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Tehri Medical College : टिहरी मेडिकल कॉलेज परियोजना से सुधरेगी स्थानीय अर्थव्यवस्था, जनता को क्यों नहीं आ रहा समझ

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sun, 02 Aug 2026 01:15 PM IST

टिहरी में प्रस्तावित नए मेडिकल कॉलेज की लोकेशन को लेकर छिड़ा विवाद अब ग्रामीण बनाम शहरी विकास की बहस बन चुका है। कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य ढांचा मजबूत करने और पलायन रोकने के लिए इस परियोजना को ऐतिहासिक कदम बताया है।

Tehri Medical College : टिहरी मेडिकल कॉलेज परियोजना से सुधरेगी स्थानीय अर्थव्यवस्था, जनता को क्यों नहीं आ रहा समझ

मुख्य बातें

  • टिहरी के ग्रामीण इलाके में बनेगा नया मेडिकल कॉलेज
  • कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने ग्रामीण विकास का समर्थन किया
  • शहर में पहले से जिला अस्पताल और बड़ी स्वास्थ्य सुविधाएं
  • अस्पताल से स्थानीय रोजगार, व्यापार और सड़कों का होगा विकास

देहरादून, 02 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।

Tehri Medical College : जनपद टिहरी में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के स्थान को लेकर सियासी और सामाजिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। शहरी क्षेत्रों के बजाय ग्रामीण इलाके में इस बड़े स्वास्थ्य संस्थान को स्थापित करने की योजना का कुछ लोग विरोध कर रहे हैं। ग्रामीण भारत की जरूरतों को दरकिनार कर केवल शहरों में संसाधन केंद्रित करने की पुरानी परिपाटी पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।

जिस स्थान के लिए मेडिकल कॉलेज की मांग की जा रही है, वहां पहले से ही जिला अस्पताल समेत कई बड़े स्वास्थ्य संस्थान पूरी तरह क्रियाशील हैं। शहरी इलाकों में बुनियादी ढांचा पहले से मजबूत है। ऐसे में एक और बड़ा संस्थान वहीं खोलना बाकी क्षेत्रों के साथ असंतुलन पैदा करता है।

कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने इस परियोजना का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया है कि विकास का दायरा केवल शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। दूरस्थ इलाकों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। गांवों को केंद्र में रखकर बनाई गई नीतियां ही पहाड़ की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकती हैं।

ग्रामीण क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज बनने से सिर्फ मरीजों का इलाज ही नहीं होगा। अस्पताल के आसपास नई सड़कें, बेहतर परिवहन सुविधाएं और स्थानीय स्तर पर व्यापार के नए साधन विकसित होंगे। इससे क्षेत्र के युवाओं के लिए सीधे और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों से हो रहा पलायन एक गंभीर चिंता का विषय रहा है। स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा के अभाव में ग्रामीण लगातार शहरों का रुख करने को मजबूर होते हैं। गांव के पास ही मेडिकल कॉलेज जैसी सुविधा मिलने से इस पलायन पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।

महात्मा गांधी के इस विचार को आधार बनाया जा रहा है कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। बुनियादी सुविधाओं का न्यायसंगत बंटवारा तभी संभव है जब विकास की बड़ी योजनाएं जमीनी स्तर तक पहुंचें। किसी परियोजना को राजनीतिक विरोध का जरिया बनाने के बजाय दूरगामी परिणामों पर ध्यान देने की जरूरत है।

टिहरी के इस प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के निर्माण को क्षेत्र के सर्वांगीण विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर उत्तराखंड का निर्माण तभी हो सकता है जब पहाड़ के दूरदराज इलाकों में भी आधुनिक तकनीक और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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