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Chamoli Tunnel Rescue : चमोली टनल में 5 दिन बाद खत्म हुआ सर्च ऑपरेशन, 10 मजदूरों के शव बरामद

दून हॉराइज़न ब्यूरो,
Published by: Harpreet Singh Updated Tue, 18 Aug 2026 07:25 PM IST

चमोली के पीपलकोटी में टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में 117 घंटे तक चला सघन सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन मंगलवार को पूरा हो गया है। टनल में फंसे कुल 22 श्रमिकों में से 12 को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि 10 श्रमिकों के शव बरामद किए गए हैं।

Chamoli THDC Tunnel Rescue Ends: 117-Hour Operation Rescues 12 Workers, 10 Dead

मुख्य बातें

  • 117 घंटे बाद टनल रेस्क्यू अभियान पूर्ण घोषित
  • कुल 22 श्रमिकों में 12 सुरक्षित, 10 की मौत
  • 13 अगस्त की शाम टनल में हुआ था जलभराव
  • सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने चलाया संयुक्त सर्च अभियान

दून हॉराइज़न, चमोली (18 अगस्त 2026): पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में पांच दिनों से चल रहा जिंदगी और मौत का संघर्ष मंगलवार को समाप्त हो गया। टनल के भीतर फंसे और लापता सभी 22 श्रमिकों को बाहर निकाल लिया गया है। 117 घंटे तक चले इस भीषण रेस्क्यू अभियान में 12 मजदूरों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि 10 श्रमिकों की जान नहीं बचाई जा सकी।

हादसा 13 अगस्त 2026 की शाम हाट-सियासैण, मायापुर क्षेत्र में टीएचडीसी की निर्माणाधीन परियोजना में हुआ था। भारी भूस्खलन और अचानक पानी के तेज रिसाव के कारण टनल के भीतर मलबा भर गया था। उस वक्त निर्माण एजेंसी हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (एचसीसी) के तहत श्रमिक भूमिगत हिस्से में कार्यरत थे। पानी और भारी गाद ने निकासी मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया, जिससे भीतर काम कर रहे 22 कर्मचारी फंस गए।

प्रशासन को सूचना मिलते ही इलाके में भारी मशीनरी और विशेषज्ञ टीमें तैनात की गईं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना जोशीमठ, आईटीबीपी जोशीमठ, आईटीबीपी गौचर, सीआईएसएफ, पुलिस और डीडीआरएफ के जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाला। टीएचडीसी की तकनीकी टीम ने भीतर फंसे पानी को निकालने के लिए हाई-कैपेसिटी सक्शन पंप और डीवाटरिंग सिस्टम स्थापित किए।

रेस्क्यू के पहले दिन 19 कर्मियों को चिन्हित कर बाहर निकाला गया था। इनमें से 12 घायल श्रमिकों को जिंदा बचाकर तुरंत प्राथमिक उपचार केंद्रों में भर्ती कराया गया, जबकि 7 श्रमिकों के शव पहले दिन बरामद हुए। सर्च टीमों को टनल के संकरे मोड़ों और जमा कीचड़ में रास्ता बनाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।

सर्च ऑपरेशन के पांचवें दिन मंगलवार 18 अगस्त को रेस्क्यू टीमों ने टनल के अंतिम छोर से शेष दो लापता श्रमिकों के शव बरामद किए। इसके साथ ही 17 अगस्त को भी एक शव मलबे से निकाला गया था।

जिलाधिकारी गौरव कुमार ने ग्राउंड जीरो पर कैंप कर पूरे अभियान की निगरानी की। पानी की निकासी और भारी मलबे में दबी लोडिंग मशीनों को काटने के लिए गैस कटर और हाइड्रोलिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने पुष्टि की कि टनल के भीतर अब कोई भी व्यक्ति फंसा या लापता नहीं है। सभी शवों का पंचनामा भरकर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। घायलों की स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है।

सकुशल रेस्क्यू किए गए 12 श्रमिक:

सुनील दीवान (छत्तीसगढ़), हारबिल गुड़िया (तपरा), कमड़ा (झारखंड), निस्तर भिंगरा (झारखंड), विनोद रावना (झारखंड), दीना बेगरा (झारखंड), खेला राम बिसरा (झारखंड), सुबेग सिंह (पंजाब), तिलकराज (हिमाचल प्रदेश), पेन सिंह (छत्तीसगढ़), रोहित पाण्डे (बिहार) और गोविन्दो मंडाल (पश्चिम बंगाल)।

हादसे में जान गंवाने वाले 10 मृतक श्रमिक:

प्रदीप पंवार (टिहरी गढ़वाल), जितेन्द्र कुमार (उत्तर प्रदेश), मुकेश सिंह (चमोली), दुर्लभ शर्मा (उत्तर प्रदेश), विजय हंसदा (उत्तर प्रदेश), लोकेश्वर पोयम (छत्तीसगढ़), भुनेश्वर (छत्तीसगढ़), देवनाथ बघेल (छत्तीसगढ़), लुकास टोपनो (झारखंड) और चेतन पोयाम (छत्तीसगढ़)।

Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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