Ajwain Water Side Effects : भारतीय घरों में गैस, अपच या पेट भारी लगने पर सबसे पहले अजवाइन का नुस्खा याद आता है।
बहुत से लोग वजन घटाने या पेट हल्का रखने के लिए रोज सुबह नियम से अजवाइन का पानी पीने लगते हैं। अजवाइन पाचन के लिए बेहतरीन जरूर है, लेकिन आयुर्वेद के मुताबिक इसकी तासीर काफी गर्म होती है।
हर किसी की शारीरिक प्रकृति अलग होती है। ऐसे में बिना अपनी जरूरत और सेहत को समझे इसे रोज पीना फायदे के बजाय परेशानी की वजह बन सकता है।
किन लोगों को अजवाइन के पानी से बचना चाहिए?
जिन लोगों के शरीर में पित्त की मात्रा ज्यादा रहती है, उन्हें इसके रोज सेवन से बचना चाहिए। अगर आपको अक्सर सीने में जलन, मुंह में छाले, खट्टी डकारें या स्किन पर रैशेज की समस्या रहती है, तो अजवाइन की गर्मी इन दिक्कतों को और तेज कर सकती है।
गैस्ट्राइटिस, पेट में अल्सर या पेट की अंदरूनी सतह में सूजन की शिकायत वाले लोगों को भी इसका पानी रोज नहीं लेना चाहिए। यह पेट के भीतर जलन और एसिड रिफ्लक्स को बढ़ा सकता है।

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के अजवाइन का नियमित सेवन नहीं करना चाहिए। इसकी गर्म तासीर शरीर का तापमान और हलचल बढ़ा सकती है।
इसके अलावा, जो लोग शारीरिक रूप से बहुत कमजोर या जरूरत से ज्यादा दुबले-पतले हैं, उनके शरीर में अत्यधिक गर्म चीजें रूखापन बढ़ा सकती हैं।
पीने का सही तरीका और सुरक्षित मात्रा
अगर आपकी पाचन शक्ति कमजोर है और गैस की समस्या रहती है, तो आधा चम्मच भुनी हुई अजवाइन को खाने के बाद चबाना सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है।
अगर पानी बनाकर पीना चाहते हैं, तो एक चम्मच अजवाइन को एक कप पानी में करीब 5 मिनट तक हल्की आंच पर उबालें।
जब पानी गुनगुना रह जाए, तब इसे छानकर दिन में सिर्फ एक बार पिएं। इसे दिनभर का रूटीन न बनाएं।
डिलीवरी के बाद रिकवरी के समय अजवाइन का पानी शरीर की सफाई में मदद करता है, लेकिन इसे भी किसी आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की सलाह के बाद ही तय मात्रा में शुरू करना चाहिए।
संतुलन बनाए रखने के आसान टिप्स
अजवाइन की तीखी और गर्म तासीर को बैलेंस करने के लिए इसे थोड़े से शुद्ध देसी घी या पुराने गुड़ के साथ लेना बेहतर माना जाता है। इससे शरीर में पित्त नहीं भड़कता और पोषक तत्व भी ठीक से पच जाते हैं।

किसी भी घरेलू नुस्खे का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल शरीर का संतुलन बिगाड़ सकता है।
अगर आपको पहले से पेट में गर्मी या जलन की दिक्कत है, तो इसे आदत बनाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट से अपनी प्रकृति जरूर समझ लें।










