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Sanitary Pads Ke Nuksan : क्या रोज़ाना इस्तेमाल होने वाले सेनेटरी पैड्स हार्मोन डिसऑर्डर बढ़ा सकते हैं, जानिए पूरी सच्चाई

Sanitary Pads Ke Nuksan : भारत में बिकने वाले सैनिटरी पैड्स को लेकर एक अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, पैड्स में मौजूद हानिकारक केमिकल्स महिलाओं में कैंसर, बांझपन और हार्मोनल असंतुलन का खतरा बढ़ा रहे हैं।

Published on: January 16, 2026 7:03 AM
Sanitary Pads Ke Nuksan
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HIGHLIGHTS

  • सैनिटरी पैड्स में मौजूद ब्लीचिंग और खुशबूदार केमिकल्स सेहत के लिए घातक हैं।
  • पैड्स को सफेद बनाने वाला 'डाइऑक्सिन' और 'फ्यूरान' कैंसर का कारण बन सकते हैं।
  • मुलायम सतह के लिए इस्तेमाल होने वाला 'फैथलेट्स' हार्मोनल सिस्टम बिगाड़ता है।
  • बचाव के लिए ऑर्गेनिक कॉटन पैड्स या मेंस्ट्रूअल कप का इस्तेमाल सुरक्षित विकल्प है।

Sanitary Pads Ke Nuksan : मासिक धर्म (Periods) एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे मैनेज करने के लिए सैनिटरी नैपकिन (Sanitary Pads) महिलाओं की पहली पसंद होते हैं।

बाजार में आसानी से मिलने वाले ये पैड्स सुविधाजनक जरूर लगते हैं, लेकिन क्या ये सुरक्षित हैं? एक हालिया अध्ययन ने इस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सप्लाई होने वाले ज्यादातर सैनिटरी नैपकिन पूरी तरह स्वच्छ नहीं हैं। इनमें ऐसे हानिकारक केमिकल्स पाए गए हैं जो महिलाओं में कैंसर, बांझपन (Infertility) और गंभीर हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकते हैं।

सफेदी और कोमलता के पीछे छिपा जहर

पैड्स को एकदम साफ और सफेद दिखाने के लिए कंपनियां ब्लीचिंग प्रक्रिया का सहारा लेती हैं। इस प्रक्रिया से ‘डाइऑक्सिन’ (Dioxin) नामक रसायन पैदा होता है।

जब यह रसायन शरीर में अधिक मात्रा में पहुंचता है, तो हार्मोनल संतुलन बिगड़ने लगता है और त्वचा पर चकत्ते पड़ सकते हैं। इसके अलावा, पैड की ऊपरी सतह को सॉफ्ट और आरामदायक बनाने के लिए ‘फैथलेट्स’ (Phthalates) का इस्तेमाल होता है।

यह केमिकल सीधे एंडोक्राइन यानी हार्मोन बनाने वाली ग्रंथियों को प्रभावित करता है, जिससे पीरियड्स से जुड़ी अनियमितताएं शुरू हो सकती हैं।

खुशबूदार पैड्स में कैंसर कारक तत्व

बाजार में मिलने वाले खुशबूदार पैड्स में आर्टिफिशियल फ्रेगरेंस और परफ्यूम का इस्तेमाल होता है। साइंसडायरेक्ट डॉट कॉम के अनुसार, पैड्स बनाते समय ‘फ्यूरान’ जैसे पदार्थ भी इस्तेमाल होते हैं, जो कपास के रेशों से चिपक जाते हैं।

फ्यूरान एक संभावित कार्सिनोजेन (Carcinogen) है, यानी इससे कैंसर होने का खतरा रहता है। जब ये केमिकल्स जननांगों के संपर्क में आते हैं, तो शरीर में इनका उत्सर्जन ज्यादा होता है। यह सीधे तौर पर बांझपन और गंभीर रोगों को न्योता देता है।

क्या हैं सुरक्षित विकल्प?

सेहत से जुड़े इन खतरों को देखते हुए विकल्पों पर विचार करना जरूरी है। एक्सपर्ट्स प्लास्टिक और केमिकल युक्त पैड्स की जगह ऑर्गेनिक कॉटन से बने सैनिटरी पैड्स के इस्तेमाल की सलाह देते हैं।

सिलिकॉन से बने री-यूजेबल मेंस्ट्रूअल कप (Menstrual Cup) या ईको-फ्रेंडली पैड्स भी बेहतर विकल्प हो सकते हैं। हार्मोनल असंतुलन और संक्रमण से बचने के लिए पीरियड्स के दौरान नियमित रूप से पैड बदलना बेहद जरूरी है। अगर शरीर में कोई भी असामान्य लक्षण दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

Rama Pun

रमा पुन एक प्रशिक्षित और अनुभवी लेखिका हैं, जो हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरों में विशेषज्ञता रखती हैं। विभिन्न न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर 3 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, रमा पाठकों के लिए सटीक और रोचक कंटेंट तैयार करती हैं। उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी खूबी जटिल स्वास्थ्य विषयों को सरल और आम बोलचाल की भाषा में प्रस्तुत करना है, जिससे आम पाठक भी उसे आसानी से समझ सकें। 📧 Email: punr29638@gmail.com

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