Ram Mandir Controversy : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अयोध्या मामले में गठित की गई विशेष जांच टीम यानी एसआईटी की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कांग्रेस ने इसे बड़े गुनहगारों को बचाने की एक प्रशासनिक ढाल करार दिया है। राजीव भवन देहरादून में आयोजित एक बेहद तल्ख प्रेस वार्ता के भीतर कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने तीखा रुख अख्तियार करते हुए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पूरे कथित वित्तीय घोटाले के कटघरे में ला खड़ा किया।
उनका साफ कहना था कि जब देश के हर छोटे-बड़े काम का क्रेडिट खुद प्रधानमंत्री लेते हैं, तो राम मंदिर के चढ़ावे में हुई इस डकैती की पूरी नैतिक जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर फिक्स होनी चाहिए। सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने के लिए भाजपा ने जिस भगवान श्रीराम के नाम का सहारा लिया, आज उसी जन-आस्था के साथ खिलवाड़ कर भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण दिया जा रहा है।
सनातन धर्म की साख को बाहरी ताकतों से उतना नुकसान नहीं पहुंचा है जितना नुकसान भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सियासी गलियारों में पनप रहे अंदरूनी भ्रष्टाचार से हो रहा है। आलोक शर्मा ने मीडिया के सामने यह सनसनीखेज दावा किया कि राम मंदिर निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे एक इंजीनियर ने बाकायदा 40 फीसदी कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाए थे।
व्यवस्था का दंश देखिए कि जिन लोगों ने भी निर्माण कार्य और पैसों के लेनदेन में पारदर्शिता की आवाज बुलंद करने की कोशिश की, उन्हें ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। पूर्व में भी जब इस ट्रस्ट के नुमाइंदों पर जमीनों की खरीद-फरोख्त में करोड़ों की हेराफेरी के संगीन आरोप लगे थे, तब आनन-फानन में बनाई गई जांच समितियों की रिपोर्ट को आज तक आम जनता के सामने सार्वजनिक नहीं किया गया।
देशभर के कोने-कोने में खड़े हो रहे भाजपा और आरएसएस के आलीशान, महलनुमा दफ्तरों की फंडिंग को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता ने सीधे वित्तीय स्रोत पर उंगली उठाई है। उन्होंने खुले मंच से सवाल दागा कि कहीं इन भव्य कार्यालयों की दीवारों को चुनने में राम मंदिर के नाम पर देश-विदेश से आए पवित्र चढ़ावे के पैसे का गलत इस्तेमाल तो नहीं किया जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक रूप से मांग रखी है कि मौजूदा श्रीराम मंदिर ट्रस्ट को बिना किसी देरी के तुरंत भंग किया जाना चाहिए। इसके साथ ही मंदिर से जुड़े तमाम चालू बैंक खातों का पूरा ऑडिट विवरण और परिसर के सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक डोमेन में रखा जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

करोड़ों सनातनी श्रद्धालुओं के भरोसे का हवाला देते हुए मुख्य विपक्षी दल ने साफ किया कि यह मामला किसी एक राजनीतिक दल या सत्ता की उठापटक का नहीं है बल्कि यह सीधे तौर पर सनातन धर्म की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ विषय है। आलोक शर्मा ने देशभर के आम सनातनी समाज से अपील की कि वे राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर धर्म के नाम पर मची इस कथित लूट के खिलाफ मुखर होकर अपनी आवाज बुलंद करें।
इस पूरी उच्चस्तरीय प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी के साथ देहरादून के पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा भी मंच पर मौजूद रहे। उनके अलावा कांग्रेस प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट, मनोज सैनी और देवेंद्र सिंह ने भी संयुक्त रूप से इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी को शर्मनाक बताया।








