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Haridwar SIR Voter List : बाप 30 का और बेटा 18 का! हरिद्वार की वोटर लिस्ट में खुला ऐसा राज कि अधिकारी भी रह गए हैरान

हरिद्वार जिले की चार विधानसभा सीटों पर चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में मतदाता सूची के भीतर उम्र और पारिवारिक संबंधों से जुड़ी कई अजीब और गंभीर खामियां पकड़ी गई हैं। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर प्रशासन ने सभी संदिग्ध प्रविष्टियों वाले मतदाताओं को नोटिस भेजकर जवाब और दस्तावेज तलब किए हैं।

Major errors found in Haridwar voter list verification, 30-year-old father and 18-year-old son recorded

HIGHLIGHTS

  • कलियर में 30 साल का पिता और 18 का बेटा
  • छह भाई-बहनों की उम्र में केवल दो साल का अंतर
  • तीन सगे भाइयों की उम्र वोटर लिस्ट में एक समान
  • संदिग्ध मतदाताओं को थमाए गए प्रशासनिक नोटिस

हरिद्वार, 9 अगस्त 2026 (दून हॉराइज़न)।

Haridwar SIR Voter List : हरिद्वार जिले में चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान मतदाता सूची की सत्यापन प्रक्रिया में कई ऐसी चौंकाने वाली प्रविष्टियां पकड़ में आई हैं, जिन्होंने चुनाव ड्यूटी में तैनात अधिकारियों को भी चकित कर दिया है। हरिद्वार ग्रामीण, कलियर, मंगलौर और लक्सर विधानसभा क्षेत्रों में घर-घर जाकर किए जा रहे वेरिफिकेशन में उम्र और पारिवारिक रिश्तों के जो आंकड़े कागजों में दर्ज मिले हैं, वे सामान्य तर्क से परे नजर आ रहे हैं। प्राथमिक रूप से इन सभी गलतियों को संदिग्ध मानते हुए प्रशासन ने संबंधित प्रविष्टियों को चिन्हित कर लिया है।

पिरांकलियर विधानसभा क्षेत्र के एक वार्ड में मतदाता सूची के सत्यापन के समय दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार पिता की उम्र 30 साल और उसके बेटे की उम्र 18 साल दर्ज पाई गई। कागजी आंकड़ों का सीधा गणित देखा जाए तो यह दर्शाता है कि संबंधित व्यक्ति महज 12 वर्ष की आयु में पिता बन गया था। इस प्रविष्टि के सामने आते ही स्थानीय बीएलओ ने तुरंत मामले की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी, जिसके बाद संबंधित परिवार के मूल निवास और आयु संबंधी प्रमाण पत्रों की फिर से पड़ताल शुरू कराई गई है।

जांच टीम को एक अन्य मामले में पिता की दर्ज आयु 72 वर्ष और उसके बेटे की उम्र 18 वर्ष लिखी हुई मिली है। इसी तरह एक जगह 54 वर्ष की आयु में पिता बनने का विवरण वोटर लिस्ट के कागजों में दर्ज पाया गया। अधिकारियों का कहना है कि हालांकि जैविक रूप से यह संभव हो सकता है, लेकिन जिस तरह से एक साथ कई अजीबोगरीब प्रविष्टियां एक ही क्षेत्र से सामने आ रही हैं, उससे डाटा एंट्री में लापरवाही या गलत जानकारी फॉर्म में भरे जाने की आशंका गहरा गई है।

हरिद्वार के ग्रामीण इलाकों में किए जा रहे सत्यापन के दौरान एक ही परिवार के छह भाई-बहनों के बीच की कुल उम्र का अंतर केवल दो साल दर्ज पाया गया। व्यवहारिक रूप से इतने कम समय के अंतराल में छह बच्चों का जन्म होना संभव नहीं है। इसी प्रकार एक अन्य प्रविष्टि में तीन सगे भाइयों की उम्र मतदाता सूची के कॉलम में बिल्कुल एक समान दर्ज की गई है, जिससे यह जाहिर होता है कि फॉर्म भरते समय या ऑनलाइन पोर्टल पर फीडिंग के दौरान गंभीर चूक हुई है।

इन तमाम गड़बड़ियों के उजागर होने के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई इलाकों में ग्रामीण इसे चुनाव आयोग के पोर्टल की तकनीकी खामी बता रहे हैं तो कुछ स्थानों पर बीएलओ द्वारा घर-घर जाए बिना मनमाने तरीके से आंकड़े भरने का आरोप लगाया जा रहा है। मतदाता सूची में दर्ज इन विरोधाभासी आंकड़ों के फोटो और विवरण स्थानीय सोशल मीडिया समूहों पर भी तेजी से शेयर हो रहे हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर अभियान का मूल मकसद ही मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। उन्होंने प्रशासनिक अमले को निर्देश दिए हैं कि सत्यापन में सामने आ रही हर एक संदिग्ध प्रविष्टि की नियमानुसार गहराई से पड़ताल की जाए। जिलाधिकारी के अनुसार किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित नागरिक को अपनी बात और दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा मौका दिया जाएगा।

चुनावी रजिस्ट्रेशन विभाग ने कार्रवाई करते हुए उन सभी मतदाताओं को औपचारिक नोटिस जारी कर दिए हैं, जिनके रिकॉर्ड में उम्र या संबंधों का यह बेमेल अंतर मिला है। नोटिस मिलने के बाद संबंधित व्यक्तियों को अपने जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, शैक्षणिक योग्यता के कागजात या अन्य मान्य दस्तावेज बीएलओ या तहसील कार्यालय में जमा करने होंगे। जो लोग निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने सही दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे, उनकी प्रविष्टियों में तत्काल सुधार कर दिया जाएगा।

चुनाव अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि महज मतदाता सूची में दर्ज गलत उम्र के आधार पर किसी भी नागरिक का नाम सीधे तौर पर सूची से काटा नहीं जाएगा। जब तक भौतिक सत्यापन और कागजातों की पूर्ण जांच नहीं हो जाती, तब तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा। जिन मामलों में जानबूझकर गलत विवरण देने या फर्जी दस्तावेज लगाने की पुष्टि होगी, उनके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व कानून की सुसंगत धाराओं के तहत आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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