दून हॉराइज़न, देहरादून (01 अक्टूबर) : त्योहारी सीजन से ठीक पहले सर्राफा बाजार के निवेशकों और आम खरीदारों के कान खड़े करने वाली खबर सामने आ रही है। घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की मौजूदा मजबूती के बीच कमोडिटी बाजार के विश्लेषक अब तक के सबसे आक्रामक स्तरों की भविष्यवाणी कर रहे हैं।
ताजा रुझानों के मुताबिक, 2026 के अंत या दिवाली तक सोना ₹1,80,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू सकता है, जबकि चांदी के ₹3,00,000 प्रति किलोग्राम के अभूतपूर्व आंकड़े तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि यह उछाल केवल सट्टेबाजी या तात्कालिक मांग का नतीजा नहीं है। असल में वैश्विक स्तर पर सुरक्षित निवेश की तलाश, मुद्रास्फीति का दबाव और डॉलर के मुकाबले रुपये में देखी जा रही हलचल इस तेजी को बुनियादी मजबूती दे रहे हैं।
सेंट्रल बैंकों की आक्रामक खरीद और ईटीएफ इनफ्लो से बदला रुख
बुलियन मार्केट के विशेषज्ञ और केडिया एडवाइजरी के प्रमुख अजय केडिया के आकलन के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सॉवरेन रिजर्व को मजबूत करने की होड़ मची हुई है। मौजूदा भाव ₹1.50 लाख के करीब चल रहे सोने में साल के अंत तक लगभग 18 फीसदी की अतिरिक्त तेजी की गुंजाइश दिख रही है।
आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने साल 2026 की दूसरी तिमाही के दौरान शुद्ध रूप से 289 टन सोने की खरीदारी की। यह आंकड़ा पिछली तिमाही की तुलना में करीब पांच गुना अधिक है। इस आक्रामक लिवाली का बड़ा हिस्सा चीन और पोलैंड के केंद्रीय बैंकों की ओर से आया है। उधर, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI Gold Reserve) ने भी अपने खजाने में सोने का हिस्सा लगातार बढ़ाया है, जो मई तक करीब 880.5 टन के स्तर पर आंका गया था।

सुरक्षित निवेश की यही चाहत आम निवेशकों में भी साफ दिख रही है। अगस्त के महीने में घरेलू गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में 67 प्रतिशत के मासिक उछाल के साथ 2,597 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज हुआ। इसके चलते ईटीएफ का कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति आधार (AUM) 1.91 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया।
चांदी की आपूर्ति संकट और इंडस्ट्रियल बूम
चांदी को लेकर अनुमान और भी अधिक आक्रामक हैं। मौजूदा स्तरों से करीब 28 प्रतिशत की छलांग लगाकर यह धातु ₹3 लाख प्रति किलो का आंकड़ा छू सकती है।
लेकिन चांदी की इस संभावित रैली का गणित सोने से थोड़ा अलग है। वित्तीय जानकारों के अनुसार, चांदी न केवल निवेश का माध्यम है बल्कि इसका 50 फीसदी से अधिक इस्तेमाल औद्योगिक कार्यों में होता है। वर्तमान में सोलर फोटोवोल्टिक पैनल्स, सेमीकंडक्टर चिप्स, 5G टेलीकॉम हार्डवेयर और इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) में चांदी की खपत तेजी से बढ़ी है।
मांग में भारी बढ़ोतरी के विपरीत खदानों से नई चांदी निकालने की गति बेहद सीमित है। कई प्रमुख उत्पादक देशों में अयस्क की गुणवत्ता घटने से आपूर्ति में गहरा घाटा दर्ज किया जा रहा है। यही सप्लाई डेफिसिट कीमतों को अनियंत्रित ऊंचाई की ओर धकेल रहा है।
बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। खुदरा ग्राहकों और निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि बुलियन मार्केट में तेज उछाल के साथ तकनीकी करेक्शन के दौर भी आते हैं, लिहाजा किसी भी बड़े निवेश से पहले पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन और वित्तीय सलाह अनिवार्य है।











