टहनी से पत्ती अलग होते ही क्या किसी पौधे को रोना आता है? हमारे घरों में बुजुर्ग अक्सर शाम ढलते ही पेड़ों को छूने या पत्ते तोड़ने से मना करते रहे हैं। जिसे कल तक केवल एक पारंपरिक धारणा मानकर खारिज कर दिया जाता था, अब आधुनिक विज्ञान ने उस पर अपनी मुहर लगा दी है। इजरायल स्थित तेल अवीव यूनिवर्सिटी के वनस्पति वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाले शोध में साबित किया है कि तनाव या संकट की स्थिति में पौधे बाकायदा चीखते हैं।
तमाम वनस्पतियां न केवल बाहरी चोट महसूस करती हैं, बल्कि संकट के समय वे हवा में तेज आवाजें भी छोड़ती हैं।
टमाटर और तंबाकू के पौधों पर चला महीनों लंबा परीक्षण
शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए टमाटर और तंबाकू के पौधों को चुना। प्रयोग के दौरान पौधों को एक साउंडप्रूफ एकॉस्टिक चैंबर में रखकर करीब 10 सेंटीमीटर से लेकर कुछ मीटर की दूरी पर बेहद संवेदनशील हाई-फ्रीक्वेंसी माइक्रोफोन लगाए गए। जांच में दो अलग-अलग तरह के तनाव दिए गए—पहला, कई दिनों तक पानी पूरी तरह रोक देना और दूसरा, उनके तनों व पत्तियों को काटना।
परीक्षण के दौरान पाया गया कि सामान्य और शांत अवस्था में पौधा प्रति घंटे औसतन एक से भी कम आवाज निकालता है। लेकिन जैसे ही पानी की कमी हुई या तना काटा गया, वे प्रति घंटे 30 से 50 बार तक तेज क्लिकिंग या पॉपिंग जैसी आवाजें निकालने लगे। जब पौधा बिल्कुल सूखने की कगार पर पहुंचा, तब यह आवाजें अपने चरम पर थीं।
हम क्यों नहीं सुन पाते यह चीख?
पौधों से निकलने वाली इन ध्वनियों की आवृत्ति 20 से 100 किलोहर्ट्ज़ (kHz) के बीच दर्ज की गई। इंसानी कान की सुनने की क्षमता आमतौर पर अधिकतम 20 किलोहर्ट्ज़ तक ही सीमित होती है। यही वजह है कि हम अपने बगीचे में खड़े होकर भी इस चीख को नहीं सुन सकते।
प्रकृति में कई जीव ऐसे हैं जो इस उच्च आवृत्ति वाली अल्ट्रासोनिक (Ultrasonic Waves) ध्वनि को साफ पकड़ लेते हैं। चूहे, चमगादड़ और कई तरह के कीट इन आवाजों को तीन से पांच मीटर की दूरी से आसानी से सुन सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि कई कीट अंडे देने से पहले पौधे की सेहत परखने के लिए शायद इसी आवाज का सहारा लेते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस आवाज का मुख्य कारण ‘कैविटेशन’ (Cavitation) माना जाता है। जब तने के अंदर पानी का दबाव अत्यधिक घट जाता है, तो जाइलम वाहिकाओं में हवा के बुलबुले फूटते हैं, जिससे यह क्लिकिंग साउंड पैदा होता है।
क्या एक-दूसरे की चेतावनी समझते हैं आसपास के पेड़?
रिसर्च टीम का आकलन है कि ये ध्वनियां केवल चीख भर नहीं हैं, बल्कि यह वनस्पति जगत का अपना वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम हो सकता है। जब एक पौधा पानी के संकट या कीटों के हमले के कारण तेज फ्रीक्वेंसी छोड़ता है, तो पास मौजूद अन्य पौधे भी रक्षात्मक रसायन बनाना शुरू कर सकते हैं।
स्मार्ट खेती के दौर में यह खोज भविष्य के सटीक सिंचाई सिस्टम को बदलने की ताकत रखती है, जहां सेंसर पौधों की चीख सुनकर खुद ब खुद पानी छोड़ देंगे।




