दून हॉराइज़न, देहरादून (13 सितंबर): राजधानी की सड़कों और बाजारों में प्रतिबंधित पॉलिथीन खपाने वाले कारोबारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब पूरी तरह शिकंजा कस दिया है। नगर निगम के पूरे 100 वार्डों में एक साथ शुरू हुई इस ताबड़तोड़ धरपकड़ से शहरभर की मंडियों और खुदरा दुकानों में हड़कंप मच गया। सिर्फ कागजी चेतावनियों तक सीमित रहने के बजाय प्रशासनिक अमला इस बार तराजू, पन्नी और गोदामों की सीधी तलाशी ले रहा है।
50 सेक्टर अफसरों की फौज मैदान में, 1776 दुकानों की ली गई तलाशी
मंडी से लेकर रिहायशी इलाकों के किराना स्टोर तक, जांच दल किसी को भी छूट देने के मूड में नहीं दिखा। इस अभियान को अंजाम देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर 50 विशेष सेक्टर अधिकारियों को सड़क पर उतारा गया। इन टीमों ने अब तक शहर के कुल 1,776 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का औचक मुआयना किया।
पड़ताल के दौरान 762 दुकानों और गोदामों में सिंगल यूज प्लास्टिक (Single Use Plastic) का स्टॉक या प्रत्यक्ष लेन-देन पकड़ा गया। अधिकारियों ने बिना किसी रियायत के 550 व्यापारियों के मौके पर ही चालान काट दिए। इस पूरी कार्रवाई में राजकोष में 1.96 लाख रुपये का जुर्माना जमा कराया गया है।
कार्रवाई के दौरान कई जगह व्यापारियों ने शुरुआती बहस करने की कोशिश की, मगर मजिस्ट्रेट और निगम प्रवर्तन दल की संयुक्त मौजूदगी के आगे किसी की एक न चली।
532 किलोग्राम कचरा जब्त, शहर के डंपिंग पॉइंट तक नहीं पहुंचेगा जहर

जांच दस्तों ने दुकानों के काउंटर और पिछले कमरों में छिपाकर रखी गई करीब 532 किलोग्राम प्रतिबंधित सामग्री अपने कब्जे में लेकर नष्ट करवा दी। यह केवल चालान काटकर राजस्व बटोरने का रूटीन चक्कर नहीं है। रिस्पना और बिंदाल जैसी नदियों के मुहाने पर बसे दून शहर के लिए यह प्लास्टिक ड्रेनेज चोक करने और बरसाती जलभराव की सबसे बड़ी वजह बनता रहा है।
केंद्रीय प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली (PWM Rules) के तहत 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले पॉलीथिन कैरी बैग, प्लास्टिक कटलरी और थर्माकोल के गैर-जरूरी इस्तेमाल पर पूरे राज्य में कानूनी पाबंदी है। बावजूद इसके, थोक सप्लाई की चोर गलियों से यह माल स्थानीय बाजारों तक पहुंच रहा था।
सिर्फ चालान समाधान नहीं, कपड़े के थैलों की ओर लौटना होगा
सख्त पहरे के बीच प्रशासन अब व्यापार मंडलों के साथ तालमेल बिठाकर वैकल्पिक पैकिंग मटीरियल को बढ़ावा देने की तैयारी में भी है। पलटन बाजार, धामावाला और हनुमान चौक जैसे सघन व्यापारिक केंद्रों में जहां कचरे का दबाव सबसे ज्यादा रहता है, वहां गैर-सरकारी संस्थाओं के सहयोग से कपड़े व जूट के थैलों के प्रयोग पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक बाजार से प्लास्टिक का आखिरी टुकड़ा गायब नहीं हो जाता, तब तक यह औचक छापेमारी जारी रहेगी।












