Medicine Strip Information : भारत में खुद से डॉक्टर बनकर मेडिकल स्टोर से दवा खरीद लेना एक आम चलन है, लेकिन दवा के पैकेट पर दिखने वाली एक छोटी सी लाल धारी आपकी जान बचा सकती है या लापरवाही बरतने पर जोखिम में डाल सकती है।
अक्सर लोग सिरदर्द, बुखार या शरीर में दर्द होने पर पड़ोसियों या दोस्तों की सलाह पर कोई भी टैबलेट निगल लेते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, हर व्यक्ति की शारीरिक संरचना और बीमारी की गंभीरता अलग होती है, इसलिए एक ही दवा सबके लिए सुरक्षित नहीं हो सकती।
दवाइयों के रैपर या स्ट्रिप पर आपने गौर किया होगा कि एक्सपायरी डेट और कीमत के अलावा कुछ खास रंगों के निशान होते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है ‘लाल रंग की पट्टी’ (Red Vertical Line)।
स्वास्थ्य मंत्रालय के नियमों के अनुसार, जिस दवा के पैकेट पर यह लाल धारी होती है, उसका सीधा मतलब है कि उसे बिना किसी क्वालिफाइड डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के न तो बेचा जा सकता है और न ही इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह नियम विशेष रूप से एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते गलत इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए लाया गया है। दरअसल, भारत सहित दुनिया भर में ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ (AMR) एक बड़ा खतरा बन रहा है।
जब लोग बिना जरूरत के या गलत मात्रा में एंटीबायोटिक्स लेते हैं, तो शरीर के बैक्टीरिया उन दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि भविष्य में गंभीर बीमारी होने पर वही दवाएं शरीर पर बेअसर हो जाती हैं।

ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत शेड्यूल H, H1 और X श्रेणी की दवाओं के पैकेट पर यह लाल निशान अनिवार्य है। इसमें हाई-डोज पेनकिलर्स और नींद की गोलियां भी शामिल होती हैं।
मेडिकल स्टोर संचालकों को सख्त हिदायत है कि वे इन दवाओं को बिना पर्चे के किसी भी ग्राहक को न दें। यदि आप बिना डॉक्टरी सलाह के इन दवाओं का सेवन करते हैं, तो यह किडनी, लिवर और हृदय पर घातक दुष्प्रभाव डाल सकती हैं।
अगली बार जब आप फार्मेसी जाएं, तो दवा के पत्ते को पलटकर जरूर देखें। अगर उस पर लाल धारी बनी है, तो उसे अपनी मर्जी से बिल्कुल न खरीदें।

छोटी सी बचत या आलस के चक्कर में सीधे मेडिकल स्टोर से दवा लेना अस्पताल के लंबे बिल और गंभीर शारीरिक जटिलताओं का कारण बन सकता है। हमेशा याद रखें, दवा का पैकेट सिर्फ जानकारी नहीं, बल्कि सुरक्षा का एक मैनुअल भी है।









