Cholesterol Diet Tips : गर्मागर्म पराठे, टोस्ट या दाल पर मक्खन का स्वाद भारतीय घरों में बेहद पसंद किया जाता है। स्वाद के लिहाज से यह जितना लाजवाब है, दिल की सेहत को लेकर इसे लेकर उतनी ही बहस होती है।
जब भी कोलेस्ट्रॉल या हार्ट हेल्थ की बात आती है, सबसे पहले मक्खन पर ही सवाल उठते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि क्या मक्खन पूरी तरह नुकसानदेह है, या फिर इसे खाने का कोई सुरक्षित तरीका भी है।
शरीर में कोलेस्ट्रॉल पर मक्खन का असर
मक्खन में मुख्य रूप से सैचुरेटेड फैट (संतृप्त वसा) और प्राकृतिक कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है। जब भोजन में सैचुरेटेड फैट की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है, तो लिवर के लिए खून से खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL को साफ करना धीमा पड़ जाता है।
नतीजतन, खून में LDL कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने लगता है। समय के साथ यह नसों की दीवारों में जमा होकर रुकावट पैदा कर सकता है, जिससे दिल से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ता है।
क्या मक्खन को पूरी तरह बंद करना जरूरी है?
मक्खन केवल फैट ही नहीं देता, बल्कि इसमें विटामिन A, D, E और ब्यूटिरिक एसिड जैसे पोषक तत्व भी होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, किसी एक चीज को पूरी तरह गलत ठहराने के बजाय पूरी डाइट के संतुलन को देखना चाहिए।
अगर आप नियमित कसरत करते हैं, तली-भुनी चीजों से बचते हैं और दिनभर में सीमित मात्रा में ही फैट लेते हैं, तो कभी-कभार थोड़ा मक्खन खाना पूरी तरह सुरक्षित है।
समस्या तब आती है जब रोजाना अधिक मात्रा में मक्खन, प्रोसेस्ड फूड और मीठा एक साथ खाया जाए।
एक दिन में कितना मक्खन खाना सुरक्षित है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और हेल्थ गाइडलाइंस के मुताबिक, दिनभर की कुल कैलोरी का 10 प्रतिशत से कम हिस्सा ही सैचुरेटेड फैट से आना चाहिए।
स्वस्थ लोगों के लिए: रोजाना 1 से 2 छोटे चम्मच मक्खन संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है।
हाई रिस्क वाले लोगों के लिए: अगर आपको पहले से कोलेस्ट्रॉल या दिल की बीमारी है, तो सैचुरेटेड फैट की सीमा 5 से 6 प्रतिशत तक सीमित रखनी चाहिए।
सफेद मक्खन बनाम पीला मक्खन: क्या है अंतर?
घर का सफेद मक्खन: यह ताजा मलाई से बनता है, कम प्रोसेस्ड होता है और इसमें अलग से नमक नहीं मिलाया जाता।
बाजार का पीला मक्खन: इसमें स्वाद और शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए नमक व कभी-कभी रंग मिलाया जाता है।
फैट और कोलेस्ट्रॉल के मामले में दोनों में बहुत बड़ा अंतर नहीं होता। इसलिए घर का बना सफेद मक्खन भी जरूरत से ज्यादा खाना ठीक नहीं है।
किन लोगों को बरतनी चाहिए विशेष सावधानी?
कुछ लोगों को मक्खन का सेवन बहुत सीमित करना चाहिए या डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेना चाहिए:
- जिनका LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) पहले से बढ़ा हुआ है।
- हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर या मेटाबॉलिक सिंड्रोम के मरीज।
- डायबिटीज से पीड़ित लोग, क्योंकि इनमें हार्ट प्रॉब्लम का जोखिम सामान्य से अधिक होता है।
- वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोग, क्योंकि मक्खन में कैलोरी काफी घनी होती है।
मक्खन के बेहतर और हेल्दी विकल्प
अगर आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा रहता है, तो अनसैचुरेटेड फैट वाले विकल्पों को प्राथमिकता दें:
- कुकिंग के लिए ऑलिव ऑयल, सरसों का तेल या तिल का तेल।
- नाश्ते में एवोकाडो या पीनट बटर का सीमित इस्तेमाल।
- डाइट में बादाम, अखरोट और अलसी के बीज शामिल करना।
दिल को सेहतमंद रखने का सीधा नियम यही है कि मक्खन को पूरी तरह छोड़ने के बजाय उसकी मात्रा तय रखें और दिनचर्या में वॉक व एक्टिव लाइफस्टाइल को जरूर शामिल करें।








