Eye Care Tips : दिनभर ऑफिस का काम लैपटॉप पर, पढ़ाई टैबलेट पर और बाकी समय सोशल मीडिया या वीडियो देखने में मोबाइल पर निकल जाता है। ऐसे में आंखों में जलन, सूखापन, सिरदर्द और भारीपन होना बहुत आम बात हो गई है।
अधिकतर लोगों के मन में यह डर बना रहता है कि क्या ज्यादा स्क्रीन टाइम से आंखों की रोशनी हमेशा के लिए कमजोर हो जाएगी।
मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, स्क्रीन देखने से सीधे तौर पर नजर की स्थायी रोशनी नहीं जाती, लेकिन लगातार फोकस बनाए रखने से आंखों पर अत्यधिक दबाव बनता है। इसे मेडिकल भाषा में डिजिटल आई स्ट्रेन (Digital Eye Strain) या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहा जाता है।
स्क्रीन देखते वक्त आंखों के साथ क्या होता है?
सामान्य स्थिति में इंसान एक मिनट में लगभग 15 से 20 बार पलकें झपकाता है। इससे आंखों में नमी बनी रहती है और आंखें साफ रहती हैं।
जब हम फोन या कंप्यूटर की स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो पलक झपकाने की दर घटकर आधी यानी 6 से 8 बार रह जाती है। पलकें कम झपकने से आंखों की प्राकृतिक नमी सूखने लगती है, जिससे जलन, चुभन और लालिमा की शिकायत शुरू हो जाती है।
इसके साथ ही छोटी स्क्रीन पर देर तक देखने से आंखों की मांसपेशियों को लगातार सिकुड़कर काम करना पड़ता है, जिससे सिर और गर्दन में खिंचाव महसूस होता है।
क्या फोन चलाने से सीधे चश्मे का नंबर बढ़ जाता है?
वयस्कों में सामान्य तौर पर स्क्रीन देखने से सीधे चश्मे का नंबर नहीं बदलता। हालांकि, बच्चों और टीनेजर्स में स्थिति थोड़ी अलग होती है।
बच्चों में लगातार बेहद पास से स्क्रीन देखना और बाहर धूप में न खेलना ‘मायोपिया’ (निकट दृष्टिदोष) के खतरे को बढ़ा सकता है। इसलिए बच्चों के स्क्रीन उपयोग पर संतुलन बनाना जरूरी होता है।
डिजिटल आई स्ट्रेन के आम लक्षण
- आंखों में लगातार भारीपन, थकान या सूखापन महसूस होना
- स्क्रीन से नजर हटाने पर कुछ देर धुंधला दिखाई देना
- सिर, गर्दन या कंधों में हल्का खिंचाव और दर्द
- आंखों से बार-बार पानी आना या तेज रोशनी से परेशानी होना
- किसी एक चीज पर फोकस करने में दिक्कत महसूस होना
आंखों को आराम देने के सरल और असरदार नियम
20-20-20 का फॉर्मूला: हर 20 मिनट के काम के बाद अपनी स्क्रीन से नजर हटाएं और 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक आराम से देखें।
स्क्रीन की सही दूरी: फोन को अपनी आंखों से कम से कम 16 से 18 इंच दूर रखें। फोन को चेहरे के बिल्कुल पास लाकर चलाने से बचें।
अंधेरे में फोन न चलाएं: कमरे की बत्ती बंद करके सिर्फ मोबाइल की तेज रोशनी में पढ़ने या वीडियो देखने से आंखों की नसों पर दोगुना जोर पड़ता है।
पलकें झपकाने की आदत: काम करते समय जानबूझकर बीच-बीच में 4-5 बार गहरी पलकें झपकाएं ताकि आंखों में नमी बनी रहे।
उचित लाइटिंग: स्क्रीन की ब्राइटनेस हमेशा कमरे की रोशनी के हिसाब से एडजस्ट करें। न स्क्रीन बहुत ज्यादा चमकदार हो और न ही बहुत मंद।
क्या ब्लू कट चश्मा लगाना सबके लिए जरूरी है?
बाजार में ब्लू लाइट फिल्टर वाले चश्मों की काफी मांग है, लेकिन वैज्ञानिक शोधों में सभी के लिए इनके अनिवार्य होने के निर्णायक प्रमाण नहीं मिले हैं।
यदि किसी को स्क्रीन पर काम करते समय चश्मे से आराम महसूस होता है, तो वे इसका उपयोग कर सकते हैं। पहले से चश्मा पहनने वाले लोगों को अपने आई स्पेशलिस्ट की सलाह पर ही लेंस चुनना चाहिए।
डॉक्टर को कब दिखाना जरूरी है?
यदि आंखों में लगातार कई दिनों तक तेज दर्द बना रहे, नजर अचानक कमजोर होने लगे, चीजें दो-दो (डबल विजन) दिखने लगें या आंखों की लालिमा बिल्कुल कम न हो, तो घरेलू उपायों के भरोसे रहने के बजाय तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) से जांच करवाएं।








