पौड़ी : उत्तराखंड के पौड़ी जिले में पहाड़ी इलाकों की खूबसूरती के बीच कभी-कभी जंगली जानवरों से टकराव की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इनमें गुलदार यानी लेपर्ड की सक्रियता अक्सर ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन जाती है। हाल ही में गजल्ड गांव में एक ऐसा ही मामला हुआ, जहां एक गुलदार ने लोगों की नींद हराम कर दी थी। लेकिन अब इस समस्या का समाधान हो गया है, और गांववासी राहत महसूस कर रहे हैं।
गांव में फैली दहशत की शुरुआत
पिछले हफ्ते की बात है, जब गजल्ड गांव में 45 साल के राजेंद्र नौटियाल पर गुलदार ने हमला कर दिया। इस घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया। राजेंद्र की मौत के बाद गुलदार की हरकतें और बढ़ गईं। गांव के कई पालतू जानवरों पर भी हमले होने लगे, जिससे लोग घर से बाहर निकलने में भी डरने लगे। उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या पुरानी है।
आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में हर साल दर्जनों ऐसी घटनाएं होती हैं, जहां लेपर्ड या अन्य जंगली जानवर इंसानों या उनके पशुओं को निशाना बनाते हैं। जंगलों के कटाव और आबादी के बढ़ने से ये टकराव बढ़ रहे हैं।
ग्रामीणों की आवाज और विभाग की कार्रवाई
गांववालों में गुस्सा और डर इतना बढ़ गया कि उन्होंने वन विभाग से तुरंत मदद मांगी। वे चाहते थे कि सरकारी शूटरों के अलावा कोई निजी विशेषज्ञ भी बुलाया जाए, ताकि इस खतरे को जल्दी खत्म किया जा सके। विभाग ने उनकी बात सुनी और प्रसिद्ध शूटर जॉय हुकिल को टीम के साथ इलाके में भेजा।
जॉय हुकिल का नाम वन्यजीव प्रबंधन में काफी जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने पहले भी कई मुश्किल मामलों को संभाला है। उनकी टीम ने गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की और ट्रैकिंग के लिए कैमरे लगाए।
रात की कार्रवाई और राहत का पल
बुधवार की देर रात जॉय हुकिल और उनकी टीम को सफलता मिली। उन्होंने गुलदार को ट्रैक किया और उसे नियंत्रित करने के लिए शूट कर दिया। यह एक मादा गुलदार थी, जिसकी उम्र करीब 5 साल बताई जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की कि ट्रैप कैमरों में कैद हुई तस्वीरें इसी गुलदार की थीं।
कार्रवाई के बाद गुलदार को बचाव टीम ने उठाया और पौड़ी की नागदेव रेंज में ले जाया गया। वहां उसकी विस्तृत जांच होगी, ताकि यह समझा जा सके कि वह इतनी आक्रामक क्यों हो गई थी। लेपर्ड आमतौर पर शर्मीले होते हैं, लेकिन भोजन की कमी या बीमारी के कारण कभी-कभी इंसानों पर हमला कर देते हैं।
इलाके में बढ़ती घटनाएं और सतर्कता की जरूरत
पौड़ी जिले के कई हिस्सों में ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं। जैसे कि चौबट्टाखाल इलाके में हाल ही में एक महिला पर गुलदार का हमला हुआ, जिसमें वह बुरी तरह घायल हो गई। ये मामले दिखाते हैं कि वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी है। वन विभाग अब ज्यादा सतर्क हो रहा है और ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम चला रहा है। जैसे कि जंगलों के पास न घूमना, पशुओं को सुरक्षित रखना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देना। इस घटना से ग्रामीणों का डर तो कम हुआ है, लेकिन यह याद दिलाती है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाना कितना महत्वपूर्ण है।
आगे क्या: जांच और रोकथाम के उपाय
वन डीएफओ अभिमन्यू सिंह ने बताया कि गुलदार की जांच से और ज्यादा जानकारी मिलेगी। अगर यह नरभक्षी साबित हुई, तो विभाग आगे की रणनीति बनाएगा। उत्तराखंड में लेपर्ड की आबादी करीब 2,000 से ज्यादा है, जो देश में सबसे ज्यादा है। ऐसे में, सरकार और स्थानीय समुदाय मिलकर इन संघर्षों को कम करने के लिए काम कर रहे हैं। जैसे कि जंगलों को बचाना, वैकल्पिक भोजन स्रोत उपलब्ध कराना और ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करना। ग्रामीण अब सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं, लेकिन सावधानी बरतना जारी रखेंगे।















