारत चंद्रमा से नमूने वापस लाने की तकनीक पर काम कर रहा है। ‘स्टार्ट 2026’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि चंद्रयान-4 का प्राथमिक उद्देश्य चांद की सतह से सैंपल इकट्ठा कर उन्हें सुरक्षित धरती पर पहुंचाना है।

14 दिन की सीमा खत्म, अब 100 दिन चलेगा मिशन

चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद अब इसरो अपनी तकनीक को और अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में बढ़ गया है। चेयरमैन ने जानकारी दी कि जहां चंद्रयान-3 के लैंडर और रोवर की उम्र केवल 14 दिन (एक चंद्र दिवस) थी, वहीं आगामी मिशनों में इसे बढ़ाकर लगभग 100 दिन करने का लक्ष्य रखा गया है। यह लंबी अवधि वैज्ञानिकों को चंद्रमा के पर्यावरण और वहां मौजूद संसाधनों के गहरे अध्ययन में मदद करेगी।

25 किलो से 350 किलो तक का सफर

तकनीकी मोर्चे पर इसरो एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। चंद्रयान-3 का प्रज्ञान रोवर महज 25 किलोग्राम का था, लेकिन चंद्रयान-5 में इसरो 350 किलोग्राम वजनी भारी-भरकम रोवर भेजने की योजना बना रहा है। यह रोवर अधिक वैज्ञानिक उपकरणों से लैस होगा और चंद्रमा की दुर्गम सतह पर लंबी दूरी तय करने में सक्षम होगा। इसके साथ ही लैंडर की पेलोड क्षमता भी बढ़ाई जा रही है ताकि वह भारी उपकरणों को सुरक्षित उतार सके।

मंगल और शुक्र पर भी भारत की नजर

चंद्रमा के अलावा इसरो के रडार पर मंगल और शुक्र ग्रह भी हैं। चेयरमैन नारायणन ने बताया कि मंगल ग्रह पर सफल ऑर्बिटर मिशन के बाद अब ‘मार्स लैंडिंग मिशन’ पर काम चल रहा है। इसके साथ ही शुक्र ग्रह के अध्ययन के लिए ‘वीनस ऑर्बिटर मिशन’ की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है। इन सभी बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए सरकार से मंजूरी की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है, जो भारत को वैश्विक अंतरिक्ष रेस में सबसे आगे खड़ा कर देगी।

2040 तक चांद पर कदम रखेगा भारतीय

इसरो के दीर्घकालिक विजन में 2035 तक भारत का अपना ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ स्थापित करना शामिल है। सबसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य साल 2040 के लिए निर्धारित किया गया है, जब इसरो एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा की सतह पर उतारने और उसे सुरक्षित वापस लाने की योजना पर अमल करेगा। गगनयान मिशन इसी दिशा में पहला बड़ा कदम है, जिसका उद्देश्य अगले दो वर्षों के भीतर मानव को अंतरिक्ष में भेजकर वापस लाना है।


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Shailendra Pokhriyal

शैलेन्द्र पोखरियाल 'दून हॉराइज़न' में वरिष्ठ राष्ट्रीय संवाददाता के तौर पर देश की सियासत और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं को कवर करते हैं। केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के सत्रों और बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर उनकी गहरी पकड़ है। शैलेन्द्र का उद्देश्य राजनीतिक बयानों और सरकारी फैसलों के पीछे की असली सच्चाई को निष्पक्ष रूप से पाठकों के सामने रखना है। उनका लंबा पत्रकारीय अनुभव उन्हें जटिल राष्ट्रीय मुद्दों का आसान हिंदी में विश्लेषण करने में मदद करता है। वे पूरी तरह से शोध-आधारित (Fact-checked) और जनहित से जुड़ी बेबाक पत्रकारिता करने के लिए जाने जाते हैं।

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