कोलंबिया, 04 April 2026 (दून हॉराइज़न)। दुनिया के अपराध जगत के इतिहास में पाब्लो एमिलियो एस्कोबार गैविरिया एक ऐसा नाम है, जिसने कोकीन की तस्करी के जरिए न केवल दौलत का पहाड़ खड़ा किया बल्कि कोलंबिया की सत्ता को भी चुनौती दी। ‘किंग ऑफ कोकेन’ के नाम से कुख्यात एस्कोबार की दहशत का आलम यह था कि उसने अपने मुनाफे में बाधा बनने वाले हर शख्स को मौत की नींद सुला दिया।
पाब्लो एस्कोबार की सनक और रईसी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके पास नकदी रखने की जगह कम पड़ जाती थी। मीडिया रिपोर्ट्स और अमेरिकी ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) के पूर्व एजेंट स्टीव मर्फी के खुलासों के मुताबिक, पाब्लो का इतना पैसा गोदामों में सड़ जाता था कि उसे दीमक खा जाते थे।
चौंकाने वाली बात यह है कि हर साल पाब्लो अपनी कुल संपत्ति का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ चूहों द्वारा कुतरे जाने और नमी के कारण खराब होने की वजह से बट्टे खाते में डाल देता था।
कोलंबिया के इस माफिया ने साल 1970 के दशक में कोकीन के काले कारोबार में कदम रखा था। उसने अन्य अपराधियों के साथ मिलकर कुख्यात ‘मेडेलिन कार्टेल’ का गठन किया। देखते ही देखते पाब्लो की ताकत इतनी बढ़ गई कि वह दुनिया के 10 सबसे अमीर लोगों की फोर्ब्स सूची में शामिल हो गया। उसके पास आलीशान घरों की कोई कमी नहीं थी।
फ्लोरिडा के मियामी बीच पर उसका 6500 वर्ग फीट का बंगला था और उसने पूरा का पूरा ‘आइला गांद्रे’ कोरल द्वीप ही खरीद लिया था। कुल मिलाकर पाब्लो के पास 800 से ज्यादा अचल संपत्तियां थीं।
एस्कोबार सिर्फ एक अपराधी बनकर नहीं रहना चाहता था, उसका सपना कोलंबिया का राष्ट्रपति बनना था। राजनीति में घुसपैठ करने के लिए उसने गरीबों के बीच पैसा बांटा, लेकिन कानून की नजर में वह हमेशा एक वांटेड अपराधी ही रहा। उसकी सनक का सबसे बड़ा सबूत उसकी जेल थी।
जब सरकार ने उस पर शिकंजा कसा, तो उसने सरेंडर के बदले शर्त रखी कि वह अपनी बनाई जेल ‘ला कैथेड्रल’ में रहेगा। यह किसी जेल जैसा नहीं बल्कि एक फाइव स्टार रिसॉर्ट जैसा था, जिसके आसपास पुलिस के फटकने पर भी पाबंदी थी।
पाब्लो की मौत का मंजर भी उसके जीवन की तरह ही नाटकीय था। 2 दिसंबर 1993 को कोलंबियाई पुलिस और सेना ने एक बड़े ऑपरेशन के बाद उसे मार गिराया। उसे पकड़ने और मारने के लिए न केवल सेना ने पूरी ताकत झोंकी, बल्कि उसके प्रतिद्वंद्वियों ने भी करीब 16 करोड़ रुपये खर्च किए थे। एस्कोबार ने अपने पीछे आतंक और खूनखराबे की एक ऐसी विरासत छोड़ी, जिसे आज भी ‘नार्को-टेररिज्म’ का काला अध्याय माना जाता है।










