नई दिल्ली। बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और 18 महीने की अंतरिम सरकार के शासन के बाद अब ढाका और नई दिल्ली के बीच कूटनीतिक रिश्तों में नई गर्माहट महसूस की जा रही है। बांग्लादेश के नवनियुक्त विदेश मंत्री खलीलुर रहमान अगले महीने भारत की संक्षिप्त यात्रा पर आ सकते हैं। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार की ओर से भारत के साथ उच्च स्तरीय संवाद की यह पहली औपचारिक शुरुआत होगी।
सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्री खलीलुर रहमान 8 अप्रैल को मॉरीशस में आयोजित होने वाले ‘हिंद महासागर सम्मेलन’ में शामिल होने जा रहे हैं। इसी यात्रा के दौरान वे नई दिल्ली में एक ‘स्टॉपओवर’ करेंगे। माना जा रहा है कि इस संक्षिप्त प्रवास के दौरान उनकी भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ महत्वपूर्ण मुलाकात हो सकती है।
हाल ही में ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने खलीलुर रहमान से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने भारत की ओर से द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई और उन्हें जल्द भारत आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया। गौरतलब है कि खलीलुर रहमान इससे पहले यूनुस सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका निभा चुके हैं, जिससे वे दोनों सरकारों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में उभरे हैं।
बांग्लादेश की नई विदेश नीति में एक बड़ा बदलाव भी देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा के लिए भारत या चीन जैसे क्षेत्रीय दिग्गजों के बजाय भूटान या मालदीव को चुन सकते हैं। जानकारों का कहना है कि बांग्लादेश की नई सरकार यह संदेश देना चाहती है कि उसकी विदेश नीति किसी एक क्षेत्रीय शक्ति की ओर झुकी हुई नहीं होगी, बल्कि वह सभी पड़ोसियों के साथ समान सम्मान के आधार पर संबंध बनाना चाहती है।
भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले 18 महीनों में सीमा विवाद, तीस्ता जल बंटवारे और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काफी तनाव देखा गया था। हालांकि, तारिक रहमान ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में ‘विकसित भारत 2047’ का जिक्र करते हुए आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है। खलीलुर रहमान की यह दिल्ली यात्रा इसी विश्वास बहाली की दिशा में पहला ठोस कदम मानी जा रही है।











