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पिच पर सिक्का रखकर बॉलिंग की प्रैक्टिस करता, फिर टेस्ट क्रिकेट में रचा वो इतिहास जो आज भी है अटूट

भारतीय क्रिकेट के दिग्गज ऑलराउंडर बापू नाडकर्णी की आज जयंती है, जिन्होंने 1964 में इंग्लैंड के खिलाफ लगातार 21.5 मेडन ओवर फेंककर एक ऐसा विश्व रिकॉर्ड बनाया था जिसे आज तक कोई नहीं तोड़ पाया। अपनी सटीक लाइन-लेंथ के लिए मशहूर नाडकर्णी ने घरेलू क्रिकेट में 500 विकेट चटकाए और महान सुनील गावस्कर के करियर को संवारने में अहम भूमिका निभाई।

पिच पर सिक्का रखकर बॉलिंग की प्रैक्टिस करता, फिर टेस्ट क्रिकेट में रचा वो इतिहास जो आज भी है अटूट

HIGHLIGHTS

  • बापू नाडकर्णी ने मद्रास टेस्ट (1964) में इंग्लैंड के खिलाफ लगातार 131 गेंदें डॉट फेंकी थीं।
  • उन्होंने अपने पूरे टेस्ट करियर में प्रति ओवर महज 1.67 की इकॉनमी रेट से रन दिए।
  • प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके नाम 8,880 रन और 500 विकेट दर्ज हैं, जो उनकी ऑलराउंड क्षमता को दर्शाता है।

नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे किफायती और अनुशासित स्पिनर रमेशचंद्र गंगाराम ‘बापू’ नाडकर्णी का नाम आते ही जेहन में उस गेंदबाज की तस्वीर उभरती है जिसके ओवर में रन चुराना नामुमकिन माना जाता था।

आज उनकी जयंती के मौके पर क्रिकेट जगत उनके उस अविश्वसनीय रिकॉर्ड को याद कर रहा है, जिसने 60 साल पहले मद्रास के मैदान पर इंग्लैंड की टीम को पंगु बना दिया था। 12 जनवरी 1964 को बापू ने लगातार 21.5 ओवर (कुल 131 गेंदें) मेडन फेंककर गेंदबाजी की परिभाषा ही बदल दी थी।

बापू नाडकर्णी की इस अचूक सटीकता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और एक अनोखा अभ्यास तरीका था। नासिक में 4 अप्रैल 1933 को जन्मे इस क्रिकेटर के बारे में मशहूर है कि वे नेट प्रैक्टिस के दौरान पिच पर एक सिक्का रख दिया करते थे। उनका लक्ष्य हर गेंद से उस सिक्के को हिट करना होता था। इसी जुनून ने उन्हें टेस्ट क्रिकेट का सबसे ‘कंजूस’ गेंदबाज बनाया, जिन्होंने अपने पूरे करियर में 1.67 की इकॉनमी से गेंदबाजी की।

बापू का अंतरराष्ट्रीय सफर 16 दिसंबर 1955 को दिल्ली में न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरू हुआ था। बाएं हाथ के इस स्पिनर ने 13 साल लंबे करियर में 41 टेस्ट मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 88 विकेट झटके और बल्ले से भी कमाल दिखाते हुए 1,414 रन बनाए, जिसमें एक शतक और 7 अर्धशतक शामिल थे। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच भी 1968 में न्यूजीलैंड के ही खिलाफ ऑकलैंड में खेला था।

घरेलू क्रिकेट में तो बापू नाडकर्णी का कद किसी हिमालय से कम नहीं था। मुंबई और महाराष्ट्र की ओर से खेलते हुए उन्होंने 191 प्रथम श्रेणी मैचों में 14 शतकों की मदद से 8,880 रन बटोरे और 500 बल्लेबाजों को अपना शिकार बनाया। उनकी इसी जुझारू प्रवृत्ति ने महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर को भी प्रभावित किया। गावस्कर उन्हें अपना मेंटर मानते थे।

बापू अक्सर उनसे एक ही बात कहते थे— ‘छोड़ो मत’। इसका सीधा मतलब था कि देश के लिए खेलते वक्त कभी हिम्मत मत हारो और आखिरी दम तक लड़ते रहो।

क्रिकेट का यह अनमोल रत्न 17 जनवरी 2020 को 86 वर्ष की आयु में पुणे में दुनिया को अलविदा कह गया। लेकिन उनके नाम दर्ज 21.5 लगातार मेडन ओवर का रिकॉर्ड आज भी टी20 के दौर में किसी चमत्कार जैसा लगता है। आधुनिक क्रिकेट में जहां एक ओवर में 20 रन बनना आम बात है, वहां बापू की 131 डॉट गेंदें अनुशासन का सबसे बड़ा उदाहरण हैं।


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Vibhor Sharma

विभोर शर्मा 'दून हॉराइज़न' के वरिष्ठ खेल पत्रकार हैं। क्रिकेट, फुटबॉल, ओलंपिक्स और अन्य प्रमुख खेल आयोजनों की गहरी समझ और उनका सटीक विश्लेषण विभोर की सबसे बड़ी खूबी है। वे मैदान के अंदर और बाहर की हर महत्वपूर्ण गतिविधि को पूरी प्रामाणिकता के साथ कवर करते हैं। खिलाड़ियों के प्रदर्शन, मैच प्रेडिक्शन और खेल विवादों पर उनकी शोध-आधारित रिपोर्टिंग पाठकों को एक स्पष्ट नज़रिया देती है। क्लिकबेट से दूर, विभोर की तथ्यपरक खेल पत्रकारिता खेल प्रेमियों के लिए खबरों का एक सबसे विश्वसनीय स्रोत मानी जाती है।

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