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8th Pay Commission : 31 मई तक बढ़ेगी डेडलाइन? 8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों ने मांगा अपनी बात रखने का हक

नेशनल काउंसिल (JCM) की स्टाफ साइड ने 8वें वेतन आयोग के सामने मेमोरेंडम जमा करने की प्रक्रिया को अधिक लचीला और विस्तृत बनाने के लिए 9 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा है। सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने आयोग से शब्दों की सीमा बढ़ाने और पुरानी पेंशन योजना (OPS) जैसे मुद्दों पर अलग सेक्शन की मांग की है।

8th Pay Commission : 31 मई तक बढ़ेगी डेडलाइन? 8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों ने मांगा अपनी बात रखने का हक

HIGHLIGHTS

  • मेमोरेंडम की शब्द सीमा को 500 से बढ़ाकर 1000 शब्द करने का प्रस्ताव।
  • OPS की बहाली और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा पर विशेष जोर।
  • दस्तावेज अपलोड करने की फाइल साइज 2MB से बढ़ाकर 10MB करने की मांग।

नई दिल्ली, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन के साथ ही सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की मांगों ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। नेशनल काउंसिल (Joint Consultative Machinery) की स्टाफ साइड ने आयोग की मौजूदा मेमोरेंडम प्रक्रिया को ‘सीमित’ बताते हुए इसमें आमूलचूल बदलाव की मांग की है।

स्टाफ साइड के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने 1 अप्रैल 2026 को आयोग के सदस्य सचिव पंकज जैन को एक औपचारिक पत्र लिखकर साफ किया कि मौजूदा व्यवस्था कर्मचारियों को अपनी बात पूरी तरह रखने से रोक रही है। इस पत्र के जरिए कुल 9 बड़ी मांगें उठाई गई हैं, जो सीधे तौर पर लाखों केंद्रीय कर्मचारियों के भविष्य और उनकी मांगों के प्रस्तुतीकरण से जुड़ी हैं।

कर्मचारी संगठनों का सबसे बड़ा ऐतराज मेमोरेंडम की शब्द सीमा को लेकर है। वर्तमान में किसी भी मुद्दे पर अपनी बात रखने के लिए केवल 500 शब्दों की अनुमति है, जिसे बढ़ाकर 1000 शब्द करने की मांग की गई है। इसके अलावा, तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए फाइल अपलोड साइज को भी 2MB से बढ़ाकर 10MB करने का सुझाव दिया गया है।

पेंशन का मुद्दा इस बार सबसे अधिक गरमाया हुआ है। स्टाफ साइड ने मांग की है कि मेमोरेंडम में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली के लिए एक अलग और समर्पित सेक्शन होना चाहिए। इसमें नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) से जुड़ी विसंगतियों को दर्ज करने के लिए स्पष्ट जगह देने की बात कही गई है।

महिला कर्मचारियों की कार्यस्थल सुरक्षा, मैटरनिटी बेनिफिट और चाइल्ड केयर लीव (CCL) जैसे विषयों पर भी अलग से प्रावधान मांगे गए हैं। सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने तर्क दिया है कि जेंडर इक्विटी और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों को सामान्य श्रेणियों में नहीं समेटा जा सकता।

प्रक्रिया को और अधिक समावेशी बनाने के लिए संगठनों ने 31 मई 2026 तक मेमोरेंडम जमा करने की समय सीमा बढ़ाने का आग्रह किया है। साथ ही, केवल ऑनलाइन पोर्टल के बजाय ईमेल और हार्ड कॉपी (ऑफलाइन) के जरिए भी सुझाव स्वीकार करने की मांग रखी गई है ताकि दूर-दराज के कर्मचारी भी अपनी बात पहुंचा सकें।

यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 8वां वेतन आयोग वर्तमान में डेटा और सुझाव जुटाने के शुरुआती चरण में है। अगर आयोग इन 9 मांगों को स्वीकार कर लेता है, तो कर्मचारी यूनियनों को वेतन विसंगतियों, फिटमेंट फैक्टर और भत्तों पर अपना पक्ष अधिक मजबूती और साक्ष्यों के साथ रखने का मौका मिलेगा।


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Parul Sharma

पारुल शर्मा 'दून हॉराइज़न' के बिज़नेस सेक्शन की एक अनुभवी आर्थिक एवं व्यापार संवाददाता हैं। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और पर्सनल फाइनेंस उनकी मुख्य बीट (Beat) है। पारुल को मार्केट के उतार-चढ़ाव और कंज्यूमर ट्रेंड्स का सटीक विश्लेषण करने में खास महारत हासिल है। वह अपनी रिपोर्टिंग में हमेशा प्रामाणिक सरकारी आंकड़ों और विश्वसनीय स्रोतों का ही इस्तेमाल करती हैं। पारुल का मुख्य उद्देश्य बजट, टैक्स नियमों और निवेश से जुड़ी अहम खबरों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे पाठकों तक पहुंचाना है, जिससे आम आदमी का वित्तीय ज्ञान और अधिक मजबूत हो सके।

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