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Ankita Bhandari Case : अदालत ने सभी दोषियों की जमानत याचिका फिर की खारिज, सरकार की पैरवी रही मजबूत

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Wed, 19 Aug 2026 06:24 PM IST

अंकिता भंडारी हत्याकांड के सभी आरोपियों की जमानत याचिका को अदालत ने फिर खारिज कर दिया है। सरकार की सख्त पैरवी, एसआईटी जांच और 500 पन्नों की चार्जशीट के आधार पर दोषियों को कोई राहत नहीं मिल सकी।

Ankita Murder Case: Court Rejects Bail Pleas Of All Accused Again

मुख्य बातें

  • सभी आरोपियों की जमानत याचिका अदालत से खारिज
  • 500 पन्नों की चार्जशीट और 100 गवाह दर्ज
  • 24 घंटे में गिरफ्तारी, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई
  • पीड़ित परिवार को 25 लाख सहायता और नौकरियां

दून हॉराइज़न, देहरादून (19 अगस्त 2026): अंकिता भंडारी हत्याकांड के सभी आरोपियों की जमानत याचिका अदालत ने एक बार फिर खारिज कर दी है। अभियोजन पक्ष की सख्त और तथ्यपरक पैरवी के चलते दोषियों को न्यायिक स्तर पर किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिल सकी।

घटना सामने आने के बाद प्रशासनिक तंत्र ने तत्परता दिखाते हुए 24 घंटे के भीतर सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पूरे मामले की गहन पड़ताल के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। आरोपियों के आपराधिक कृत्यों को देखते हुए उन पर गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी सख्त कानूनी शिकंजा कसा गया।

जांच एजेंसी ने मामले में लगभग 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार कर अदालत के समक्ष पेश की थी। इस आरोप पत्र में करीब 100 गवाहों के बयान और फोरेंसिक साक्ष्यों को शामिल किया गया। इन्हीं पुख्ता सबूतों के चलते मुकदमे के दौरान आरोपियों की जमानत अर्जियां लगातार खारिज होती रहीं।

अदालत में मामले की अंतिम सुनवाई के बाद दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। कानूनी प्रक्रिया के हर चरण में अभियोजन पक्ष ने बिना किसी ढिलाई के ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिससे दोषियों की जेल से बाहर आने की हर कोशिश नाकाम साबित हुई।

पीड़ित परिवार की कानूनी लड़ाई को मजबूती देने के लिए परिजनों की मांग पर तीन बार सरकारी अधिवक्ताओं को बदला गया। मृतका के माता-पिता की भावनाओं को देखते हुए मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने के आदेश भी जारी किए गए थे।

शासन ने पीड़ित परिवार को संबल देने के लिए ₹25 लाख की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की थी। इसके साथ ही दिवंगत अंकिता के पिता और भाई को सरकारी सेवा में रोजगार देकर आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

मामले को लेकर अदालत से बाहर राजनीतिक बयानबाजी और वीआईपी मूवमेंट के नाम पर भ्रम फैलाने के कई प्रयास हुए। जांच एजेंसियों और अदालत के समक्ष कोई अतिरिक्त साक्ष्य पेश किए बिना लगाए गए राजनीतिक आरोपों के बीच न्यायिक प्रक्रिया ने पूरी जांच को संतोषजनक माना और दोषियों को सजा तक पहुंचाया।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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