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देहरादून में बिना इन 5 एनओसी के बंद होंगे अल्ट्रासाउंड सेंटर, डीएम सविन बंसल का कड़ा फरमान

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Thu, 09 Apr 2026 02:45 PM IST

देहरादून जिला प्रशासन ने जनसुरक्षा के मद्देनजर अल्ट्रासाउंड और रेडियो डायग्नोस्टिक सेंटरों के पंजीकरण व नवीनीकरण के लिए बेहद सख्त मानक लागू कर दिए हैं। डीएम सविन बंसल ने स्पष्ट किया है कि फायर सेफ्टी, प्रदूषण बोर्ड की एनओसी और वेस्ट मैनेजमेंट के बिना अब किसी भी सेंटर का संचालन नहीं हो सकेगा।

देहरादून में बिना इन 5 एनओसी के बंद होंगे अल्ट्रासाउंड सेंटर, डीएम सविन बंसल का कड़ा फरमान

मुख्य बातें

  • नए पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए बिल्डिंग और फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट अनिवार्य।
  • प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी और सीवेज ट्रीटमेंट व्यवस्था के बिना संचालन पर पाबंदी।
  • पीसीपीएनडीटी और क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के उल्लंघन पर सेंटर होंगे तत्काल सील।

देहरादून, 09 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। राजधानी देहरादून में अब रेडियो डायग्नोस्टिक और अल्ट्रासाउंड सेंटरों का संचालन करना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा। जिलाधिकारी सविन बंसल ने जनसुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इन सेंटरों के पंजीकरण और नवीनीकरण के लिए मानकों को बेहद कड़ा कर दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जब तक कोई सेंटर निर्धारित सुरक्षा मानदंडों पर 100% खरा नहीं उतरता, उसे अनुमति नहीं दी जाएगी।

जिलाधिकारी के नए आदेशों के अनुसार, अब देहरादून में पहली बार डायग्नोस्टिक सेंटरों को जनसुरक्षा के कई स्तरों से गुजरना होगा। इसमें भवन की संरचनात्मक सुरक्षा (Building Safety) और अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) के पुख्ता इंतजाम होने अनिवार्य हैं। इन प्रमाण पत्रों के अभाव में किसी भी नए आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा और पुराने सेंटरों का नवीनीकरण रोक दिया जाएगा।

प्रशासनिक सख्ती का दायरा केवल बिल्डिंग तक सीमित नहीं है। अब हर सेंटर को बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के तहत कचरा निस्तारण की वैध व्यवस्था का प्रमाण देना होगा। इसके साथ ही, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना भी अनिवार्य कर दिया गया है। डीएम ने स्पष्ट कहा है कि पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं होगा।

कानूनी प्रावधानों की बात करें तो क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 का पालन करना अब हर अस्पताल और क्लीनिक के लिए लाजिमी है। अल्ट्रासाउंड केंद्रों के लिए पीसीपीएनडीटी (PC-PNDT) अधिनियम की धाराओं का सख्ती से पालन करना होगा। बीते छह महीनों से प्रशासन इन मानकों की गहनता से जांच कर रहा है, जिसके बाद ही नवीनीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने संबंधित अधिकारियों को दो-टूक निर्देश दिए हैं कि आवेदनों की जांच में रत्ती भर भी ढिलाई न बरती जाए। यदि किसी भी जांच के दौरान अनियमितता पाई जाती है या मानक अधूरे मिलते हैं, तो संबंधित सेंटर, क्लीनिक या अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया जाएगा। प्रशासन की इस कार्रवाई का उद्देश्य जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुधारना और मरीजों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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