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उत्तराखंड में गहराया ईंधन संकट, पेट्रोल-डीजल की किल्लत के बीच लकड़ी और कोयला भी हुआ बेतहाशा महंगा

मध्यपूर्व में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई तेल की कमी ने उत्तराखंड के पर्वतीय और शहरी इलाकों में ईंधन का गंभीर संकट पैदा कर दिया है। पेट्रोल-डीजल की किल्लत के साथ-साथ राज्य में लकड़ी और कोयले की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे आम जनता और होटल कारोबारी परेशान हैं।

उत्तराखंड में गहराया ईंधन संकट, पेट्रोल-डीजल की किल्लत के बीच लकड़ी और कोयला भी हुआ बेतहाशा महंगा

HIGHLIGHTS

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से उत्तराखंड के कई पंपों पर ड्राई की स्थिति।
  • डिमांड बढ़ने से लकड़ी ₹2000 और कोयला ₹4500 प्रति कुंतल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
  • प्रशासन ने खुले तेल की बिक्री पर लगाई रोक, निर्माण कार्यों के लिए जेसीबी को भी पंप पर लाना अनिवार्य।

देहरादून, 01 अप्रैल (दून हॉराइज़न)। इजरायल और मध्यपूर्व के देशों के बीच जारी युद्ध की तपिश अब देवभूमि के पहाड़ों तक पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई चेन टूटने का सीधा असर उत्तराखंड के फ्यूल स्टेशन्स पर दिखने लगा है।

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पर्वतीय जिलों में पेट्रोल-डीजल की किल्लत इतनी बढ़ गई है कि कई पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड लटक गए हैं। चारधाम यात्रा और शादियों का सीजन सिर पर है, ऐसे में होटल और रेस्टोरेंट कारोबारी गैस और तेल के दोहरे संकट से जूझ रहे हैं।

गैस सिलेंडरों की किल्लत ने वैकल्पिक ईंधनों के दाम में आग लगा दी है। टाल से सीधे खरीदने पर जो लकड़ी पहले ₹800 में मिलती थी, वह अब ₹1200 प्रति कुंतल बिक रही है। वहीं, होम डिलीवरी और कमर्शियल डिमांड पर यही लकड़ी ₹2000 प्रति कुंतल के भाव पहुंच गई है।

कोयले की कीमतों ने भी पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। रेस्टोरेंट संचालकों के मुताबिक, जो कोयला ₹3800 प्रति कुंतल था, उसके दाम अब ₹4500 तक पहुंच गए हैं। देहरादून के बंजारावाला और प्रेमनगर जैसे इलाकों में छोटे ढाबा संचालक अब महंगी लकड़ी पर खाना पकाने को मजबूर हैं।

राजधानी देहरादून में जिला प्रशासन ने तेल की जमाखोरी रोकने के लिए सख्त फरमान जारी किया है। अब किसी भी निर्माण कार्य के लिए ड्रम या डिब्बों में खुला पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा। स्थिति यह है कि साइट पर चलने वाली जेसीबी मशीनों को भी डीजल भरवाने के लिए खुद पंप तक आना पड़ रहा है।

निजी पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म होने की वजह से सरकारी (कंपनी आउटलेट) पंपों पर भारी भीड़ उमड़ रही है। पिछले 48 घंटों में सरकारी पंपों की सेल में 20 फीसदी का अचानक उछाल दर्ज किया गया है। लोग डर के मारे गाड़ियों की टंकियां फुल करा रहे हैं।

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इधर, संकट के बीच कालाबाजारी करने वाले भी सक्रिय हो गए हैं। पूर्ति विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने प्रेमनगर के ठाकुरपुर में एक दुकान पर छापा मारकर अवैध गैस रिफिलिंग का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से घरेलू सिलेंडर और रिफिलिंग किट बरामद कर एक महिला के खिलाफ केस दर्ज किया है।

हालांकि, पूर्ति विभाग के अधिकारी इसे केवल ‘पैनिक बाइंग’ बता रहे हैं। जिला पूर्ति अधिकारी कैलाश अग्रवाल का कहना है कि सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित नहीं है, लेकिन लोग अफवाहों के चलते जरूरत से ज्यादा तेल स्टोर कर रहे हैं। विभाग जल्द ही पेट्रोल पंप एसोसिएशन के साथ आपात बैठक कर राशनिंग पर फैसला ले सकता है।


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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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