वाराणसी, 07 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर उस वक्त कोहराम मच गया जब अंतिम संस्कार के लिए लाए गए एक ‘शव’ में अचानक जान (Viral Dead Body Case) आ गई।
सड़क हादसे का शिकार हुए 21 साल के विकास को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, लेकिन श्मशान की आग ठंडी होने से पहले ही उसकी धड़कनें वापस लौटने से हर कोई सन्न रह गया। 21 वर्षीय विकास, जो शहर में शादियों में पानी सप्लाई का काम करता था, कुछ दिन पहले एक भीषण सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था।
उसे पहले मड़ुआडीह स्थित एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से स्थिति बिगड़ने पर उसे बीएचयू (BHU) के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। बुधवार की शाम डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर कागजी कार्यवाही पूरी कर दी। मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और रोते-बिलखते रिश्तेदार विकास के पार्थिव शरीर को चार कंधों पर लेकर गंगा घाट पहुंचे।

परंपरा के अनुसार, चिता पर लेटाने से पहले जैसे ही विकास के शरीर को गंगा जल से नहलाया गया, वहां मौजूद लोगों की आंखें फटी की फटी रह गईं। पानी स्पर्श होते ही विकास के हाथ-पैर चलने लगे और उसके सीने में हलचल महसूस हुई। श्मशान घाट पर मौजूद भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई क्योंकि किसी को समझ नहीं आ रहा था कि यह कोई ईश्वरीय चमत्कार है या डॉक्टरों की भारी चूक।
परिजनों ने बिना समय गंवाए विकास को दोबारा गाड़ी में लादा और सीधे बीएचयू ट्रामा सेंटर की ओर भागे। वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे इमरजेंसी में लिया और इलाज की प्रक्रिया दोबारा शुरू की।
हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था। दोबारा भर्ती होने के महज 15 मिनट बाद डॉक्टरों ने गहन जांच के बाद विकास को आधिकारिक तौर पर दूसरी बार मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का तर्क है कि शरीर में बचे हुए रिफ्लेक्स के कारण कभी-कभी ऐसी हरकतें हो सकती हैं, लेकिन परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
विकास के माता-पिता का आरोप है कि निजी अस्पताल और फिर बीएचयू के डॉक्टरों ने उसके इलाज में कोताही बरती। उनका कहना है कि अगर पहली बार में ही उसे सही वेंटिलेटर सपोर्ट और निगरानी में रखा जाता, तो शायद उनका बेटा आज उनके बीच होता। परिवार अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ केस दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।
चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को कभी-कभी ‘लाजरस सिंड्रोम’ (Lazarus Syndrome) से जोड़कर देखा जाता है, जहां मृत घोषित व्यक्ति की संचार प्रणाली अचानक स्वतः सक्रिय हो जाती है।
हालांकि, बनारस की इस घटना ने एक बार फिर बड़े अस्पतालों की मृत्यु घोषणा प्रक्रिया और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।













