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श्मशान घाट पर चिता सजाते ही लौट आईं सांसें, गंगा जल पड़ते ही हिलाए हाथ-पैर

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Gudiya Sagar Updated Mon, 03 Aug 2026 12:33 PM IST

वाराणसी के बीएचयू ट्रामा सेंटर द्वारा मृत घोषित 21 वर्षीय युवक विकास की सांसें श्मशान घाट पर अचानक लौट आईं, जिससे पूरे घाट पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, दोबारा अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे 15 मिनट बाद फिर से मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।

Viral Dead Body Case

मुख्य बातें

  • मड़ुआडीह का रहने वाला विकास सड़क हादसे में घायल हुआ था, जिसे डॉक्टरों ने मृत बता दिया था।
  • गंगा जल से नहलाते समय युवक के हाथ-पैर हिले, जिसके बाद उसे तुरंत दोबारा अस्पताल ले जाया गया।
  • परिजनों ने निजी और सरकारी अस्पतालों पर गलत इलाज और जल्दबाजी में मौत की पुष्टि करने का आरोप लगाया है।

वाराणसी, 07 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर उस वक्त कोहराम मच गया जब अंतिम संस्कार के लिए लाए गए एक ‘शव’ में अचानक जान (Viral Dead Body Case) आ गई।

सड़क हादसे का शिकार हुए 21 साल के विकास को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, लेकिन श्मशान की आग ठंडी होने से पहले ही उसकी धड़कनें वापस लौटने से हर कोई सन्न रह गया। 21 वर्षीय विकास, जो शहर में शादियों में पानी सप्लाई का काम करता था, कुछ दिन पहले एक भीषण सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था।

उसे पहले मड़ुआडीह स्थित एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से स्थिति बिगड़ने पर उसे बीएचयू (BHU) के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। बुधवार की शाम डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर कागजी कार्यवाही पूरी कर दी। मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और रोते-बिलखते रिश्तेदार विकास के पार्थिव शरीर को चार कंधों पर लेकर गंगा घाट पहुंचे।

परंपरा के अनुसार, चिता पर लेटाने से पहले जैसे ही विकास के शरीर को गंगा जल से नहलाया गया, वहां मौजूद लोगों की आंखें फटी की फटी रह गईं। पानी स्पर्श होते ही विकास के हाथ-पैर चलने लगे और उसके सीने में हलचल महसूस हुई। श्मशान घाट पर मौजूद भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई क्योंकि किसी को समझ नहीं आ रहा था कि यह कोई ईश्वरीय चमत्कार है या डॉक्टरों की भारी चूक।

परिजनों ने बिना समय गंवाए विकास को दोबारा गाड़ी में लादा और सीधे बीएचयू ट्रामा सेंटर की ओर भागे। वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे इमरजेंसी में लिया और इलाज की प्रक्रिया दोबारा शुरू की।

हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था। दोबारा भर्ती होने के महज 15 मिनट बाद डॉक्टरों ने गहन जांच के बाद विकास को आधिकारिक तौर पर दूसरी बार मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का तर्क है कि शरीर में बचे हुए रिफ्लेक्स के कारण कभी-कभी ऐसी हरकतें हो सकती हैं, लेकिन परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

विकास के माता-पिता का आरोप है कि निजी अस्पताल और फिर बीएचयू के डॉक्टरों ने उसके इलाज में कोताही बरती। उनका कहना है कि अगर पहली बार में ही उसे सही वेंटिलेटर सपोर्ट और निगरानी में रखा जाता, तो शायद उनका बेटा आज उनके बीच होता। परिवार अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ केस दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।

चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को कभी-कभी ‘लाजरस सिंड्रोम’ (Lazarus Syndrome) से जोड़कर देखा जाता है, जहां मृत घोषित व्यक्ति की संचार प्रणाली अचानक स्वतः सक्रिय हो जाती है।

हालांकि, बनारस की इस घटना ने एक बार फिर बड़े अस्पतालों की मृत्यु घोषणा प्रक्रिया और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Gudiya Sagar

गुड़िया सागर 'दून हॉराइज़न' की मल्टीमीडिया और ट्रेंडिंग न्यूज़ प्रोड्यूसर हैं। वे करियर, वायरल खबरों और वीडियो जर्नलिज्म में विशेष विशेषज्ञता रखती हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स और युवाओं की पसंद को समझना गुड़िया की सबसे बड़ी ताकत है। सरकारी नौकरियों, शिक्षा और करियर से जुड़ी हर अहम जानकारी वे पूरी फैक्ट-चेकिंग के बाद ही युवाओं तक पहुंचाती हैं। इंटरनेट पर वायरल हो रही भ्रामक खबरों की सच्चाई (Fact Check) सामने लाने और वीडियो फॉर्मेट में निष्पक्ष खबरें पेश करने के लिए गुड़िया को पत्रकारिता जगत में विशेष रूप से जाना जाता है।

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