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क्या आप जानते हैं बथुए के पत्तों में छुपा है औषधियों का खजाना, जानें इसके इस्तेमाल का सही तरीका

बथुआ न केवल एक स्वादिष्ट साग है, बल्कि आयुर्वेद में इसे कैंसर की गांठ और लिवर की गंभीर बीमारियों को काटने वाली औषधि माना गया है। आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, इसका सही विधि से सेवन पथरी, बवासीर और चर्म रोगों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है।

Bathua Health Benefits

HIGHLIGHTS

  • गांठ निवारक: बथुए की जड़ समेत बना काढ़ा शरीर के किसी भी हिस्से में मौजूद गांठों को गलाने में कारगर है।
  • पोषक तत्वों का भंडार: इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन और विटामिन-ए प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  • किडनी स्टोन का इलाज: बथुए का रस और शक्कर का मेल पथरी को गलाकर बाहर निकालने में सहायक है।

Bathua Health Benefits : जिसे हम अक्सर खेतों में उगने वाला एक साधारण खरपतवार समझते हैं, वह बथुआ असल में आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली जड़ी-बूटियों में से एक है। इस ‘देसी सुपरफूड’ के गुणों का खुलासा करते हुए बताया कि बथुआ केवल पेट भरने के काम नहीं आता, बल्कि यह शरीर में पनप रही घातक गांठों और कैंसर जैसी बीमारियों के खतरे को कम करने की भी ताकत रखता है।

बथुआ जिसे वैज्ञानिक जगत में ‘व्हाइट गूज फुट’ (White Goosefoot) और आयुर्वेद में ‘क्षारपत्र’ कहा जाता है, मुख्य रूप से दिसंबर से मार्च के बीच उपलब्ध होता है। गेहूं और जौ के खेतों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला यह पौधा आयरन और क्षार (alkaline) का सबसे बड़ा स्रोत है।

गांठों और कैंसर के खतरे को ऐसे करें कम

अगर शरीर में या लिवर के भीतर गांठें बन रही हैं, तो बथुए का विशेष उपयोग करना चाहिए। इसके लिए बथुए के पौधों को जड़ सहित उखाड़कर सुखा लें और उसका बारीक पाउडर बना लें।

लगभग 10 ग्राम पाउडर को 400 ग्राम पानी में तब तक उबालें जब तक वह घटकर 50 ग्राम न रह जाए। इस काढ़े को छानकर पीने से शरीर की आंतरिक गांठें घुलने लगती हैं। यह प्रयोग कैंसर की संभावनाओं को भी काफी हद तक कम कर देता है।

पथरी और बवासीर में अचूक है रस

पथरी (Kidney Stone) की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए बथुआ किसी वरदान से कम नहीं है। एक गिलास बथुए के ताजे रस में थोड़ी शक्कर मिलाकर नियमित सेवन करने से पथरी गलकर पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है।

वहीं, बवासीर के रोगियों के लिए बथुए को उबालकर उसका पानी पीना रामबाण इलाज माना गया है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त कर कब्ज जैसी पुरानी समस्याओं को भी समाप्त करता है।

त्वचा रोग और अन्य उपचार की विधियां

दाद और खुजली: बथुए को उबालकर उसका रस पिएं। साथ ही, बथुए के रस में तिल का तेल मिलाकर तब तक गर्म करें जब तक केवल तेल बच जाए; इसे दाद पर लगाने से तुरंत आराम मिलता है।

दिल की सेहत: लाल पत्तियों वाले बथुए के रस में सेंधा नमक मिलाकर पीने से हृदय रोगों में लाभ होता है।

जुओं का खात्मा: अगर सिर में जुएं हो गई हैं, तो बथुए के उबले हुए पानी से सिर धोना एक प्रभावी प्राकृतिक उपाय है।

नकसीर: नाक से खून बहने पर बथुए के रस की दो-चार बूंदें नाक में डालने या पीने से आराम मिलता है।

आयुर्वेद के अनुसार, बथुआ दो प्रकार का होता है—एक लाल पत्तियों वाला और दूसरा चौड़ी पत्तियों वाला। दोनों ही प्रकार मर्दाना ताकत बढ़ाने, भूख जगाने और पेट के कीड़ों को खत्म करने में अत्यंत गुणकारी हैं। विशेष रूप से बच्चों के पेट में कीड़े होने पर बथुए को आधा पानी रहने तक उबालकर पिलाना चाहिए।

Gudiya Sagar

गुड़िया सागर 'दून हॉराइज़न' की मल्टीमीडिया और ट्रेंडिंग न्यूज़ प्रोड्यूसर हैं। वे करियर, वायरल खबरों और वीडियो जर्नलिज्म में विशेष विशेषज्ञता रखती हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स और युवाओं की पसंद को समझना गुड़िया की सबसे बड़ी ताकत है। सरकारी नौकरियों, शिक्षा और करियर से जुड़ी हर अहम जानकारी वे पूरी फैक्ट-चेकिंग के बाद ही युवाओं तक पहुंचाती हैं। इंटरनेट पर वायरल हो रही भ्रामक खबरों की सच्चाई (Fact Check) सामने लाने और वीडियो फॉर्मेट में निष्पक्ष खबरें पेश करने के लिए गुड़िया को पत्रकारिता जगत में विशेष रूप से जाना जाता है।

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