हेल्थ डेस्क, 05 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। केले को ऊर्जा का सबसे सुलभ स्रोत माना जाता है, लेकिन अब विज्ञान ने इसे फेंकने वाले छिलके को सेहत के लिए ‘गोल्ड माइन’ करार दिया है।
आमतौर पर कूड़ेदान में जाने वाला यह (Banana Peel Health Benefits) छिलका दरअसल गैलोकैटेचिन जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स का भंडार है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है।
केले के छिलके में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल तत्व शरीर से जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
यह कोशिकाओं को होने वाले ऑक्सीडेटिव डैमेज को रोकता है, जिससे शरीर बीमारियों के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार कर लेता है।
शोधकर्ताओं ने पाया है कि छिलके में फ्लेवोनोइड्स, टैनिन और सैपोनिन जैसे महत्वपूर्ण कंपाउंड्स की भरमार है। ये तत्व फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को खत्म करते हैं, जो मुख्य रूप से कैंसर, हृदय रोग और असमय बुढ़ापे के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि इन पोषक तत्वों का घनत्व केले के गूदे की तुलना में छिलके में बहुत अधिक होता है। बैक्टीरियल इन्फेक्शन के खिलाफ भी यह छिलका किसी अचूक हथियार से कम नहीं है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण ई. कोलाई, साल्मोनेला और स्टेफाइलोकोक्स जैसे घातक बैक्टीरिया को निष्क्रिय करने की क्षमता रखते हैं। ये वही बैक्टीरिया हैं जो आमतौर पर फूड पॉइजनिंग, तेज बुखार, पेट दर्द और गंभीर दस्त का कारण बनते हैं।
इतना ही नहीं, मसूड़ों की सेहत और दांतों की सड़न रोकने में भी केले के छिलके के अर्क को प्रभावी पाया गया है। इसमें मौजूद गैलिक एसिड और फेरुलिक एसिड फंगल संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।
कई उन्नत शोधों में यह भी देखा गया है कि अगर केले के छिलके से प्राकृतिक रंग तैयार किए जाएं, तो उनमें भी एंटीबैक्टीरियल गुण सुरक्षित रहते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब इस ‘वेस्ट’ को डाइट का हिस्सा बनाने की सलाह दे रहे हैं। इसे अच्छी तरह धोकर स्मूदी, हर्बल चाय या बेकिंग में शामिल किया जा सकता है।
त्वचा की रंगत सुधारने के लिए इसे फेस मास्क के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा रहा है, हालांकि विशेषज्ञ किसी भी नए प्रयोग से पहले डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेने की ताकीद करते हैं।













