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Uttarakhand News : वन गुज्जरों के अधिकार और जेल सुधार पर चर्चा; उत्तराखंड में जुटे उत्तर भारत के दिग्गज जज

उत्तराखंड में 'न्याय तक पहुंच' को सुगम बनाने के उद्देश्य से नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आगाज हुआ है। इस सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के न्यायाधीशों ने वंचित वर्गों के अधिकारों और जेल सुधारों पर विस्तृत चर्चा की।

Uttarakhand News : वन गुज्जरों के अधिकार और जेल सुधार पर चर्चा; उत्तराखंड में जुटे उत्तर भारत के दिग्गज जज

HIGHLIGHTS

  • मुख्य थीम: "Justice Beyond Barriers: Rights, Rehabilitation & Reform for the Most Vulnerable".
  • विशेष सत्र: वन अधिकार अधिनियम, 2006 और जेल सुधार (Prison Reforms) पर केंद्रित विमर्श।
  • प्रमुख उपस्थिति: सुप्रीम कोर्ट के तीन वरिष्ठ न्यायाधीश और उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की भागीदारी।

देहरादून, 11 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)।

Uttarakhand News : उत्तराखंड में समाज के कमजोर और वंचित वर्गों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए शनिवार को ‘नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस’ का औपचारिक शुभारंभ हुआ। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के तत्वाधान में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन का केंद्र “Justice Beyond Barriers” (बाधाओं से परे न्याय) रखा गया है। इस आयोजन में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीशों सहित उत्तर भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायविदों ने हिस्सा लिया।

न्यायपालिका के शीर्ष चेहरों की उपस्थिति नैनीताल में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति श्री जे. के. माहेश्वरी, श्री एन. कोटेश्वर सिंह और श्री संदीप मेहता विशेष रूप से उपस्थित रहे।

उनके साथ उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री मनोज कुमार गुप्ता और उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री मनोज कुमार तिवारी ने भी दीप प्रज्वलित कर सत्र की शुरुआत की। सम्मेलन में उत्तराखंड के सभी जिलों के विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष और सचिवों ने भी सहभागिता की।

वन समुदायों के अधिकारों पर मंथन सम्मेलन के प्रथम सत्र में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन पर गहन चर्चा की गई। इसमें वन समुदायों, विशेष रूप से वन गुज्जरों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया। कानूनी विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करना न्यायपालिका की प्राथमिकता होनी चाहिए।

जेल सुधार और बंदियों के अधिकार दूसरे महत्वपूर्ण सत्र का विषय ‘जेल सुधार’ (Prison Reforms) रहा। इस दौरान जेलों में बंद कैदियों के मानवाधिकारों, उन तक कानूनी सहायता की पहुंच और सजा काटने के बाद उनके पुनर्वास पर सुझाव साझा किए गए। न्यायमूर्तिगणों ने इस बात को रेखांकित किया कि जेल केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार का केंद्र होनी चाहिए, जहां सबसे कमजोर व्यक्ति की भी कानूनी सुनवाई सुनिश्चित हो।

सम्मेलन के मुख्य विषय और फोकस क्षेत्र

विषय चर्चा का मुख्य बिंदु लक्षित वर्ग
वन अधिकार अधिनियम कानून का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और जागरूकता वन गुज्जर एवं आदिवासी समुदाय
प्रिज़न रिफॉर्म्स जेल सुधार, विधिक सहायता और पुनर्वास विचाराधीन एवं सजायाफ्ता बंदी
एक्सेस टू जस्टिस न्याय प्रक्रिया को सरल और मानव-केंद्रित बनाना समाज के वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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