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सावन में श्रृंगी से जलाभिषेक करने की परंपरा क्यों है खास? जानिए धार्मिक रहस्य

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Ganga Updated Sun, 16 Aug 2026 09:53 AM IST

सावन के पवित्र महीने में शिवलिंग पर श्रृंगी से जलाभिषेक करने की परंपरा काफी पुरानी और फलदायी मानी गई है। श्रृंगी से जल अर्पित करने से शिवजी पर एकसमान धारा गिरती है, जिससे मानसिक शांति और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

Shringi Jalabhishek In Sawan

Shringi Jalabhishek In Sawan : सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का सबसे उत्तम समय माना जाता है। इस दौरान भक्त शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करके महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं।

शिव पूजा में जलाभिषेक का विशेष स्थान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि श्रृंगी से जल चढ़ाने को सबसे श्रेष्ठ क्यों माना गया है? मंदिरों और पौराणिक पूजा पद्धतियों में श्रृंगी का उपयोग जल अर्पित करने के लिए मुख्य रूप से किया जाता है।

आइए समझते हैं कि श्रृंगी क्या है और इससे जलाभिषेक करने से किस तरह के आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं।

क्या होती है श्रृंगी?

श्रृंगी एक विशेष प्रकार का पूजा पात्र होता है, जो आगे से पतला और पीछे से चौड़ा होता है। इसका आकार गाय के सींग जैसा होता है।

प्राचीन समय में इसे प्राकृतिक रूप से तैयार किया जाता था, लेकिन आज यह पीतल, तांबे या चांदी जैसी पवित्र धातुओं से बनाई जाती है।

इसके निचले पतले हिस्से से जल की एक पतली और निरंतर धारा निकलती है, जो सीधे शिवलिंग पर गिरती है।

श्रृंगी से जलाभिषेक का धार्मिक रहस्य

शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव को जल की निरंतर और धीमी धारा अत्यंत प्रिय है। जब हम साधारण लोटे से जल चढ़ाते हैं, तो जल एक ही बार में तेज़ी से शिवलिंग पर गिर जाता है।

श्रृंगी से जल अर्पित करने पर जल की धारा टूटती नहीं है और वह पतली रेखा की तरह शिवलिंग पर गिरती रहती है। इस अनवरत धारा को भक्ति और ध्यान की एकाग्रता का प्रतीक माना जाता है।

पौराणिक मान्यता है कि इस प्रकार जल अर्पित करने से शिवजी तुरंत प्रसन्न होते हैं और भक्त के जीवन में स्थिरता आती है।

श्रृंगी से जल चढ़ाने के मुख्य लाभ

मानसिक शांति और तनाव से मुक्ति

श्रृंगी से जल चढ़ाते समय जो पतली धारा गिरती है, उसे ध्यानपूर्वक देखना मन को शांत करता है। इससे अनचाही चिंताएं दूर होती हैं।

एकाग्रता और संकल्प शक्ति में वृद्धि

धारा के निरंतर बहने की तरह ही जीवन में भी एकाग्रता का संचार होता है। यदि आप किसी कार्य में सफलता चाहते हैं, तो सावन में श्रृंगी से जलाभिषेक करना शुभ माना जाता है।

गृह क्लेश और बाधाओं का नाश

मान्यता है कि श्रृंगी से दूध या जल की धारा अर्पित करने से घर का वातावरण सकारात्मक बनता है और पारिवारिक मतभेद समाप्त होते हैं।

जलाभिषेक करते समय ध्यान रखें ये बातें

सामग्री का चयन: पूजा के लिए तांबे, पीतल या चांदी की श्रृंगी का ही प्रयोग करें।

दिशा का ध्यान: जलाभिषेक करते समय हमेशा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें या खड़े हों।

मंत्र का जाप: जल अर्पित करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का मन ही मन स्पष्ट उच्चारण करें।

सावधानी: ध्यान रखें कि श्रृंगी सीधे शिवलिंग को स्पर्श न करे। थोड़ा ऊपर से ही जल की धारा अर्पित करें।

Ganga

गंगा 'दून हॉराइज़न' में धर्म और ज्योतिष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें वैदिक ज्योतिष, पंचांग, व्रत-त्योहार और वास्तु शास्त्र का गहरा ज्ञान और वर्षों का अनुभव है। गंगा का उद्देश्य सिर्फ दैनिक राशिफल बताना नहीं, बल्कि धर्म और अध्यात्म से जुड़ी सटीक, शोध-आधारित और प्रामाणिक जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना है। वह ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं का गहराई से विश्लेषण करती हैं। उनकी तथ्यपरक लेखनी पाठकों को अंधविश्वास से दूर रखकर एक सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान करती है, जिससे वे डिजिटल पाठकों के बीच एक बेहद भरोसेमंद नाम बन गई हैं।

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