इस्लामाबाद। आतंकवाद को खाद-पानी देने वाला पाकिस्तान अब अपने ही बोए कांटों से लहूलुहान है। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) द्वारा जारी ‘ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026’ ने पुष्टि कर दी है कि पाकिस्तान अब बुर्किना फासो को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक आतंकवाद प्रभावित देश बन चुका है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक साल 2025 पाकिस्तान के लिए पिछले एक दशक का सबसे काला साल साबित हुआ। इस दौरान वहां 1,045 आतंकी घटनाओं में 1,139 लोगों ने अपनी जान गंवाई। विशेषज्ञों के लिए सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 2020 की तुलना में 2025 तक पाकिस्तान में आतंकी हिंसा में 600% का उछाल आया है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां पूरी दुनिया में आतंकवाद से होने वाली मौतों में 28% की गिरावट आई है, वहीं पाकिस्तान में यह ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर होने वाली कुल आतंकी मौतों का लगभग 70% हिस्सा केवल पांच देशों—पाकिस्तान, बुर्किना फासो, नाइजीरिया, नाइजर और कांगो—से आता है।
पाकिस्तान की इस बर्बादी के पीछे अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने अफगान धरती को ढाल बनाकर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमले तेज कर दिए हैं। 2025 में TTP के हमलों में 24% की वृद्धि हुई, जिसमें 637 लोग मारे गए।
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) भी पाकिस्तान के लिए नासूर बन चुकी है। क्वेटा के पास जाफर एक्सप्रेस के अपहरण और 442 लोगों को बंधक बनाने वाली घटना ने पूरी दुनिया को हिला दिया था। वर्तमान में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सैन्य संघर्ष और सीमा पर हवाई हमलों ने स्थिति को और अधिक विस्फोटक बना दिया है।
दूसरी ओर, भारत ने इस चुनौतीपूर्ण माहौल में खुद को सुरक्षित रखने में सफलता पाई है। वैश्विक रैंकिंग में 13वें स्थान पर मौजूद भारत ने 2025 में आतंकी हमलों में 43% की उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। भारत का GTI स्कोर अब 6.428 है, जो पिछले दशक के मुकाबले बेहतर सुरक्षा तंत्र का प्रमाण है।
पड़ोसी देशों की बात करें तो नेपाल और बांग्लादेश ने शांति की नई राह दिखाई है। नेपाल में लगातार तीसरे साल एक भी आतंकी घटना नहीं हुई, जबकि बांग्लादेश ने हमलों में 100% की गिरावट दर्ज की है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि पाकिस्तान ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो आने वाले समय में बड़े पैमाने पर विस्थापन और अस्थिरता पूरे दक्षिण एशिया को प्रभावित करेगी।












