दून हॉराइज़न, लखनऊ (12 सितंबर): युवा सोशल मीडिया पर वक्त बर्बाद कर रहा है और किताबों से मुंह मोड़ चुका है—यह दलील पूरी तरह खारिज करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में 5वें गोमती पुस्तक महोत्सव (Gomti Book Festival) का उद्घाटन किया।
उद्घाटन के तुरंत बाद उन्होंने स्कूली बच्चों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लिखी चर्चित किताब ‘एग्जाम वॉरियर्स’ अपने हाथों से बांटी। सीएम ने दो टूक कहा कि यह धारणा गलत है कि नई पीढ़ी पढ़ना नहीं चाहती; असल कमी यह थी कि सिस्टम ने किताबें उन तक पहुंचाने का माद्दा नहीं दिखाया।
नैमिषारण्य से लेकर शुक्रतीर्थ तक: संकुचित दायरे ने यूपी को नुकसान पहुंचाया
सीएम योगी ने अपने संबोधन में साफ किया कि जब कोई समाज अपनी बौद्धिक विरासत से कटता है, तो उसका बीमारू होना तय हो जाता है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि लखनऊ से महज 70 किलोमीटर दूर स्थित नैमिषारण्य ऋषियों की वैचारिक तपोभूमि रहा है, तो वहीं मुजफ्फरनगर के शुक्रतीर्थ में 5 हजार वर्ष पूर्व भागवत कथा के पहले वाचन का इतिहास दर्ज है।
ज्ञान को केवल डिग्री या तय सिलेबस (Syllabus) तक सीमित रखने की प्रवृत्ति पर चोट करते हुए उन्होंने कहा कि श्रुति, स्मृति, पांडुलिपियों और ताम्रपत्रों की समृद्ध परंपरा को नजरअंदाज करने का ही नतीजा था कि एक दशक पहले तक उत्तर प्रदेश पहचान के गंभीर संकट से जूझ रहा था।
चित्रकूट की छात्रा का उदाहरण और ऑपरेशन कायाकल्प का असर

प्राथमिक शिक्षा के ढांचे पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली व्यवस्थाओं पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब शासन में बैठे लोग जर्जर थे, तो स्कूलों की छतों और दीवारों का जर्जर होना स्वाभाविक था। आज ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों का कायापलट हो चुका है।
अपने एक संस्मरण का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि चित्रकूट के एक बेहद पिछड़े स्कूल में जब वे दोबारा पहुंचे, तो वहां कक्षा तीन की एक नन्हीं छात्रा ने खुद कंप्यूटर पर डिजिटल लाइब्रेरी चलाकर पाठ्यक्रम सामग्री स्क्रीन पर प्रदर्शित कर दी। प्रतिभा पहले भी थी, फर्क सिर्फ अवसर और तकनीकी मंच मिलने का पड़ा है।
ग्राम सचिवालयों में आधुनिक लाइब्रेरी, NBT की सबसे बड़ी खरीदार यूपी सरकार
डिजिटल तकनीक ने गांव और शहर के बीच की बौद्धिक खाई पाट दी है। अब ग्राम प्रधान अपने निजी घर से पंचायत नहीं चलाते, बल्कि प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों में सुसज्जित ग्राम सचिवालय संचालित हो रहे हैं। इनमें ग्रामीणों और छात्रों के लिए कॉन्फ्रेंस रूम के साथ-साथ ई-लाइब्रेरी की व्यवस्था की गई है, जहां नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) की गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें सीधे पहुंचाई गई हैं।
समारोह में एनबीटी के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे और निदेशक युवराज मलिक की मौजूदगी में सीएम ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश सरकार आज देश भर में एनबीटी की पुस्तकों की सबसे बड़ी संस्थागत खरीदार है। युवाओं को निजी ‘बुक बैंक’ बनाने की सलाह देते हुए उन्होंने साफ किया कि यह पुस्तक मेला सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गोरखपुर की तर्ज पर इसे राज्य के अन्य संभागीय मुख्यालयों तक ले जाया जाएगा।
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह, माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी और लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी समेत साहित्य जगत के कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे।











