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Diabetic Shock Kya Hai : डायबिटिक शॉक क्यों होता है, जानिए इसके शुरुआती लक्षण और बचाव के आसान उपाय

Diabetic Shock Kya Hai : डायबिटिक शॉक यानी हाइपोग्लाइसीमिया में ब्लड शुगर लेवल खतरनाक स्तर तक गिर जाता है, जिससे मरीज कोमा में भी जा सकता है। इससे निपटने के लिए मेडिकल एक्सपर्ट्स '15 के नियम' को अपनाने की सलाह देते हैं, जो आपातकालीन स्थिति में जान बचा सकता है।

Published on: January 16, 2026 6:47 AM
Diabetic Shock Kya Hai
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HIGHLIGHTS

  • गंभीर गिरावट: खून में ग्लूकोज का स्तर बहुत कम होने से मरीज कोमा में भी जा सकता है।
  • प्रमुख कारण: इंसुलिन की अधिक मात्रा, भोजन छोड़ना या खाली पेट भारी व्यायाम करना।
  • 15 का नियम: शुगर कम होने पर 15 ग्राम मीठा खाएं और 15 मिनट बाद दोबारा चेक करें।
  • सावधानी: बेहोश मरीज के मुंह में कभी भी कुछ न डालें, इससे दम घुटने का खतरा रहता है।

Diabetic Shock Kya Hai : भागदौड़ और तनाव भरी जीवनशैली के बीच डायबिटिक शॉक एक गंभीर समस्या बनकर उभर रही है। मेडिकल भाषा में इसे हाइपोग्लाइसीमिया या इंसुलिन शॉक कहा जाता है।

इस स्थिति में व्यक्ति के खून में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से बहुत नीचे चला जाता है। शरीर और दिमाग को काम करने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है और जब शुगर का स्तर गिरता है, तो यह सप्लाई बाधित हो जाती है।

कई बार डायबिटीज न होने पर भी लोग इसके शिकार हो जाते हैं और बिना किसी लक्षण के शुगर 60 mg/dL से भी नीचे चली जाती है।

क्यों होता है डायबिटिक शॉक

शरीर में शुगर लेवल अचानक गिरने के पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं। इंसुलिन या डायबिटीज की दवा का अधिक सेवन करना इसका एक प्रमुख कारण है।

इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति खाना छोड़ देता है, बहुत देर से खाना खाता है या बिना कुछ खाए-पीए भारी एक्सरसाइज कर लेता है, तो उसे डायबिटिक शॉक लग सकता है।

शुगर बहुत ज्यादा गिर जाने पर मरीज सुस्त हो जाता है और गंभीर स्थितियों में वह बेहोश हो सकता है या कोमा में भी जा सकता है।

इमरजेंसी में ’15 का नियम’ बचाएगा जान

लक्षण नजर आते ही मरीज या उनके परिजनों को तुरंत ’15 का नियम’ अपनाना चाहिए। इसके तहत सबसे पहले मरीज को 15 ग्राम जल्दी असर करने वाली मीठी चीज दें।

इसमें चीनी, ग्लूकोज पाउडर, टॉफी, फ्रूटी या घर में मौजूद कोई भी मीठा जूस शामिल हो सकता है। मीठा खिलाने के बाद ठीक 15 मिनट तक इंतजार करें और फिर शुगर चेक करें।

अगर शुगर लेवल अभी भी 70 mg/dL से कम है, तो दोबारा 15 ग्राम मीठी चीज दें।

बेहोशी की हालत में क्या न करें

अगर मरीज डायबिटिक शॉक की वजह से बेहोश हो गया है, तो गलती से भी उसके मुंह में कुछ न डालें। बेहोशी में खिलाने या पिलाने से मरीज का दम घुट सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

ऐसी स्थिति के लिए हर डायबिटिक मरीज के घर में ग्लूकागॉन इंजेक्शन होना चाहिए, जिसे इमरजेंसी में लगाया जा सके। इंजेक्शन देने के बाद मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं ताकि उसे आईवी (IV) ग्लूकोज दिया जा सके।

इन बातों का रखें खास ख्याल

कुछ दवाओं का असर शरीर में 24 से 48 घंटे तक रहता है, इसलिए शुगर लेवल बार-बार नीचे जा सकता है। ऐसे में मरीज को हर 1-2 घंटे में अपनी शुगर चेक करते रहना चाहिए।

डॉक्टर की सलाह से दवाओं की डोज़ एडजस्ट कराएं। सफर पर जाते समय या घर से लंबे समय तक बाहर रहने पर अपने पास चॉकलेट, टॉफी या ग्लूकोज जरूर रखें। परिवार के सदस्यों को भी इस इमरजेंसी प्रोटोकॉल के बारे में पूरी जानकारी देना बेहद जरूरी है।

Rama Pun

रमा पुन एक प्रशिक्षित और अनुभवी लेखिका हैं, जो हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरों में विशेषज्ञता रखती हैं। विभिन्न न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर 3 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, रमा पाठकों के लिए सटीक और रोचक कंटेंट तैयार करती हैं। उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी खूबी जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल और आम बोलचाल की भाषा में प्रस्तुत करना है, जिससे आम पाठक भी उसे आसानी से समझ सकें।

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