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New Labour Code : इस्तीफा देने के बाद 2 दिन में करना होगा फुल सेटलमेंट, कंपनियां नहीं अटकाएंगी सैलरी

न्यू लेबर कोड 2026 के तहत अब कंपनियों को इस्तीफा देने या हटाए गए कर्मचारियों का फुल एंड फाइनल सेटलमेंट महज 2 वर्किंग डेज में करना होगा. 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला यह नियम कर्मचारियों को महीनों लंबे इंतजार और आर्थिक तनाव से मुक्ति दिलाएगा.

New Labour Code : इस्तीफा देने के बाद 2 दिन में करना होगा फुल सेटलमेंट, कंपनियां नहीं अटकाएंगी सैलरी

HIGHLIGHTS

  • 45 से 90 दिनों का पुराना सेटलमेंट सिस्टम खत्म, अब अधिकतम 2 दिन की समय सीमा तय.
  • इस्तीफा, छंटनी या कंपनी बंद होने की स्थिति में 'कोड ऑन वेजेज 2019' के तहत तुरंत भुगतान अनिवार्य.
  • 1 साल की नौकरी पर भी मिल सकेगी ग्रेच्युटी, बकाया छुट्टियों का पैसा भी इसी अवधि में मिलेगा.

नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। नौकरीपेशा वर्ग के लिए दशकों से चली आ रही ‘फुल एंड फाइनल सेटलमेंट’ की सिरदर्दी अब हमेशा के लिए खत्म होने जा रही है. केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी कर्मचारी के नौकरी छोड़ने (New Labour Code) या हटाए जाने की स्थिति में कंपनी को उसका पूरा बकाया महज दो वर्किंग डेज (48 घंटे) के भीतर चुकाना होगा.

यह ऐतिहासिक बदलाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने वाले नए लेबर कोड का हिस्सा है. अब तक प्राइवेट सेक्टर में कंपनियां हिसाब-किताब के नाम पर कर्मचारियों को 45 से 90 दिनों तक चक्कर लगवाती थीं, जिससे नई नौकरी जॉइन करने वाले युवाओं को भारी आर्थिक तंगी झेलनी पड़ती थी.

अब बहानेबाजी नहीं चलेगी

‘कोड ऑन वेजेज 2019’ के प्रावधानों के अनुसार, यह नियम हर उस परिस्थिति में लागू होगा जहां कर्मचारी और कंपनी का नाता टूटता है. चाहे आपने खुद इस्तीफा दिया हो, कंपनी ने आपकी छंटनी की हो या संस्थान ही बंद हो गया हो, मैनेजमेंट को दो दिनों के अंदर डिजिटल पेमेंट या चेक के जरिए बकाया राशि का भुगतान करना ही पड़ेगा.

श्रम मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, यदि कंपनियां इस समय सीमा का उल्लंघन करती हैं, तो उन पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी शामिल किया गया है ताकि किसी भी कर्मचारी का शोषण न हो सके.

सोशल सिक्योरिटी में बड़ा बदलाव 

इस नए लेबर कोड की सबसे बड़ी मारक क्षमता ग्रेच्युटी नियमों में छिपे बदलावों में है. वर्तमान में जहां ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की निरंतर सेवा अनिवार्य थी, वहीं नए कोड के तहत अब फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए यह सीमा घटाकर महज 1 साल कर दी गई है. इसका मतलब है कि अब कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले लाखों युवाओं को भी नौकरी छोड़ने पर एकमुश्त बड़ी रकम का लाभ मिल सकेगा.

हिसाब-किताब में क्या-क्या मिलेगा?

कंपनियों को अपने सेटलमेंट स्ट्रक्चर में अब निम्नलिखित मदों को 48 घंटे के भीतर क्लियर करना होगा:

  • वर्किंग डेज की सैलरी: आपके अंतिम कार्य दिवस तक की पूरी तनख्वाह.
  • लीव एन्कैशमेंट: बची हुई छुट्टियों के बदले मिलने वाला नकद पैसा.
  • बोनस और इंसेंटिव: प्रदर्शन के आधार पर तय हुआ पिछला सारा बकाया.
  • रिइम्बर्समेंट: ऑफिस के काम पर खर्च किए गए बिलों का रिफंड.

हालांकि, इस भुगतान से पहले कंपनियां कर्मचारी के पास मौजूद ऑफिस प्रॉपर्टी जैसे लैपटॉप, सिम कार्ड या आईडी कार्ड की रिकवरी करेंगी. यदि कर्मचारी सामान वापस नहीं करता, तो उसकी वैल्यू फाइनल अमाउंट से काट ली जाएगी.


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Rajat Sharma

रजत शर्मा 'दून हॉराइज़न' में लीड बिज़नेस एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड्स, क्रिप्टोकरेंसी और सरकारी आर्थिक नीतियों को कवर करने में उनका लंबा और जमीनी अनुभव है। रजत की सबसे बड़ी खासियत जटिल आर्थिक आंकड़ों और मार्केट ट्रेंड्स को सरल, आम बोलचाल की हिंदी में डिकोड करना है। वे तथ्य-आधारित (Fact-based) और गहराई से रिसर्च की गई स्टोरीज लिखते हैं, ताकि आम निवेशक और व्यापारी सही वित्तीय फैसले ले सकें। रजत की पत्रकारिता हमेशा सत्य, निष्पक्षता और पाठकों के आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ती है।

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