देहरादून : मसूरी में माल रोड पर सड़क किनारे दुकानदारों को हटाने का विवाद गहराता जा रहा है। उत्तराखंड की इस प्रसिद्ध पर्यटन स्थल, जिसे पहाड़ों की रानी कहा जाता है, में माल रोड शहर की जान है। यहां हर साल लाखों पर्यटक घूमने आते हैं, और स्थानीय व्यापारियों की छोटी-छोटी दुकानें इस जगह की जीवंतता बढ़ाती हैं।
लेकिन अब प्रशासन की एक नई नीति ने यहां के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। नगर पालिका ने 20 दिसंबर से माल रोड पर सड़क किनारे दुकान लगाने पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जिससे कई परिवारों की आजीविका खतरे में पड़ गई है।
व्यापारियों की पहचान और स्थानांतरण की योजना
हाल ही में मसूरी के उप जिलाधिकारी राहुल आनंद ने सड़क किनारे के व्यापारियों का एक सर्वे कराया। इस सर्वे में कुल 97 व्यापारियों को चिन्हित किया गया, जो सालों से यहां अपना कारोबार चला रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि इन लोगों को माल रोड से हटाकर शहर के अन्य हिस्सों में बेहतर जगहों पर बसाया जाएगा।
इससे सड़क पर ट्रैफिक सुगम बनेगा और पर्यटकों को घूमने में आसानी होगी। लेकिन इस प्रक्रिया से बाहर रह गए व्यापारियों में गुस्सा है। वे दावा करते हैं कि सर्वे निष्पक्ष नहीं था और कई योग्य लोगों को नजरअंदाज किया गया। अगर उन्हें यहां से जबरन हटाया गया, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।
राजनीतिक हलचल और आरोप-प्रत्यारोप
यह मुद्दा अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री सोनिया आनंद रावत ने व्यापारियों का साथ देते हुए नगर पालिका की अध्यक्ष मीरा सकलानी पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि प्रशासन बिना वैकल्पिक व्यवस्था के लोगों की रोजी-रोटी छीन रहा है। सोनिया कहती हैं कि हर इंसान को सम्मानजनक रोजगार का हक है, और सर्वे की प्रक्रिया पर पारदर्शिता की कमी है। वे इस फैसले का कड़ा विरोध करने की बात कर रही हैं।
दूसरी तरफ, मीरा सकलानी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि माल रोड को किसी बाजार की तरह गंदा नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वे टाउन वेंडिंग कमेटी के नियमों के अनुसार हुआ है, और केवल असली जरूरतमंद व्यापारियों को ही सहायता मिलेगी। मीरा का कहना है कि कुछ लोग निजी फायदे या राजनीति के लिए शहर की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
व्यापारी संघ की मांगें और संभावित आंदोलन
सड़क किनारे व्यापारियों के संघ के महामंत्री संजय टम्टा ने प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। वे कहते हैं कि नगर पालिका को सभी व्यापारियों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, न कि चुनिंदा लोगों की। अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो संघ आंदोलन करने पर मजबूर होगा। यह विवाद मसूरी जैसे पर्यटन केंद्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था काफी हद तक छोटे व्यापारियों पर टिकी है। भारत में स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के तहत ऐसे व्यापारियों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, जिसमें वेंडिंग जोन बनाने और सर्वे की व्यवस्था शामिल है। लेकिन यहां की स्थिति से लगता है कि अमल में चुनौतियां हैं।
यह पूरा मामला मसूरी के विकास और स्थानीय लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाने की कोशिश जैसा लगता है। प्रशासन पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए साफ-सुथरी सड़कें चाहता है, जबकि व्यापारी अपनी दैनिक कमाई बचाने की जद्दोजहद में हैं। आने वाले दिनों में इस पर क्या फैसला होता है, यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन फिलहाल शहर में तनाव का माहौल है।















