Vastu Tips : लोक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र में कांच का टूटना एक अत्यंत संवेदनशील घटना मानी जाती है। आम धारणा है कि घर में शीशा या कांच का बर्तन टूटना नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक तनाव को आमंत्रित करता है।
विशेष रूप से यदि पूजा स्थल के पास कांच खंडित होता है, तो इसे माता लक्ष्मी की नाराजगी से जोड़कर देखा जाता है।
वास्तु शास्त्र और दिशाओं का प्रभाव
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार कांच का टूटना घर के भीतर ऊर्जा के असंतुलन को दर्शाता है। यदि शीशा घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा में टूटता है, तो यह गंभीर आर्थिक संकट की ओर इशारा करता है।
इसके विपरीत, उत्तर-पूर्व दिशा में कांच का टूटना तुलनात्मक रूप से कम नकारात्मक माना गया है। अक्सर पूजा स्थल की अव्यवस्था या गलत दिशा में रखे गए शीशे के कारण ऐसी घटनाएं घटती हैं।
जानकारों का मानना है कि अनजाने में कांच का टूटना कभी-कभी पुरानी नकारात्मकता के अंत और नई ऊर्जा के संचार का भी संकेत हो सकता है। यदि कांच टूटने के बाद अचानक अटके हुए काम बनने लगें, तो इसे सकारात्मक बदलाव माना जाता है।
नकारात्मक प्रभाव कम करने के उपाय
कांच टूटने की स्थिति में घबराने के बजाय त्वरित और सही कदम उठाना आवश्यक है। सबसे पहले टूटे हुए कांच के टुकड़ों को सावधानी से साफ कर किसी कागज या कपड़े में लपेटकर घर से बाहर करना चाहिए।
इसे सीधे खुले कूड़ेदान में फेंकने से बचना चाहिए ताकि नकारात्मकता का विस्तार न हो। घर की शुद्धि के लिए गंगाजल का छिड़काव और कपूर का दीपक जलाना सबसे उत्तम उपाय माना गया है।
यदि घर में बार-बार कांच टूट रहा हो, तो वास्तु शांति पूजा कराना लाभकारी सिद्ध होता है। पूजा स्थल को हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में व्यवस्थित रखना चाहिए और नया शीशा हमेशा शुभ मुहूर्त देखकर ही लगाना चाहिए।



















