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स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल का निर्देश, तय समय पर हो आशा वर्करों के पैसों का भुगतान

उत्तराखंड सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं और फैसिलिटेटर्स के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 का 37.76 करोड़ रुपये का मानदेय जारी कर दिया है। 10 सितंबर को विकासखंडवार फंड ट्रांसफर किया गया।

Published On: September 11, 2026 4:20 PM
Uttarakhand ASHA workers

HIGHLIGHTS

  • वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल ₹37,76,51,736 की भारी-भरकम राशि जारी हुई।
  • आशा कार्यकर्ताओं के खाते में ₹3,300 और फैसिलिटेटर्स को ₹2,000 मासिक फिक्स मानदेय।
  • 10 सितंबर को सभी जिलों को विकासखंडवार सीधे खातों में भेजी गई धनराशि।
  • टीबी उन्मूलन, टीकाकरण और मातृ-शिशु देखभाल जैसी फील्ड योजनाओं के लिए अलग प्रोत्साहन राशि।

दून हॉराइज़न, देहरादून (11 सितंबर): उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर तराई के दूरदराज गांवों तक बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा बहुओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है।

स्वास्थ्य महकमे ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत राज्यभर के विकासखंडों में तैनात आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटर्स के मासिक मानदेय की अटकी प्रक्रिया को हरी झंडी दिखाते हुए 37.76 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी कर दी है। जिलों को विकासखंडवार यह पैसा सीधे आवंटित किया गया है, जिससे हजारों स्वास्थ्य कर्मियों को समय पर आर्थिक संबल मिल सकेगा।

37.76 करोड़ का बजट सीधे ब्लॉक स्तर पर हुआ ट्रांसफर

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM Uttarakhand) के अंतर्गत जारी इस बजट में से ₹36,64,52,856 केवल आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय मद में रखे गए हैं। वहीं, फील्ड मॉनिटरिंग और सुपरविजन का जिम्मा संभालने वाली आशा फैसिलिटेटर्स के हिस्से ₹1,11,98,880 की राशि आई है। 10 सितंबर को यह पूरी रकम जिलों के संबंधित विकासखंडवार बैंक खातों में डिजिटली निर्गत कर दी गई।

प्रशासनिक स्तर पर इस बात की निगरानी की जा रही है कि ब्लॉक मुख्यालयों से आशा कर्मियों के व्यक्तिगत बैंक खातों (DBT) में क्रेडिट होने में किसी तकनीकी वजह से अनावश्यक देरी न हो। अमूमन पर्वतीय जनपदों में ट्रेजरी या ब्लॉक स्तर पर बिल पासिंग में हफ्तों लग जाते थे, लेकिन इस बार अग्रिम वित्तीय आवंटन से इस प्रक्रिया को तेज रखने का लक्ष्य है।

फिक्स मानदेय के अलावा कार्यक्रमवार मिलेगा अलग इंसेंटिव

नियमों के तहत आशा कार्यकर्ताओं को ₹3,300 प्रतिमाह और फैसिलिटेटर्स को ₹2,000 प्रतिमाह का फिक्स स्टाइपेंड मिलता है। लेकिन बात सिर्फ इतने पर खत्म नहीं होती।

गांवों में संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) कराने, गर्भवती महिलाओं का समय पर रजिस्ट्रेशन, बच्चों का नियमित टीकाकरण (Routine Immunization) और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत टीबी मरीजों की निगरानी जैसे संवेदनशील अभियानों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाती है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) जैसी योजनाओं में फील्ड स्क्रीनिंग का जिम्मा भी इन्हीं के कंधों पर रहता है, जिसका टास्क-आधारित इंसेंटिव अलग से जुड़ता है।

पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में जब एंबुलेंस भी समय पर नहीं पहुंच पाती, तब यही कार्यकर्ता आधी रात को भी गर्भवती महिलाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) तक ले जाने में मदद करती हैं।

“स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं आशा बहनें”: सुबोध उनियाल

मामले में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने साफ किया कि सरकार स्वास्थ्य तंत्र की इस जमीनी इकाई के हितों की अनदेखी नहीं होने देगी। मंत्री ने बयान में कहा कि अंतिम व्यक्ति तक दवा और उपचार का भरोसा कायम रखने में आशा बहुओं का परिश्रम अद्वितीय है। उनके मनोबल को बनाए रखने के लिए समयबद्ध भुगतान पहली प्राथमिकता है।

अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि किसी भी जिले में तकनीकी बहाने बनाकर यह भुगतान लंबित न रखा जाए। स्वास्थ्य विभाग अब ब्लॉक स्तर से सीधे ट्रेजरी क्लीयरेंस और डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (DBT) की प्रगति रिपोर्ट भी तलब करेगा ताकि हर कार्यकर्ता तक यह राशि बिना किसी अड़चन के पहुंच सके।

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Harpreet Singh

हरप्रीत सिंह पिछले 10 वर्षों से 'दून हॉराइज़न' के साथ जुड़े हुए हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक का अनुभव रखने वाले हरप्रीत की उत्तराखंड और अन्य राज्यों की खबरों पर गहरी पकड़ है. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने भारतीय विद्या भवन, मुंबई से पब्लिक रिलेशंस (जनसंपर्क) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी पूरा किया है. अपने अनुभव और शिक्षा के माध्यम से वे पाठकों तक सटीक और विश्लेषणात्मक खबरें पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

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