Diabetes Diet : भारतीय भोजन की बात हो और थाली से चावल गायब हो जाए, तो खाना अधूरा सा लगता है। लेकिन जैसे ही डायबिटीज का पता चलता है, सबसे पहली सलाह चावल बंद करने की मिलती है।
दरअसल, सफेद चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) ज्यादा होता है, जिसकी वजह से इसे खाते ही ब्लड शुगर लेवल तेजी से ऊपर भागता है।
अगर आप भी चावल के शौकीन हैं और शुगर की वजह से मन मार रहे हैं, तो राहत की बात यह है कि आपको इसे पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है।
बस अपनी खाने की आदतों और पकाने के तरीके में थोड़ा सा स्मार्ट बदलाव करना होगा।
सही चावल का चुनाव करें
बाजार में मिलने वाले पॉलिश किए हुए सफेद चावल में स्टार्च ज्यादा और फाइबर बेहद कम होता है। इसकी जगह कम GI वाले विकल्प चुनें:
ब्राउन राइस या हाथ का कुटा चावल: इनमें फाइबर भरपूर होता है, जिससे शरीर ग्लूकोज को धीरे-धीरे सोखता है।
बासमती राइस: सामान्य सफेद चावल की तुलना में बासमती का ग्लाइसेमिक प्रभाव थोड़ा कम होता है।
पकाने की तकनीक बदलें (रेजिस्टेंट स्टार्च हैक)
चावल बनाने का तरीका इसका शुगर स्पाइक पर असर तय करता है।
भिगोकर बनाएं: चावल पकाने से पहले 20-30 मिनट अच्छी तरह धोकर भिगो दें। इससे अतिरिक्त स्टार्च बाहर निकल जाता है।
ठंडा करके खाएं: चावल को पकाकर कुछ घंटों के लिए फ्रिज में ठंडा होने दें और फिर हल्का गुनगुना करके खाएं। इस प्रक्रिया से चावल में ‘रेजिस्टेंट स्टार्च’ बन जाता है। यह स्टार्च धीरे-धीरे पचता है और शुगर को अचानक बढ़ने से रोकता है।
थाली का संतुलन (पोर्शन कंट्रोल)
केवल चावल खाने के बजाय अपनी प्लेट को सही अनुपात में बांटें:
- आधा हिस्सा: हरी-भरी सब्जियां और सलाद रखें।
- एक-चौथाई हिस्सा: दाल, पनीर, राजमा, छोले या अंडा-चिकन जैसा प्रोटीन शामिल करें।
- एक-चौथाई हिस्सा: सीमित मात्रा में चावल लें।
सब्जियों का फाइबर और दालों का प्रोटीन पाचन की गति धीमी कर देता है, जिससे चावल खाने के बावजूद ग्लूकोज धीरे-धीरे खून में मिलता है।
ध्यान दें: हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से रिएक्ट करता है। इसलिए अपनी डाइट में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह जरूर लें।










