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ज्योलिकोट में डायरिया-बुखार का कहर, 7 गांवों में मेडिकल टीमें तैनात

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Sun, 13 Sep 2026 04:24 PM IST

नैनीताल के ज्योलिकोट समेत 7 गांवों में जलजनित बीमारियों के 199 मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमा अलर्ट मोड पर है। 131 मरीज ठीक हो चुके हैं और घर-घर क्लोरीन की गोलियां बांटी जा रही हैं।

nainital waterborne disease outbreak

मुख्य बातें

  • ज्योलिकोट व आसपास के 7 पर्वतीय क्षेत्रों में कुल 199 लोग जलजनित बीमारी से प्रभावित हुए।
  • उपचार के बाद अब तक 131 मरीजों को स्वस्थ होने पर अस्पतालों से छुट्टी मिली।
  • चौपड़ा, सरियाताल, बेलवाखान समेत 7 चिन्हित ग्रामीण इलाकों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए गए।
  • हल्द्वानी बेस अस्पताल व सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज में गंभीर मरीजों के लिए बेड आरक्षित।
  • स्वास्थ्य महकमे ने ग्रामीणों से केवल उबला पानी पीने और लक्षण छिपाये बिना जांच कराने की अपील की।

दून हॉराइज़न, देहरादून (13 सितंबर): जनपद नैनीताल के ज्योलिकोट और समीपवर्ती ग्रामीण इलाकों में दूषित पानी से फैली जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) के कुल 199 मामले सामने आने के बाद राज्य स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह सक्रिय हो गया है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने दैनिक समीक्षा बैठक कर प्रभावित क्षेत्रों में डॉक्टरों की अतिरिक्त तैनाती और लगातार निगरानी के निर्देश जारी किए हैं। राहत की बात यह है कि अब तक अस्पतालों में भर्ती 131 मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं, जबकि 17 नए मरीजों को निगरानी में रखकर इलाज दिया जा रहा है।

7 गांवों में मेडिकल कैंप और घर-घर क्लोरीन का वितरण

पहाड़ी ढलानों पर बसे गांवों में संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए स्वास्थ्य टीमों ने सात संवेदनशील इलाकों—चौपड़ा, सरियाताल, बेलवाखान, गांग, भल्यूटी, ज्योलिकोट और बीरभट्टी—में डेरा डाल दिया है। इन सभी जगहों पर तात्कालिक स्वास्थ्य शिविर लगाकर उल्टी, दस्त और पेट दर्द के लक्षणों वाले मरीजों की रैपिड स्क्रीनिंग की जा रही है।

संक्रमण का मुख्य स्रोत प्राकृतिक जल स्रोतों में गंदगी का मिलना माना जा रहा है। इसी वजह से स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की टीमें घर-घर जाकर पानी शुद्ध करने वाली क्लोरीन टैबलेट्स बांट रही हैं। जल संस्थान और पेयजल स्वच्छता विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे ग्रामीण पेयजल योजनाओं के स्टोरेज टैंकों की तत्काल ब्लीचिंग और रासायनिक सफाई पूरी करें।

हल्द्वानी के बड़े अस्पतालों में बैकअप, प्राइवेट डॉक्टरों का भी सहयोग

ज्योलिकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) को 24 घंटे क्रियाशील रखने के साथ-साथ हल्द्वानी स्थित बेस अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज (एसटीएच) में आपातकालीन वार्ड तैयार रखे गए हैं। सुबोध उनियाल ने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिया है कि सुदूर बस्तियों से मरीजों को लाने में देरी न हो, इसके लिए पर्याप्त एंबुलेंस और मोबाइल मेडिकल यूनिट्स मौके पर तैनात रहें। स्थानीय निजी नर्सिंग होम और प्राइवेट डॉक्टरों को जोड़कर एक संयुक्त प्रकोप प्रबंधन टीम (Outbreak Management Team) बनाई गई है। निजी अस्पतालों से भी 16 मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं, जबकि 115 सरकारी अस्पतालों से ठीक हुए।

प्रशासन की अपील: पानी उबालकर ही पिएं

पर्वतीय क्षेत्रों में बदलते मौसम के दौरान जलस्रोतों (गूल, नौले और धारों) के दूषित होने का खतरा तेजी से बढ़ता है। स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे पीने के पानी को कम से कम 10 मिनट तक उबालने के बाद ही इस्तेमाल करें। पेट में मरोड़, दस्त या डिहाइड्रेशन का हल्का सा भी असर दिखने पर घरेलू नुस्खों के भरोसे न रहें और फौरन नजदीकी कैंप या डॉक्टर से संपर्क करें।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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