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सरकार के आश्वासन के बाद भी नहीं बनी बात, देहरादून शहीद स्मारक से आई बड़ी खबर

राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच के बैनर तले देहरादून के शहीद स्मारक में आंदोलनकारियों का क्रमिक अनशन और धरना प्रदर्शन 56वें दिन भी जारी रहा। इस दौरान बाबा मोहन उत्तराखंडी को पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई और सरकार पर वादे से मुकरने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से जल्द मुलाकात का निर्णय लिया गया।

Activists pay tribute to Baba Mohan Uttarakhandi amid ongoing Dehradun protest

HIGHLIGHTS

  • शहीद स्मारक पर आंदोलन का 56वां दिन पूरा हुआ
  • राम किशन और अम्बुज शर्मा क्रमिक अनशन पर बैठे
  • शहीद बाबा मोहन उत्तराखंडी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई
  • 7 जुलाई की कैबिनेट में मामला न आने पर रोष
  • मुख्यमंत्री से दोबारा मुलाकात कर उप-समिति गठन की मांग

देहरादून, 9 अगस्त, 2026 (दून हॉराइज़न)।

अपनी लंबित नियुक्ति की मांगों को लेकर शहीद स्मारक में डटे राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। धरना और क्रमिक अनशन 56वें दिन में प्रवेश कर चुका है। आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

रविवार को क्रमिक अनशन की कमान विकासनगर से आए राम किशन और मंच के संयोजक अम्बुज शर्मा ने संभाली। दोनों नेता शहीद स्मारक स्थल पर अनशन पर बैठे। मौके पर मौजूद सभी आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले रखा।

अनशन स्थल पर पृथक उत्तराखंड राज्य निर्माण और गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने के लिए संघर्ष करने वाले महान आंदोलनकारी शहीद बाबा मोहन उत्तराखंडी जी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। वहां मौजूद लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प चढ़ाकर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

मंच के संयोजक अम्बुज शर्मा ने सरकारी प्रक्रिया पर कड़ा रोष जताया। आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष और दोनों उपाध्यक्षों के माध्यम से मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाई जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस फैसला सामने नहीं आ सका है।

इससे पहले कार्मिक सचिव शैलेश बगौली और उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल की मध्यस्थता में संयुक्त मंच की अहम वार्ता संपन्न हुई थी। उस वार्ता में सचिव ने मामले के स्थायी निस्तारण के लिए एक उप-समिति गठित करने का स्पष्ट वादा किया था।

सम्मान परिषद की उपाध्यक्षा की ओर से मुख्यमंत्री के मार्फत उप-समिति गठन के लिए दो अलग-अलग आवेदन पत्र भी दिए गए। इन आवेदनों पर उच्चस्तरीय बैठक हुई और प्रशासनिक नोटिंग की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी।

नोटिंग पूरी होने के बाद भी 7 जुलाई को आयोजित कैबिनेट बैठक में इस विषय को शामिल नहीं किया गया। आंदोलनकारियों ने इस रवैये को शासन और प्रशासन की नकारात्मक मानसिकता का प्रत्यक्ष प्रमाण करार दिया है।

चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय महामंत्री नवीन नैथानी और जिला अध्यक्ष विशम्भर बौंठियाल ने संयुक्त बयान में कहा कि 56 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। सरकार के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन जमीनी स्तर पर समाधान शून्य है।

आंदोलनकारी नेताओं ने ऐलान किया है कि समस्या के तत्काल समाधान और उप-समिति की आधिकारिक घोषणा करवाने के लिए अगले एक-दो दिनों के भीतर मुख्यमंत्री से दोबारा सीधा संवाद किया जाएगा।

रविवार को धरना स्थल पर आंदोलनकारियों का समर्थन करने भारी संख्या में लोग पहुंचे। समर्थन देने वालों में मोहन खत्री, सुरेश नेगी, रामलाल खंडूरी, प्रदीप कुकरेती, प्रभात डंडरियाल और ललित चंद्र जोशी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

इसके साथ ही नवीन नैथानी, विश्वंभर बोंठीयाल, मोहन चंद्र शर्मा, प्रशांत तड़ियाल, सुरेश कुमार, सुशील विरमानी, विनोद शरीयाल, आनंद बिष्ट, विनीत लोहानी, अरुणा थपलियाल, मनोज नौटियाल, सुशील चमोली, शांति शर्मा, राकेश थपलियाल, हरि सिंह महर, गीता बिष्ट, गणेश डंगवाल, प्रवीण गुसाईं, उपेंद्र प्रसाद, प्रताप सिंह राणा, क्रांति अभिषेक, यशोदा ममगाईं, राजेंद्र बहुगुणा, राधा तिवारी, सुधीर नारायण शर्मा, हरि प्रकाश शर्मा और पुष्पा बहुगुणा ने भी शहीद स्मारक पहुंचकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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