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Diabetes Diet : डायबिटीज में चावल छोड़ना जरूरी नहीं! थाली में करें ये बदलाव, कंट्रोल रहेगा ब्लड शुगर

डायबिटीज के मरीजों को अक्सर चावल से पूरी तरह दूरी बनाने की सलाह दी जाती है, जिससे राइस लवर्स परेशान हो जाते हैं। सही वैरायटी चुनकर, पकाने की तकनीक बदलकर और पोर्शन कंट्रोल करके आप शुगर लेवल बढ़ाए बिना चावल का आनंद ले सकते हैं।

Published On: August 13, 2026 10:17 AM
Diabetes Diet

Diabetes Diet : भारतीय भोजन की बात हो और थाली से चावल गायब हो जाए, तो खाना अधूरा सा लगता है। लेकिन जैसे ही डायबिटीज का पता चलता है, सबसे पहली सलाह चावल बंद करने की मिलती है।

दरअसल, सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) ज्यादा होता है, जिसकी वजह से इसे खाते ही ब्लड शुगर लेवल तेजी से ऊपर भागता है।

अगर आप भी चावल के शौकीन हैं और शुगर की वजह से मन मार रहे हैं, तो राहत की बात यह है कि आपको इसे पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है।

बस अपनी खाने की आदतों और पकाने के तरीके में थोड़ा सा स्मार्ट बदलाव करना होगा।

सही चावल का चुनाव करें

बाजार में मिलने वाले पॉलिश किए हुए सफेद चावल में स्टार्च ज्यादा और फाइबर बेहद कम होता है। इसकी जगह कम GI वाले विकल्प चुनें:

ब्राउन राइस या हाथ का कुटा चावल: इनमें फाइबर भरपूर होता है, जिससे शरीर ग्लूकोज को धीरे-धीरे सोखता है।

बासमती राइस: सामान्य सफेद चावल की तुलना में बासमती का ग्लाइसेमिक प्रभाव थोड़ा कम होता है।

पकाने की तकनीक बदलें (रेजिस्टेंट स्टार्च हैक)

चावल बनाने का तरीका इसका शुगर स्पाइक पर असर तय करता है।

भिगोकर बनाएं: चावल पकाने से पहले 20-30 मिनट अच्छी तरह धोकर भिगो दें। इससे अतिरिक्त स्टार्च बाहर निकल जाता है।

ठंडा करके खाएं: चावल को पकाकर कुछ घंटों के लिए फ्रिज में ठंडा होने दें और फिर हल्का गुनगुना करके खाएं। इस प्रक्रिया से चावल में ‘रेजिस्टेंट स्टार्च’ बन जाता है। यह स्टार्च धीरे-धीरे पचता है और शुगर को अचानक बढ़ने से रोकता है।

थाली का संतुलन (पोर्शन कंट्रोल)

केवल चावल खाने के बजाय अपनी प्लेट को सही अनुपात में बांटें:

  • आधा हिस्सा: हरी-भरी सब्जियां और सलाद रखें।
  • एक-चौथाई हिस्सा: दाल, पनीर, राजमा, छोले या अंडा-चिकन जैसा प्रोटीन शामिल करें।
  • एक-चौथाई हिस्सा: सीमित मात्रा में चावल लें।

सब्जियों का फाइबर और दालों का प्रोटीन पाचन की गति धीमी कर देता है, जिससे चावल खाने के बावजूद ग्लूकोज धीरे-धीरे खून में मिलता है।

ध्यान दें: हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से रिएक्ट करता है। इसलिए अपनी डाइट में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह जरूर लें।

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Rama Pun

रमा पुन 'दून हॉराइज़न' में हेल्थ और लाइफस्टाइल संपादक के रूप में अपनी अहम जिम्मेदारी निभा रही हैं। स्वास्थ्य, फिटनेस, खानपान और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के विषयों पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। रमा का फोकस हमेशा मेडिकल एक्सपर्ट्स की पुख्ता सलाह और वैज्ञानिक शोध पर आधारित (Evidence-based) खबरें लिखने पर रहता है। उनका स्पष्ट मानना है कि सेहत से जुड़ी कोई भी जानकारी शत-प्रतिशत प्रामाणिक होनी चाहिए। अपनी आकर्षक और तथ्यपरक लेखनी से वे पाठकों को एक स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए निरंतर प्रेरित और जागरूक करती हैं।

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