लखनऊ, 06 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने राजधानी लखनऊ को दहलाने की एक भीषण आतंकी साजिश का पर्दाफाश करते हुए चार संदिग्धों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के मुताबिक, गिरफ्त में आए ये आरोपी लखनऊ रेलवे स्टेशन पर बड़े विस्फोट को अंजाम देने की फिराक में थे। इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा आकिब है, जो सोशल मीडिया के जरिए युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें पाकिस्तानी हैंडलर्स के साथ जोड़ रहा था।
एटीएस ने जिन आरोपियों को दबोचा है, उनमें मेरठ का साकिब उर्फ ‘डेविल’ और अरबाब, गौतमबुद्धनगर का विकास उर्फ रौनक और लोकेश उर्फ पपला पंडित शामिल हैं।
इन चारों को गुरुवार को उस वक्त पकड़ा गया जब ये लखनऊ रेलवे स्टेशन के पास धमाके की रेकी और तैयारी को अंतिम रूप दे रहे थे। जांच में सामने आया है कि मेरठ का रहने वाला आकिब लंबे समय से दुबई में रहकर भारत विरोधी गतिविधियों का संचालन कर रहा है।
जांच एजेंसियों को आकिब के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर एके-47 जैसे घातक हथियारों के साथ तस्वीरें मिली थीं, जिसके बाद एटीएस ने अपनी सक्रियता बढ़ाई। आकिब ने इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के गुप्त रास्तों से मेरठ के साकिब को पाकिस्तानी आकाओं से मिलवाया था। साकिब और उसके साथी गूगल लोकेशन के आधार पर चिन्हित जगहों पर जाते थे, वहां की वीडियो रिकॉर्डिंग करते थे और फिर उसे सीधे पाकिस्तान भेज देते थे।
पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस मॉड्यूल के निशाने पर सिर्फ रेलवे स्टेशन ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण रक्षा प्रतिष्ठान और कैंट इलाके भी थे। आरोपियों ने कई हिंदूवादी नेताओं की सुरक्षा और उनकी आवाजाही की भी रेकी की थी। पाकिस्तान से मिलने वाले पैसों के लालच में इन आरोपियों ने छोटे शहरों में आगजनी की घटनाओं को भी अंजाम दिया, जिसके सबूत इनके मोबाइल फोन से बरामद वीडियो में मिले हैं।

इन आतंकियों की योजना रेलवे सिग्नल बॉक्स को तबाह करने और गैस सिलिंडर से लदे वाहनों में आग लगाकर अराजकता फैलाने की थी। शनिवार को कोर्ट में पेशी के बाद एटीएस को आरोपियों की पांच दिन की पुलिस रिमांड मिली है। अब एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि आकिब के इस नेटवर्क की जड़ें और कहां-कहां फैली हैं और क्या प्रदेश में कुछ और ‘स्लीपर सेल्स’ भी सक्रिय हैं।








