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सुबोध उनियाल की पहल लाई रंग, नरेंद्रनगर विधानसभा के मांगला में उतरेगा हेलीकॉप्टर

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Mon, 21 Sep 2026 09:36 PM IST

टिहरी गढ़वाल के मांगला गांव में ₹75.68 लाख की लागत से हेलीपैड बनेगा। उत्तराखंड शासन ने ₹45.40 लाख की पहली किस्त जारी करते हुए कड़े वित्तीय दिशा-निर्देश दिए हैं।

Tehri Mangla Helipad

मुख्य बातें

  • पट्टी डोवी के मांगला गांव में हेलीपैड निर्माण को मिली प्रशासनिक व वित्तीय मंजूरी।
  • परियोजना की कुल लागत ₹75.68 लाख, शासन ने ₹45.40 लाख जारी किए।
  • नरेंद्रनगर विधायक व काबीना मंत्री सुबोध उनियाल के प्रयासों से स्वीकृत हुआ प्रोजेक्ट।
  • अतिरिक्त खर्च पर रोक, निर्माण में बचत होने पर बची रकम राजकोष में लौटेगी।
  • मानक के विपरीत काम होने पर सीधे कार्यदायी संस्था और अफसरों पर होगी कार्रवाई।

दून हॉराइज़न, देहरादून (21 सितंबर) : विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले टिहरी गढ़वाल के सीमांत ग्रामीणों के लिए सोमवार का दिन एक बड़ी राहत लेकर आया। काबीना मंत्री सुबोध उनियाल के प्रयासों के बाद शासन ने नरेंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पट्टी डोवी स्थित मांगला गांव में हेलीपैड (Helipad Construction) के लिए वित्तीय स्वीकृति की मुहर लगा दी है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत पहली किस्त के तौर पर ₹45,40,800 की रकम तत्काल प्रभाव से अवमुक्त करने का शासनादेश जारी कर दिया गया है।

यह केवल एक कंक्रीट का चबूतरा नहीं। असल में, बरसात और भूस्खलन के दौरान जब मुख्य सड़कें कट जाती हैं, तब यह एयरस्ट्रिप मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए जीवनरेखा साबित होगी।

₹75.68 लाख का प्रोजेक्ट, सख्त वित्तीय पाबंदियों के साथ बंधी कार्यदायी संस्था

मांगला गांव में बनने वाले इस हेलीपैड की कुल लागत ₹75.68 लाख आंकी गई है। शासन ने साफ किया है कि जारी की गई धनराशि का उपयोग सिर्फ और सिर्फ निर्धारित तकनीकी खाके के तहत ही किया जा सकेगा। अफसर अपनी मर्जी से किसी अतिरिक्त मद में पैसा खर्च नहीं कर पाएंगे—अगर कोई अतिरिक्त व्यय अपरिहार्य हुआ, तो उसके लिए पहले सचिवालय से बाकायदा अनुमति लेनी होगी।

इतना ही नहीं, सरकारी आदेश में एक और अहम पेंच है। अगर टेंडर प्रक्रिया के बाद निर्माण लागत में कोई बचत होती है, तो संबंधित विभाग उस पैसे को दबाकर नहीं बैठ सकेगा, बल्कि पाई-पाई राज्य के सरकारी खजाने में तुरंत जमा करानी होगी।

समयसीमा और क्वालिटी पर जीरो टॉलरेंस, लापरवाही पर नपेंगे जिम्मेदार

उत्तराखंड के सुदूरवर्ती पहाड़ी इलाकों में अक्सर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स लटकने की शिकायतें आम रहती हैं। शासन ने इस बार पहले ही पेच कस दिए हैं। जारी आदेश के मुताबिक, संबंधित कार्यदायी संस्था को तयशुदा समयसीमा के भीतर ही टेंडरिंग और एग्रीमेंट की प्रक्रिया पूरी कर काम धरातल पर उतारना होगा।

सामग्री की जांच थर्ड-पार्टी या अधिकृत लैब्स से कराने पर जोर दिया गया है। मानकों में जरा सी भी कोताही मिली, तो सीधे फील्ड इंजीनियरों और अफसरों की जवाबदेही तय होगी।

‘दूरस्थ अंचलों तक हवाई संपर्क पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता’

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने इस वित्तीय मंजूरी पर खुशी जताते हुए कहा कि पहाड़ के अंतिम छोर तक जरूरी बुनियादी ढांचा खड़ा करना सरकार का मूल संकल्प है। उनका कहना था कि हेलीपैड बनने से न सिर्फ आपदा प्रबंधन और आपातकालीन मेडिकल रेस्क्यू को नई ताकत मिलेगी, बल्कि आने वाले समय में क्षेत्र में पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे। विभागीय अधिकारियों को बिना वक्त गंवाए जमीन पर काम शुरू करने की हिदायत दी गई है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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