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Uttarakhand News : उत्तराखंड में हाईवे पर अवैध पार्किंग करने वालों की अब खैर नहीं, टास्क फोर्स करेगी कार्रवाई

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sun, 28 Jun 2026 01:09 PM IST

उत्तराखंड के हर जिले में नेशनल हाईवे पर सड़क हादसों को रोकने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जा रहा है। यह फोर्स एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और ई-चालान के माध्यम से अवैध पार्किंग और यातायात उल्लंघन पर सीधी विधिक कार्रवाई करेगी।

Uttarakhand News : उत्तराखंड में हाईवे पर अवैध पार्किंग करने वालों की अब खैर नहीं, टास्क फोर्स करेगी कार्रवाई

मुख्य बातें

  • हर जिले में हाईवे के लिए टास्क फोर्स बनेगी
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नई एसओपी जारी
  • NHAI के वीडियो से कटेंगे ऑटोमेटिक ई-चालान
  • उत्तराखंड में दुर्घटना गंभीरता दर 62 प्रतिशत है

देहरादून, 28 जून 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand News : उत्तराखंड के नेशनल हाईवे पर अवैध रूप से खड़े वाहनों और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों पर पुलिस और प्रशासन की सीधी दबिश पड़ने वाली है। राज्य सरकार ने हर जिले में एक विशेष टास्क फोर्स के गठन का सख्त फरमान जारी कर दिया है जो हाईवे पर मंडराते हादसों के खतरे को कम करने के लिए सीधी कार्रवाई करेगी।

सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में यातायात नियमों के भारी उल्लंघन की सघन निगरानी और त्वरित विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए नई एसओपी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। यह विशेष टास्क फोर्स सीधे तौर पर ग्राउंड जीरो पर मोर्चा संभालेगी।

अपर सचिव-गृह तृप्ति भट्ट ने सभी डीएम और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के स्थानीय अधिकारियों को इस बाबत विस्तृत और सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के फलौदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी में हुए भीषण सड़क हादसों का कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्यों को ये विशेष निर्देश दिए थे। सर्वोच्च न्यायालय के इन्हीं स्पष्ट आदेशों के अनुपालन में उत्तराखंड में यह पूरी नई व्यवस्था धरातल पर उतारी जा रही है।

इस बड़ी प्रशासनिक कवायद के पीछे एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव का वह पत्र है जो उन्होंने मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन को भेजा था। नेशनल हाईवे पर वाहनों की तेज रफ्तार और यातायात को नियंत्रित करने के लिए एनएचएआई अपने एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) का इस्तेमाल करता है।

इस अत्याधुनिक सिस्टम से मिलने वाले वीडियो फीड को अब सीधे तौर पर ई-चालान और सरकार के वाहन-परिवहन सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। कैमरे में कैद होते ही नियमों की अनदेखी करने वालों के चालान स्वयं जेनरेट होकर वाहन स्वामी के मोबाइल पर पहुंचेंगे।

संतोष कुमार यादव ने मुख्य सचिव को यह भी स्पष्ट सुझाव दिया था कि सभी डीएम समय-समय पर नेशनल हाईवे का औचक निरीक्षण करें और नियमित गश्त के लिए एक फूलप्रूफ एसओपी और टास्क फोर्स का खाका तैयार करें।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर बेहद गंभीर है और हादसों की रोकथाम के लिए लगातार कड़े कदम उठाए गए हैं। विभिन्न विभागों के बीच गहरा समन्वय स्थापित करते हुए हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद किया जा रहा है।

वर्ष 2026 में मई, जून और जुलाई के महीने सड़क दुर्घटनाओं के दृष्टिकोण से अति संवेदनशील माने जाते हैं। वर्तमान में उत्तराखंड में चारधाम यात्रा अपने पूरे चरम पर है और इस दौरान बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की भारी भीड़ से हाईवे पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है। इन तीन महीनों में पहाड़ों के घुमावदार रास्तों पर अनियंत्रित यातायात जानलेवा साबित होता है।

हादसों की भयावहता के आंकड़े राज्य के लिए गहरी चिंता का विषय बने हुए हैं। एक वरिष्ठ परिवहन अधिकारी द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में सड़क हादसों की गंभीरता का राष्ट्रीय औसत जहां मात्र 36 प्रतिशत तक सीमित है, वहीं उत्तराखंड में यह औसत 62 प्रतिशत के खतरनाक स्तर को पार कर चुका है। इसी भयानक औसत को नीचे लाने और निर्दोष यात्रियों की जान बचाने के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स को पूरी क्षमता के साथ लागू किया गया है।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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